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डेंगू और चिकनगुनिया से नहीं हुई कोई मौत
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Sat, 15 Oct 2016 12:26 AM IST
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बिजनौर में जिले में बुखार से केवल 22 मरीजों की ही मौत हुई है। इन सबकी मौत भी वायरल यानि साधारण बुखार से हुई है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े यहीं बात कह रहे हैं। अधिकारियों ने जिले में कहीं भी डेंगू या चिकनगुनिया से मौत होने की बात को स्वीकार नहीं किया है। बाकी मरीजों की मौत कैसे हुई, इसका पता लगाने की स्वास्थ्य विभाग ने कोशिश भी नहीं की है।
जिले में बुखार का प्रकोप करीब एक महीने से फैला है। डेंगू और चिकनगुनिया के मरीजों की संख्या भी कम नहीं है। नूरपुर क्षेत्र के दो गांवों रवाना में 27 और शिकारपुर में 13 लोगों की मौत बुखार से हो चुकी है। यानि केवल दो गांवों में ही बुखार से 40 लोगों की मौत हो चुकी है। गांव वाले डेंगू और चिकनगुनिया से भी बुखार पीड़ितों की मौत होना बता रहे हैं। बाकी जिले के गांवों व नगर में भी बुखार से मौतें हुई हैं। इससे बुखार से मरने वालों की संख्या का अनुमान ही लगाया जा सकता है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में जिले में अब तक केवल 22 मरीजों की ही मौत बुखार से हुई है। इन लोगों को भी केवल वायरल या सामान्य बुखार ही था।
स्वास्थ्य विभाग की मानें तो जिले में डेंगू और चिकनगुनिया से एक भी मरीज की मौत नहीं हुई है। विभागीय आंकड़ों के अलावा बुखार या चिकनगुनिया या डेंगू से किसी मरीज की मौत हुई है या फिर कुल कितने मरीजों की मौत हुई है, स्वास्थ्य विभाग ने यह जानना भी गंवारा नहीं किया है। विभाग की रिपोर्ट के अनुसार अगर केवल वायरल से ही मरीजों की मौत हुई है तो अगर जिले में डेंगू या चिकनगुनिया फैला होता तो स्वास्थ्य विभाग की हालत क्या होती, इसका अंदाजा ही लगाया जा सकता है।
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सीएमओ डा. सुखबीर सिंह के अनुसार डेंगू के तीन व चिकनगुनिया का एक केस मिला था, लेकिन किसी की मौत नहीं हुई है। जिले के जिन क्षेत्रों में इन बीमारियों का पता चलता है वहां विभाग की ओर से फॉगिंग व कीटनाशक छिड़काव कराया जाता है। कैंप लगाकर रक्त की नमूने लिए जाते हैं और कैंपों में उपचार कर दवाइयां दी जाती है।
अफजलगढ़ में बुखार के प्रकोप के कारण अब भी सीएचसी पर मरीजों की भीड़ बढ़ रही है। बुखार से ग्रसित बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं अस्पताल में जिंदगी बचाने के लिए जूझ रहे हैं।बुखार के मरीजों की बढ़ती संख्या के चलते सीएचसी की ओपीडी प्रतिदिन 250 को पार कर रही है। रोगी बढ़ने से अस्पताल में चिकित्सक कम पड़ रहे हैं। एक चिकित्सक को रोगियों का चेकअप करने में ही पसीने छूट रहे हैं। दिनभर अस्पताल में मरीजों की भीड़ लगी रहती है। मरीज अशरफ, मुमताज हुसैन, उजमा, सलमा, मुमताज, नजरा, इमरान आदि का कहना है कि बुखार के इतने प्रकोप के बावजूद एक ही चिकित्सक है। यह प्रकोप कम होने तक यहां कम से कम दो चिकित्सक की व्यवस्था होनी चाहिए। उनका कहना है कि डेंगू या चिकनगुनिया की पुष्टि भी नहीं हो पा रही है। उधर, सीएचसी प्रभारी राजीव चौहान का कहना है कि अस्पताल में प्रत्येक मरीज को दवाई उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं एक माह से बुखार के कहर के बाद शुक्रवार को पालिका की नींद टूटी। पालिकाध्यक्ष ने सीएचसी में मरीजों की हालत का जायजा लेने के बाद नगर में कीटनाशक दवाई छिड़काव करने का आदेश दिया। पालिकाध्यक्ष के आदेश मिलते ही नगर में गली मुहल्लों में मच्छरों के प्रकोप को थामने के लिए दवाइयों का छिड़काव कराया गया।
