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महिला की मौत होने पर अस्पताल में हंगामा
Updated Fri, 15 Sep 2017 01:07 AM IST
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नहटौर। प्रसव के लिए भर्ती महिला की मौत होने पर ग्रामीणों ने उपचार में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए अस्पताल के बाहर जमकर हंगामा किया। चिकित्सक मौके पर फरार हो गए। मौके पर पहुंची पुलिस ने मामले को शांत कराया।
गांव मंडौरा निवासी भूरे ने (28) पत्नी लक्ष्मी को नहटौर-नूरपुर मार्ग पर एक निजी हॉस्पिटल में प्रसव के लिए भर्ती कराया था। ग्रामीणों के मुताबिक हास्पिटल में डिलीवरी करने के लिए चिकित्सक बाहर से आता है। भर्ती कराने के बाद महिला प्रसव के लिए तड़पती रही। चिकित्सक का इंतजार होता रहा, लेकिन डिलीवरी करने के लिए चिकित्सक के नहीं पहुंचने पर महिला की हालत बिगड़ गई। महिला की हालत बिगड़ने पर आनन फानन में रेफर कर दिया गया। उपचार के लिए बिजनौर ले जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई। परिजनों ने चिकित्सकों पर लापरवाही करने का आरोप लगाते हुए शव को हास्पिटल के सामने लाकर रख दिया। रात करीब दस बजे पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस को साथ लेकर कुछ लोगों ने दोनों पक्षों में समझौता करा दिया। इसके बाद परिजन शव को गांव लेकर आए। चिकित्सक एस मलिक का कहना है कि आरोप निराधार है। एसएसआई मदन मोहन चतुर्वेदी का कहना है कि शिकायत मिलने पर पुलिस मौके पर गई थी। पुलिस समझौता होने की पुष्टि कर रही है।
एजेंट के माध्यम से चल रह
नगर में एजेंट के माध्यम से कई अस्पताल चल रहे हैं। इन अस्पतालों में डिलीवरी करने के लिए बिजनौर व धामपुर के चिकित्सकों को बुलाया जाता है। गंभीर हालत के मरीजों की मौत तक हो जाती है। एजेंट को चार से पांच हजार रुपये तक दिए जाते हैं। सरकारी अस्पतालों से लौटाए गए मरीज भी इन अस्पतालों में पहुंच जाते हैं।
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गांव मंडौरा निवासी भूरे ने (28) पत्नी लक्ष्मी को नहटौर-नूरपुर मार्ग पर एक निजी हॉस्पिटल में प्रसव के लिए भर्ती कराया था। ग्रामीणों के मुताबिक हास्पिटल में डिलीवरी करने के लिए चिकित्सक बाहर से आता है। भर्ती कराने के बाद महिला प्रसव के लिए तड़पती रही। चिकित्सक का इंतजार होता रहा, लेकिन डिलीवरी करने के लिए चिकित्सक के नहीं पहुंचने पर महिला की हालत बिगड़ गई। महिला की हालत बिगड़ने पर आनन फानन में रेफर कर दिया गया। उपचार के लिए बिजनौर ले जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई। परिजनों ने चिकित्सकों पर लापरवाही करने का आरोप लगाते हुए शव को हास्पिटल के सामने लाकर रख दिया। रात करीब दस बजे पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस को साथ लेकर कुछ लोगों ने दोनों पक्षों में समझौता करा दिया। इसके बाद परिजन शव को गांव लेकर आए। चिकित्सक एस मलिक का कहना है कि आरोप निराधार है। एसएसआई मदन मोहन चतुर्वेदी का कहना है कि शिकायत मिलने पर पुलिस मौके पर गई थी। पुलिस समझौता होने की पुष्टि कर रही है।
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एजेंट के माध्यम से चल रह
नगर में एजेंट के माध्यम से कई अस्पताल चल रहे हैं। इन अस्पतालों में डिलीवरी करने के लिए बिजनौर व धामपुर के चिकित्सकों को बुलाया जाता है। गंभीर हालत के मरीजों की मौत तक हो जाती है। एजेंट को चार से पांच हजार रुपये तक दिए जाते हैं। सरकारी अस्पतालों से लौटाए गए मरीज भी इन अस्पतालों में पहुंच जाते हैं।
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