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शिक्षामित्रों ने सदमे में मरे समायोजित शिक्षक के शव को मुरादाबाद मार्ग पर रखकर जाम लगाया
Updated Thu, 17 Aug 2017 12:52 AM IST
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स्योहारा। समायोजन रद्द होने के सदमे में समायोजित शिक्षक ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। घटना से आहत शिक्षामित्रों ने शव को धामपुर-मुरादाबाद मार्ग पर फब्बारा चौक पर रखकर घंटों जाम लगाया। मौके पर पहुंचे एसडीएम और सीओ के समझाने पर प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री को संबोधित मांगपत्र एसडीएम को सौंप जाम खोला।
गांव चकनपुरी निवासी संजीव कुमार ब्लाक अल्हैपुर धामपुर के गांव हकीमपुर मेघा में सहायक शिक्षक के पद पर सरकार की ओर से दो वर्ष पहले समायोजित हुए थे। उच्चतम न्यायालय के आदेश पर समायोजन रद्द होने से काफी आहत थे। प्रदेश सरकार के भरोसे के बाद भी कोई रास्ता न निकलने पर और दी गई मीयाद समाप्त होने के कारण काफी तनाव में थे। आहत होकर शिक्षक संजीव कुमार ने सोमवार को जहर खा लिया। हालत बिगड़ने पर परिवारीजनों ने उन्हेें निजी नर्सिंगहोम में भर्ती कराया, जहां से उन्हें मुरादाबाद रेफर कर दिया गया था। सोमवार रात उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। घर के लोग पोस्टमार्टम के बाद मंगलवार दोपहर जब उसका शव लेकर गांव जा रहे थे तो समायोजित शिक्षकों व शिक्षमित्रों ने शव को मुरादाबाद-धामपुर मार्ग पर फब्बारा चौक पर रखकर जाम लगा दिया और सरकार विरोधी नारे लगाए। दो घंटे लगे जाम के बाद एसडीएम वीके सिंह, सीओ सुशील कुमार मौके पर पहुंचे। शिक्षामित्रों के प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मृतक के आश्रितों को 50 लाख रुपये का मुआवजा, पत्नी को आश्रित अध्यापिका पद पर नियुक्ति और समायोजित शिक्षकों को सरकार द्वारा स्थायी करने के आदेश करने की मांग की। एसडीएम को मांगपत्र देकर शिक्षामित्रों ने जाम समाप्त किया। प्रदर्शनकारियों में जिलाध्यक्ष सुधीर चौहान, ओमपाल सिंह, अमित, चंद्रपाल सिंह, दिलावर सिंह, मीनाक्षी रानी, मनचल, प्रीती, आदेश, अर्चना आदि रहीं।
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गांव चकनपुरी निवासी संजीव कुमार ब्लाक अल्हैपुर धामपुर के गांव हकीमपुर मेघा में सहायक शिक्षक के पद पर सरकार की ओर से दो वर्ष पहले समायोजित हुए थे। उच्चतम न्यायालय के आदेश पर समायोजन रद्द होने से काफी आहत थे। प्रदेश सरकार के भरोसे के बाद भी कोई रास्ता न निकलने पर और दी गई मीयाद समाप्त होने के कारण काफी तनाव में थे। आहत होकर शिक्षक संजीव कुमार ने सोमवार को जहर खा लिया। हालत बिगड़ने पर परिवारीजनों ने उन्हेें निजी नर्सिंगहोम में भर्ती कराया, जहां से उन्हें मुरादाबाद रेफर कर दिया गया था। सोमवार रात उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। घर के लोग पोस्टमार्टम के बाद मंगलवार दोपहर जब उसका शव लेकर गांव जा रहे थे तो समायोजित शिक्षकों व शिक्षमित्रों ने शव को मुरादाबाद-धामपुर मार्ग पर फब्बारा चौक पर रखकर जाम लगा दिया और सरकार विरोधी नारे लगाए। दो घंटे लगे जाम के बाद एसडीएम वीके सिंह, सीओ सुशील कुमार मौके पर पहुंचे। शिक्षामित्रों के प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मृतक के आश्रितों को 50 लाख रुपये का मुआवजा, पत्नी को आश्रित अध्यापिका पद पर नियुक्ति और समायोजित शिक्षकों को सरकार द्वारा स्थायी करने के आदेश करने की मांग की। एसडीएम को मांगपत्र देकर शिक्षामित्रों ने जाम समाप्त किया। प्रदर्शनकारियों में जिलाध्यक्ष सुधीर चौहान, ओमपाल सिंह, अमित, चंद्रपाल सिंह, दिलावर सिंह, मीनाक्षी रानी, मनचल, प्रीती, आदेश, अर्चना आदि रहीं।
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