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सीएमओ कार्यालय में पौने तीन करोड़ का घोटाला
ब्यूरो, अमर उजाला/ बिजनौर
Updated Fri, 24 Aug 2018 12:32 AM IST
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- फोटो : demo
बिजनौर। स्वास्थ्य विभाग में सेवानिवृत्त और मृतक कर्मचारियों के बढ़े हुए वेतन एरियर का करीब पौने तीन करोड़ हड़पने का मामला सामने आया है। लेखा विभाग से वेतन एरियर को दो बार आहरित किया गया है लेकिन सेवानिवृत्त और मृतक कर्मचारियों के परिजनों को कोई धनराशि नहीं दी गई है। इस मामले का खुलासा आरटीआई के तहत सूचना मांगने पर हुआ है। अब आला अफसर अपना पल्ला झाड़ने के लिए सीएचसी, पीएचसी पर मामले को टालकर लीपापोती करने में जुटे हैं। उधर, इस मामले में एडी मुरादाबाद ने सीएमओ से एक सप्ताह भीतर स्पष्टीकरण मांगा है।
आरटीआई कार्यकर्ता नरेंद्र कुमार राठी ने जनसूचना अधिकार अधिनियम के अंतर्गत मुख्य चिकित्साधिकारी से कुछ बिंदुओं पर सूचना मांगी थी। इनमें वर्ष 2011-12 और 2012-13 में सीएमओ द्वारा आहरित किए गए महिला/पुुरुष कर्मचारियों के एरियर बिल, कर्मचारी का नाम, आहरित की जाने वाली धनराशि एवं कितनी धनराशि का चेक प्राप्त किया गया तथा आहरित बिल की प्रमाणित छायाप्रति आदि सूचनाएं मांगी थी। आरोप है कि दो बार में सूचना मांगने पर भी उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बाद सूचना दी गई तो उसमे एरियर वितरण के करीब पौने तीन करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया। नरेंद्र के मुताबिक शासन ने वर्ष 1991 से कार्यरत कर्मचारियों को 2012 में बढ़े हुए वेतन एरियर का भुगतान करने का आदेश दिए थे। मगर, वर्ष 2011-12 एवं 2012-13 में दो बार सेवानिवृत्त एवं मृतम कर्मचारियों के एरियर को समुचित अधिकारी/मुख्य चिकित्साधिकारी के माध्यम से आहरित कर लिया गया, लेकिन भुगतान एक बार भी नहीं हुआ।
यह धनराशि करीब पौने तीन करोड़ रुपये है। सीएमओ स्तर से कोई कार्रवाई होती न देख वह मामले को कमिश्नर के यहां लेकर गए। कमिश्नर ने एडी को मामले की जांच शीघ्र ही जवाब देने के आदेश दिए हैं। एडी डा. सत्य सिंह ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आया है। इस बारे में सीएमओ बिजनौर को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है। उधर, सीएमओ राकेश कुमार मित्तल का कहना है कि यह मामला उनके संज्ञान मेें नहीं है। वह इस मामले को दिखवा रहे है। इसके बाद ही कुछ बता पाएंगे।
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आरटीआई कार्यकर्ता नरेंद्र कुमार राठी ने जनसूचना अधिकार अधिनियम के अंतर्गत मुख्य चिकित्साधिकारी से कुछ बिंदुओं पर सूचना मांगी थी। इनमें वर्ष 2011-12 और 2012-13 में सीएमओ द्वारा आहरित किए गए महिला/पुुरुष कर्मचारियों के एरियर बिल, कर्मचारी का नाम, आहरित की जाने वाली धनराशि एवं कितनी धनराशि का चेक प्राप्त किया गया तथा आहरित बिल की प्रमाणित छायाप्रति आदि सूचनाएं मांगी थी। आरोप है कि दो बार में सूचना मांगने पर भी उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बाद सूचना दी गई तो उसमे एरियर वितरण के करीब पौने तीन करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया। नरेंद्र के मुताबिक शासन ने वर्ष 1991 से कार्यरत कर्मचारियों को 2012 में बढ़े हुए वेतन एरियर का भुगतान करने का आदेश दिए थे। मगर, वर्ष 2011-12 एवं 2012-13 में दो बार सेवानिवृत्त एवं मृतम कर्मचारियों के एरियर को समुचित अधिकारी/मुख्य चिकित्साधिकारी के माध्यम से आहरित कर लिया गया, लेकिन भुगतान एक बार भी नहीं हुआ।
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यह धनराशि करीब पौने तीन करोड़ रुपये है। सीएमओ स्तर से कोई कार्रवाई होती न देख वह मामले को कमिश्नर के यहां लेकर गए। कमिश्नर ने एडी को मामले की जांच शीघ्र ही जवाब देने के आदेश दिए हैं। एडी डा. सत्य सिंह ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आया है। इस बारे में सीएमओ बिजनौर को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है। उधर, सीएमओ राकेश कुमार मित्तल का कहना है कि यह मामला उनके संज्ञान मेें नहीं है। वह इस मामले को दिखवा रहे है। इसके बाद ही कुछ बता पाएंगे।
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