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भाई की जगह जेल में बंद बाली हुआ रिहा
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Fri, 20 Jan 2017 11:43 PM IST
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बिजनौर में हत्या के मामले में भाई पप्पू की जगह करीब दस साल से जेल में बंद बाली उर्फ बल बहादुर को शुक्रवार की सुबह जेल से रिहाई मिल गई है। कोर्ट ने उसे जमानत पर छोड़ने के आदेश दिए थे।
नगीना देहात थाना के गांव साबूवाला निवासी धर्मपाल की 23 फरवरी 2001 में हत्या कर दी गई थी। मृतक के पिता की और से धर्मपाल की पत्नी इंद्रा देवी व उसके दो भाई पप्पू उर्फ वीर बहादुर व शिव सिंह उर्फ गुड्डू समेत पांच के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया गया था। पप्पू के अलावा पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। चार आरोपियों को 29 नवंबर 2003 को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने पप्पू को भगौड़ा घोषित कर दिया तथा पुलिस को उसे गिरफ्तार करने का आदेश दिया था। पुलिस ने इस मामले में पप्पू की जगह उसके भाई बाली उर्फ बल बहादुर को गिरफ्तार कर उसे पप्पू बताते हुए 30 अप्रैल 2006 को जेल भेज दिया था। तभी से वह जेल में बंद था। न्यायिक अधिकारियों के जेल विजिट के दौरान यह मामला उनके सामने आया था। इस मामले में पूर्व में जेल में रहे पप्पू के फिंगर प्रिंट से जब मिलान कराया गया तब इस बात की पुष्टि हुई कि पप्पू की जगह जेल में बंद दूसरा व्यक्ति उसका भाई है। एडीजे कोर्ट ने इस पर पप्पू की जगह जेल में बंद बाली उर्फ बल बहादुर को जमानत पर छोड़ जाने के आदेश दिए। बृहस्पतिवार को इस मामले में रिहाई परवाना जेल पहुंचा। शुक्रवार की सुबह बाली उर्फ बल बहादुर को जेल से जमानत पर रिहा कर दिया गया।
नौशाद को बिजनौर जेल से भेजा लखनऊ
बिजनौर। वाराणसी के संकट मोचन मंदिर को विस्फोट से उड़ाने की साजिश में कोर्ट द्वारा बरी किए गए नौशाद को हाईकोर्ट के आदेश पर गिरफ्तारी के बाद लखनऊ जेल भेज दिया गया। जहां 30 जनवरी 2017 में उसकी हाईकोर्ट में पेशी होगी।लगभग एक वर्ष पूर्व लखनऊ की स्पेशल कोर्ट द्वारा नौशाद को बरी कर दिया गया था। इस आदेश के खिलाफ शासन की और से हाईकोर्ट में अपील दाखिल की गई थी। अपील में नौशाद के पेश न होने पर हाईकोर्ट ने उसके गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे। इस पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। 13 जनवरी को उसे जेल भेज दिया गया था। नौशाद को बिजनौर जेल से लखनऊ भेज दिया गया है।
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नगीना देहात थाना के गांव साबूवाला निवासी धर्मपाल की 23 फरवरी 2001 में हत्या कर दी गई थी। मृतक के पिता की और से धर्मपाल की पत्नी इंद्रा देवी व उसके दो भाई पप्पू उर्फ वीर बहादुर व शिव सिंह उर्फ गुड्डू समेत पांच के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया गया था। पप्पू के अलावा पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। चार आरोपियों को 29 नवंबर 2003 को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने पप्पू को भगौड़ा घोषित कर दिया तथा पुलिस को उसे गिरफ्तार करने का आदेश दिया था। पुलिस ने इस मामले में पप्पू की जगह उसके भाई बाली उर्फ बल बहादुर को गिरफ्तार कर उसे पप्पू बताते हुए 30 अप्रैल 2006 को जेल भेज दिया था। तभी से वह जेल में बंद था। न्यायिक अधिकारियों के जेल विजिट के दौरान यह मामला उनके सामने आया था। इस मामले में पूर्व में जेल में रहे पप्पू के फिंगर प्रिंट से जब मिलान कराया गया तब इस बात की पुष्टि हुई कि पप्पू की जगह जेल में बंद दूसरा व्यक्ति उसका भाई है। एडीजे कोर्ट ने इस पर पप्पू की जगह जेल में बंद बाली उर्फ बल बहादुर को जमानत पर छोड़ जाने के आदेश दिए। बृहस्पतिवार को इस मामले में रिहाई परवाना जेल पहुंचा। शुक्रवार की सुबह बाली उर्फ बल बहादुर को जेल से जमानत पर रिहा कर दिया गया।
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नौशाद को बिजनौर जेल से भेजा लखनऊ
बिजनौर। वाराणसी के संकट मोचन मंदिर को विस्फोट से उड़ाने की साजिश में कोर्ट द्वारा बरी किए गए नौशाद को हाईकोर्ट के आदेश पर गिरफ्तारी के बाद लखनऊ जेल भेज दिया गया। जहां 30 जनवरी 2017 में उसकी हाईकोर्ट में पेशी होगी।लगभग एक वर्ष पूर्व लखनऊ की स्पेशल कोर्ट द्वारा नौशाद को बरी कर दिया गया था। इस आदेश के खिलाफ शासन की और से हाईकोर्ट में अपील दाखिल की गई थी। अपील में नौशाद के पेश न होने पर हाईकोर्ट ने उसके गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे। इस पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। 13 जनवरी को उसे जेल भेज दिया गया था। नौशाद को बिजनौर जेल से लखनऊ भेज दिया गया है।
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