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वेतन को लेकर भिड़े अफसर
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Sat, 29 Oct 2016 12:03 AM IST
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बिजनौर में विकास भवन में दीपावली से पहले वेतन को लेकर दो अधिकारी आपस में भिड़ गए। इससे काफी देर तक हंगामे का माहौल रहा। इससे कामकाज भी प्रभावित रहा। बाद में कर्मचारियों ने समझाकर उन्हें शांत कराया।
जिला समाज कल्याण अधिकारी अजय कुमार गोस्वामी के अनुसार सुधांशु शेखर समाज कल्याण अधिकारी (विकास) हैं। उनका तबादला जून में जिला उन्नाव के लिए हो गया था। शुक्रवार को वह उनके कार्यालय में आए और अगस्त का वेतन दिलाने को कहा। उनके द्वारा नियमानुसार वेतन नहीं दिए जाने की बात कही गई। आरोप है कि इससे नाराज सुधांशु शेखर ने हंगामा शुरू कर दिया। वह शोर मचाते हुए कार्यालय से बाहर निकल गए और दीपावली से पहले वेतन दिलाने की मांग करते रहे।
जिला समाज कल्याण अधिकारी का कहना था कि ब्लॉक के सहायक विकास अधिकारियों का वेतन समाज कल्याण अधिकारी विकास के हस्ताक्षर से ही उनके समक्ष पारित होने के लिए आता है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुधांशु शेखर गुस्से में दोबारा जिला समाज कल्याण अधिकारी के कार्यालय की ओर चले लेकिन कुछ विभागों के कर्मचारियों ेने उन्हें रोक लिया। कर्मचारियों ने उनसे कहा कि अधिकारी मामले को आमने सामने बैठकर निपटाएं। इसके बाद सुधांशु शेखर चले गए। सुधांशु शेखर का कहना है कि वह पांच साल फौज में रहकर आएं हैं। वह दूसरों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं करते हैं तो फिर अपने साथ कैसे बर्दाश्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जो कुछ हुआ, गलत हुआ। उन्हें अब इस बारे में कुछ नहीं कहना है।
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किसी ने भी कहीं कोई शिकायत नहीं की।
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जिला समाज कल्याण अधिकारी अजय कुमार गोस्वामी के अनुसार सुधांशु शेखर समाज कल्याण अधिकारी (विकास) हैं। उनका तबादला जून में जिला उन्नाव के लिए हो गया था। शुक्रवार को वह उनके कार्यालय में आए और अगस्त का वेतन दिलाने को कहा। उनके द्वारा नियमानुसार वेतन नहीं दिए जाने की बात कही गई। आरोप है कि इससे नाराज सुधांशु शेखर ने हंगामा शुरू कर दिया। वह शोर मचाते हुए कार्यालय से बाहर निकल गए और दीपावली से पहले वेतन दिलाने की मांग करते रहे।
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जिला समाज कल्याण अधिकारी का कहना था कि ब्लॉक के सहायक विकास अधिकारियों का वेतन समाज कल्याण अधिकारी विकास के हस्ताक्षर से ही उनके समक्ष पारित होने के लिए आता है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुधांशु शेखर गुस्से में दोबारा जिला समाज कल्याण अधिकारी के कार्यालय की ओर चले लेकिन कुछ विभागों के कर्मचारियों ेने उन्हें रोक लिया। कर्मचारियों ने उनसे कहा कि अधिकारी मामले को आमने सामने बैठकर निपटाएं। इसके बाद सुधांशु शेखर चले गए। सुधांशु शेखर का कहना है कि वह पांच साल फौज में रहकर आएं हैं। वह दूसरों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं करते हैं तो फिर अपने साथ कैसे बर्दाश्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जो कुछ हुआ, गलत हुआ। उन्हें अब इस बारे में कुछ नहीं कहना है।
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