फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bijnor News ›   22 years later, Dawood's kidnapped assailant of Gujarat ATS

22 साल बाद गुजरात एटीएस के हत्थे चढ़ा दाऊद का गुर्गा

Sun, 09 Jul 2017 12:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर Updated Sun, 09 Jul 2017 12:30 AM IST
विज्ञापन
22 years later, Dawood's kidnapped assailant of Gujarat ATS
आरोपी कदीर। - फोटो : अमर उजाला
बिजनौर के नजीबाबाद में गुजरात और यूपी एटीएस और नजीबाबाद पुलिस की टीम ने शनिवार सुबह कल्हेडी मार्ग से 22 साल बाद मुंबई बम धमाकों से जुड़े और गुजरात से टाडा में वांछित चल रहे कदीर अहमद (60) को गिरफ्तार किया है। पुलिस का दावा है कि गिरफ्तार कदीर आतंकवादी व राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में लिप्त रहा हैं और 1995 से गुजरात के जामनगर से टाडा सहित कई संगीन धाराओं में वांछित चल रहा था।
विज्ञापन


गिरफ्तार कदीर  गांव कुल्हेडी का रहने वाला है।  उसके गांव में होने की सटीक सूचना गुजरात एटीएस को मिली थी, जिसके बाद गुजरात आतंकवाद निरोधी दस्ते (एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाड) के इंस्पेक्टर एनके भट्ट, एनएल देसाई यूपी एटीएस और बिजनौर पुलिस के अधिकारियों से मिले। इनके साथ एटीएस यूपी के इंस्पेक्टर विश्वजीत,  नजीबाबाद  कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक सतीश कुमार और पुलिस के साथ गांव कुल्हेड़ी में दबिश देने भेजा गया।
विज्ञापन


एटीएस के मुताबिक कदीर राष्ट्रविरोधी, आतंकी व विस्फोटक क्रियाकलापों में संलिप्त रहा हैं और चार मई 1995 से टाडा का वांछित अपराधी था। जामनगर गुजरात में उस पर धारा 120बी, 121, 121सी, 9/बी विस्फोटक सामग्री अधिनियम और प्रिवेंशन ऑफ टाडा एक्ट की सेक्शन 3/4/5/6 के अंतर्गत राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल होने सहित कई गंभीर मामले दर्ज हैं।1993 में कदीर का नाम  दाऊद इब्राहीम  के दाहिना हाथ माने जाने वाले टाइगर मेमन के साथ भी जुड़ा था। गुजरात पुसिल ने अगस्त 2015 में कदीर की तलाश में नजीबाबाद में छापा मारा था, लेकिन उस समय  कदीर हत्थे नहीं चढ़ पाया था। गुजरात  पुलिस एक अन्य वांछित खाईखेड़ी निवासी इश्त्याक को गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई थी। इश्त्याक के बड़े भाई इफ्तखार को गुजरात पुलिस पहले गिरफ्तार कर चुकी है। इफ्तखार 1999 से जमानत पर है। कदीर के परिजनों का कहना है कि वर्ष 1988-1989 में कदीर मुंबई छोड़ चुका है। इस मामले में  कदीर का नाम कैसे आया, वह कुछ कह नहीं सकते। 
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed