{"_id":"5afdc9624f1c1be0408b61f3","slug":"201526581602-bijnor-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"शासन के निर्देश पर 1.5 करोड़ के भ्रष्टाचार की जांच शुरू","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
शासन के निर्देश पर 1.5 करोड़ के भ्रष्टाचार की जांच शुरू
Updated Thu, 17 May 2018 11:56 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शासन के निर्देश पर 1.5 करोड़ के भ्रष्टाचार की जांच शुरू, विद्यार्थियों से अवैध धन वसूली का भी है आरोप
नजीबाबाद। शासन के निर्देश पर डीआईओएस द्वारा गठित टीम ने नगर स्थित एक स्कूल के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप की जांच शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री और लोकायुक्त को भेजी शिकायत के बाद टीम ने विद्यालय पहुंचकर विद्यार्थियों से अवैध धन वसूली के संबंध में पूछताछ की।
विद्यार्थियों की ओर से मुख्यमंत्री और लोकायुक्त को नगर के प्रतिष्ठित विद्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार की जांच कराने की शिकायत भेजी गई है। शिकायत में हाल ही में सेवानिवृत्त हुए प्रधानाचार्य पर विद्यार्थियों सेेेे अवैध वसूली और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। शासन से जांच आने पर जिला विद्यालय निरीक्षक ने जीआईसी नजीबाबाद और जीआईसी भागूवाला के प्रधानाचार्य को 21 बिंदुओं से जुड़ी 1.5 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार की जांच सौंपी है।
जांच टीम ने विद्यालय पहुंचकर सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य द्वारा उनके कार्यकाल के दौरान विद्यार्थियों से की गई अवैध वसूली की जानकारी की। जांच टीम ने मुख्यमंत्री और लोकायुक्त को भेजी शिकायत में जिन 21 बिंदुओं पर जांच शुरू की है उनमें अनुपस्थित और विलंब से आने वाले विद्यार्थियों से 10 रुपये वसूलने, भरान और रंगाई-पुताई के नाम पर विद्यार्थियों से सौ-सौ रुपये वसूलने, प्रवेश के नाम पर 12 हजार रुपये तक वसूलने, कॉलेज में मोबाइल लाने वाले विद्यार्थियों से छीनने तथा मोबाइल लौटाने पर अवैध वसूली करने, कैंटीन आदि पर समोसा खाते पकड़ा जाने पर सौ रुपये वसूलने, हिंदी से अंग्रेजी माध्यम में प्रवेश देने पर प्रति विद्यार्थी पांच हजार रुपये वसूल करने सहित कई संगीन आरोप शामिल हैं। कुछ बिंदू विद्यालय के विकास के धन की गड़बड़ी और शिक्षण से संबंधित भी हैं।
विज्ञापन
जांच टीम ने जब विद्यार्थियों से अवैध वसूली की जानकारी की तो विद्यार्थियों ने खुलकर आरोपों पर मुहर लगाई। गौरतलब है कि हाल ही में सेवानिवृत्ति के बाद प्रबंध समिति ने प्रधानाचार्य को अंग्रेजी माध्यम स्कूल संचालन की जिम्मेदारी सौंपी थी। नगर के एक बुक सैलर से लेनदेन को लेकर हुए विवाद और हंगामे के बाद प्रबंध समिति ने सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य को अंग्रेजी माध्यम स्कूल की बतौर प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया था।
विज्ञापन
नजीबाबाद। शासन के निर्देश पर डीआईओएस द्वारा गठित टीम ने नगर स्थित एक स्कूल के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप की जांच शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री और लोकायुक्त को भेजी शिकायत के बाद टीम ने विद्यालय पहुंचकर विद्यार्थियों से अवैध धन वसूली के संबंध में पूछताछ की।
विद्यार्थियों की ओर से मुख्यमंत्री और लोकायुक्त को नगर के प्रतिष्ठित विद्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार की जांच कराने की शिकायत भेजी गई है। शिकायत में हाल ही में सेवानिवृत्त हुए प्रधानाचार्य पर विद्यार्थियों सेेेे अवैध वसूली और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। शासन से जांच आने पर जिला विद्यालय निरीक्षक ने जीआईसी नजीबाबाद और जीआईसी भागूवाला के प्रधानाचार्य को 21 बिंदुओं से जुड़ी 1.5 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार की जांच सौंपी है।
विज्ञापन
जांच टीम ने विद्यालय पहुंचकर सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य द्वारा उनके कार्यकाल के दौरान विद्यार्थियों से की गई अवैध वसूली की जानकारी की। जांच टीम ने मुख्यमंत्री और लोकायुक्त को भेजी शिकायत में जिन 21 बिंदुओं पर जांच शुरू की है उनमें अनुपस्थित और विलंब से आने वाले विद्यार्थियों से 10 रुपये वसूलने, भरान और रंगाई-पुताई के नाम पर विद्यार्थियों से सौ-सौ रुपये वसूलने, प्रवेश के नाम पर 12 हजार रुपये तक वसूलने, कॉलेज में मोबाइल लाने वाले विद्यार्थियों से छीनने तथा मोबाइल लौटाने पर अवैध वसूली करने, कैंटीन आदि पर समोसा खाते पकड़ा जाने पर सौ रुपये वसूलने, हिंदी से अंग्रेजी माध्यम में प्रवेश देने पर प्रति विद्यार्थी पांच हजार रुपये वसूल करने सहित कई संगीन आरोप शामिल हैं। कुछ बिंदू विद्यालय के विकास के धन की गड़बड़ी और शिक्षण से संबंधित भी हैं।
विज्ञापन
जांच टीम ने जब विद्यार्थियों से अवैध वसूली की जानकारी की तो विद्यार्थियों ने खुलकर आरोपों पर मुहर लगाई। गौरतलब है कि हाल ही में सेवानिवृत्ति के बाद प्रबंध समिति ने प्रधानाचार्य को अंग्रेजी माध्यम स्कूल संचालन की जिम्मेदारी सौंपी थी। नगर के एक बुक सैलर से लेनदेन को लेकर हुए विवाद और हंगामे के बाद प्रबंध समिति ने सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य को अंग्रेजी माध्यम स्कूल की बतौर प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया था।