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जिले में बुखार का प्रकोप करीब एक महीने से फैला है। डेंगू और चिकनगुनिया के मरीजों की संख्या भी कम नहीं है। नूरपुर क्षेत्र के दो गांवों रवाना में 27 और शिकारपुर में 13 लोगों की मौत बुखार से हो चुकी है। यानि केवल दो गांवों में ही बुखार से 40 लोगों की मौत हो चुकी है। गांव वाले डेंगू और चिकनगुनिया से भी बुखार पीड़ितों की मौत होना बता रहे हैं। बाकी जिले के गांवों व नगर में भी बुखार से मौतें हुई हैं। इससे बुखार से मरने वालों की संख्या का अनुमान ही लगाया जा सकता है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में जिले में अब तक केवल 22 मरीजों की ही मौत बुखार से हुई है। इन लोगों को भी केवल वायरल या सामान्य बुखार ही था।
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स्वास्थ्य विभाग की मानें तो जिले में डेंगू और चिकनगुनिया से एक भी मरीज की मौत नहीं हुई है। विभागीय आंकड़ों के अलावा बुखार या चिकनगुनिया या डेंगू से किसी मरीज की मौत हुई है या फिर कुल कितने मरीजों की मौत हुई है, स्वास्थ्य विभाग ने यह जानना भी गंवारा नहीं किया है। विभाग की रिपोर्ट के अनुसार अगर केवल वायरल से ही मरीजों की मौत हुई है तो अगर जिले में डेंगू या चिकनगुनिया फैला होता तो स्वास्थ्य विभाग की हालत क्या होती, इसका अंदाजा ही लगाया जा सकता है।
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सीएमओ डा. सुखबीर सिंह के अनुसार डेंगू के तीन व चिकनगुनिया का एक केस मिला था, लेकिन किसी की मौत नहीं हुई है। जिले के जिन क्षेत्रों में इन बीमारियों का पता चलता है वहां विभाग की ओर से फॉगिंग व कीटनाशक छिड़काव कराया जाता है। कैंप लगाकर रक्त की नमूने लिए जाते हैं और कैंपों में उपचार कर दवाइयां दी जाती है।
अफजलगढ़ में बुखार के प्रकोप के कारण अब भी सीएचसी पर मरीजों की भीड़ बढ़ रही है। बुखार से ग्रसित बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं अस्पताल में जिंदगी बचाने के लिए जूझ रहे हैं।बुखार के मरीजों की बढ़ती संख्या के चलते सीएचसी की ओपीडी प्रतिदिन 250 को पार कर रही है। रोगी बढ़ने से अस्पताल में चिकित्सक कम पड़ रहे हैं। एक चिकित्सक को रोगियों का चेकअप करने में ही पसीने छूट रहे हैं। दिनभर अस्पताल में मरीजों की भीड़ लगी रहती है। मरीज अशरफ, मुमताज हुसैन, उजमा, सलमा, मुमताज, नजरा, इमरान आदि का कहना है कि बुखार के इतने प्रकोप के बावजूद एक ही चिकित्सक है। यह प्रकोप कम होने तक यहां कम से कम दो चिकित्सक की व्यवस्था होनी चाहिए। उनका कहना है कि डेंगू या चिकनगुनिया की पुष्टि भी नहीं हो पा रही है। उधर, सीएचसी प्रभारी राजीव चौहान का कहना है कि अस्पताल में प्रत्येक मरीज को दवाई उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं एक माह से बुखार के कहर के बाद शुक्रवार को पालिका की नींद टूटी। पालिकाध्यक्ष ने सीएचसी में मरीजों की हालत का जायजा लेने के बाद नगर में कीटनाशक दवाई छिड़काव करने का आदेश दिया। पालिकाध्यक्ष के आदेश मिलते ही नगर में गली मुहल्लों में मच्छरों के प्रकोप को थामने के लिए दवाइयों का छिड़काव कराया गया।