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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bijnor News ›   West could pose a threat to the state terror

वेस्ट यूपी के लिए खतरा बन सकते थे आतंकी

Tue, 01 Nov 2016 12:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर Updated Tue, 01 Nov 2016 12:30 AM IST
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मेरठ  में भोपाल सेंट्रल जेल से भागने के बाद हुए एनकाउंटर में मारे गए सिमी के आतंकी मेरठ समेत वेस्ट यूपी के बारे में अच्छी जानकारी रखते थे।  इन आठ आतंकियों में से एक अपने साथियों के साथ मेरठ के पीएल शर्मा रोड से लैपटॉप, कंप्यूटर डिवाइस और अन्य उपकरण खरीदकर ले गया था। जेल ब्रेक होते ही केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मेरठ जोन के आईजी और रेंज के डीआईजी को खासतौर पर अलर्ट रहने के लिए कहा था।
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भोपाल में मारे गए आठ आतंकियों में से एक अमजद अपने साथियों के साथ पीएल शर्मा रोड पर 23 अगस्त 2014 और छह सितंबर 2014 को आया था। 23 अगस्त को उसने 25 हजार रुपये में लैपटॉप और छह सितंबर को एंटी वायरस डिवाइस समेत कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खरीदे थे। 
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आतंकी दो दिन मेरठ में घूमे और उनके पास काफी नकदी भी थी। आतंकियों ने आबूलेन बाजार से शॉपिंग भी की थी। दोनों दिन  आतंकी मेरठ में करीब चार घंटे रुके थे। तेलंगाना में आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद इसका खुलासा हुआ था। इसके पहले बिजनौर में बम बनाते समय विस्फोट हो गया था, जिससे इन चारों आतंकियों को वहां से भागना पड़ा था। एटीएस लखनऊ के अफसरों ने मेरठ में आकर पीएल शर्मा रोड मार्केट में गैलेक्सी कंप्यूटर शॉप के मालिक संजय गोयल से पूछताछ भी की। 
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सीसीटीवी फुटेज के आधार पर इनकी शिनाख्त की। इनमें से एजाज अपने साथी असलम के साथ तेलंगाना में तीन अप्रैल 2015  को मुठभेड़ में मारा गया था।

सुरक्षित ठिकाना था बिजनौर 
 बिजनौर आतंकियों की शरणस्थली बनता जा रहा था। सिमी के आतंकियों से पहले भी कई आतंकी कनेक्शन इस जिले से निकल चुके हैं। करीब 25 सालों में कई आतंकियों ने यहां पनाह ली। बम बनाते हुए मोहल्ला जाटान में हुए विस्फोट के बाद यहां से भागे सिमी आतंकियों के बाद खुलासा हो चुका था कि बिजनौर आतंकियों का सुरक्षित ठिकाना बन चुका था। 
 खंडवा की शहीद टंट्या भील जिला जेल से फरार होकर सिमी आतंकियों के बिजनौर के मोहल्ला जाटान व भाटान के दो कमरों में रहकर देश को हिलाने की साजिश करने का खुलासा 12 सितंबर 2014 को जाटान में बम बनाते हुए ब्लॉस्ट से हुआ था। फरार सिमी आतंकियों मोहम्मद सालिक, अमजद, जाकिर, महबूब उर्फ गुड्डू को महबूब की मां नाजमा समेत 17 फरवरी 2016 को उड़ीसा के राउरकेला में एक मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया था। बिजनौर से फरार हुए छह आतंकियों में से दो अन्य फरार साथी असलम और एजाजुद्दीन तेलंगाना में तीन अप्रैल 2015 को पुलिस मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं। आतंकियों की मदद में आठ स्थानीय लोगों को गिरफ्तार किया गया था। तीन की जमानत हो चुकी है, जबकि मददगारों हुस्ना, फुरकान, नदीम, अब्दुल्ला और रईस को लखनऊ जेल स्थानांतरित किया जा चुका है।
जून 2008 में बढ़ापुर क्षेत्र के सरदारपुर छायली निवासी नौशाद के साथ एसटीएफ ने हूजी आतंकी कोलकाता के जलालुद्दीन उर्फ बाबू भाई  को गिरफ्तार किया। दोनों पर वाराणसी के प्रसिद्ध संकट मोचन मंदिर को विस्फोट से उड़ाने की साजिश का आरोप रहा।
26 जून 2007 में एसटीएफ ने बढ़ापुर क्षेत्र के मोहल्ला नौमी निवासी नासिर व ग्राम तारापुर के याकूब को लखनऊ में गिरफ्तार किया था। दोनों के पास से सात किलो आरडीएस के अलावा डेटोनेटर, तार, बैटरी सहित दो घड़ियां, दो बैटरी, रिमोट सहित स्विच बरामद बताए गए थे। दोनों को हूजी समर्थित आतंकी बताया गया। कुछ माह पूर्व नासिर को कोर्ट ने बेकसूर मानते हुए बरी कर दिया है। दिल्ली पुलिस ने फरवरी      2007 को दिल्ली के सरोजिनीनगर में धनतेरस पर हुए बम ब्लास्ट के आरोपी हूजी आतंकी अब्दुल रहमान को दबोचा। अब्दुल रहमान के इस खुलासे ने सबको चौंकाया कि जलालुद्दीन उर्फ बाबू भाई के साथ धामपुर को काफी समय अपना ठिकाना बनाकर रखा।  मिनी कैंप चलाकर यहां के बेरोजगार युवकों को आतंक का प्रशिक्षण दिया गया। 
बाबू देश में बांग्लादेश समर्थित कुख्यात आतंकवादी संगठन हरकत-उल-जेहाद अल इस्लाम (हूजी) के आतंकियों को तैयार करने वालों का मुखिया बताया जाता है।
15 अक्टूबर 2001 को बिजनौर में नजीबाबाद रोड पर थाना कोतवाली शहर पुलिस ने चार आतंकवादियों को मार गिराया था। इस दौरान दरोगा एसपी सिंह व कांस्टेबिल अनिल कुमार शहीद हो गए थे, जबकि कांस्टेबल राजेंद्र सिंह सिद्धू घायल हो गया था। पुलिस ने जांच के दौरान पाया कि मुठभेड़ में कश्मीर में पंद्रह वर्ष से सक्रिय बिजनौर के काजीवाला का जहीर, लालपुरा किरतपुर का अब्दुल वारिस, शहाबुद्दीन व चौक थाना कर्मपुरा कश्मीर का अब्दुल हमीद मारे गये थे। ग्राम काजीवाला में रह रहे अब्दुल हमीद के संबंध कुख्यात आतंकवादी गाजी बाबा से जुड़े निकले थे।

इससे पहले वर्ष 1993 में मुंबई बम विस्फोट के मुख्य आरोपी दौसा बंधुओं के निकट सहयोगी सलीम कुत्ता को नजीबाबाद थाने के ग्राम कल्हेड़ी से गिरफ्तार किया गया था। लोगों की आंखों में धूल झोंककर यहां कोयला बेचने का काम कर रहे सलीम कुत्ता को गुजरात के आतंकवाद निरोधक दस्ते ने गिरफ्तार किया था।
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