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किसान की पहल के सब कायल
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Fri, 17 Feb 2017 11:55 PM IST
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अफजलगढ़ में जैविक खाद से पैदा गन्ने को देखते डीसीओ व अन्य।
- फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर में जमीन को बंजर से बचाने के लिए जिले के एक किसान ने रसायनिक खादों का इस्तेमाल किए बिना करीब चार सौ बीघा गन्ना बोया है। गांव में अन्य किसानों को भी जागरूक करने के लिए बैठक को खेती के बारे में डीसीओ ने गन्ना विशेषज्ञों की टीम के साथ खेतों पर जाकर गन्ने को देखा है।
डीसीओ ओपी सिंह के अनुसार रसायनिक खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल से जमीन बंजर हो रही है। पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है। अफजलगढ़ के किसान वरुण अग्रवाल ने गन्ने में रसायनिक खादों का इस्तेमाल नहीं करने का निर्णय लिया है। किसान ने करीब चार सौ बीघे गन्ने में कोई रसायनिक खाद नहीं डाला। गोबर, हरी व जैविक खाद का इस्तेमाल किया है। किसान का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण तथा लोगों को बीमारियों से बचाने के लिए उसने यह मुहिम शुरू की है। निरीक्षण में पाया गया कि किसान के खेत का गन्ना मोटा है। एक मेंढे में आठ से लेकर 18 तक पौधे हैं। किसानों से फसल में जैविक, गोबर व हरी घास का प्रयोग करने की अपील की गई है। डीसीओ के अनुसार अगले तीन साल में इसके शत प्रतिशत रिजल्ट सामने आएंगे।
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डीसीओ ओपी सिंह के अनुसार रसायनिक खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल से जमीन बंजर हो रही है। पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है। अफजलगढ़ के किसान वरुण अग्रवाल ने गन्ने में रसायनिक खादों का इस्तेमाल नहीं करने का निर्णय लिया है। किसान ने करीब चार सौ बीघे गन्ने में कोई रसायनिक खाद नहीं डाला। गोबर, हरी व जैविक खाद का इस्तेमाल किया है। किसान का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण तथा लोगों को बीमारियों से बचाने के लिए उसने यह मुहिम शुरू की है। निरीक्षण में पाया गया कि किसान के खेत का गन्ना मोटा है। एक मेंढे में आठ से लेकर 18 तक पौधे हैं। किसानों से फसल में जैविक, गोबर व हरी घास का प्रयोग करने की अपील की गई है। डीसीओ के अनुसार अगले तीन साल में इसके शत प्रतिशत रिजल्ट सामने आएंगे।
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