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पहले से आपस में टकराती रही है पुलिस व वकील

Thu, 24 Oct 2019 12:24 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 24 Oct 2019 12:24 AM IST
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Controversy in police lawyers
वकीलों पर रिपोर्ट दर्ज होते ही गर्माया मामला
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बिजनौर। न्यूटन के गति का नियम है कि एक क्रिया की प्रतिक्रिया जरूर होती है। ऐसा ही कुछ बिजनौर के वकीलों और पुलिस के बीच हो रहा है। पहले पुलिस ने हेलमेट न होने पर वकील की स्कूटी का चालान किया, तो उसकी प्रतिक्रिया में वकीलों ने पुलिस वालों की बाइकों की हवा निकाल दी और चाबियां कब्जे में ले लीं। इस पर फिर से प्रतिक्रिया हुई, तो पुलिस ने 35 वकीलों के खिलाफ लूट, मारपीट और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कर दी। बेशक रिपोर्ट में वकीलों को नामजद नहीं किया गया है, लेकिन रिपोर्ट दर्ज होने के बाद विवाद गरमाने के आसार लग रहे हैं। क्योंकि रिपोर्ट दर्ज होने पर अधिवक्ताओं में खलबली है।
दरअसल, अधिवक्ता शिवम शर्मा को सोमवार शाम पुलिस ने चेकिंग के दौरान रोक लिया था और स्कूटी चलाने के दौरान हेलमेट का प्रयोग नहीं करने पर चालान काट दिया था। अधिवक्ता शिवम शर्मा ने पुलिस कर्मियों से कहा था कि नगर क्षेत्र में हेलमेट का प्रयोग करने का नियम नहीं है, जिस पर पुलिस कर्मियों ने ऐसा नियम होने से इंकार कर दिया था और चालान काट दिया था। इसी की प्रतिक्रिया के चलते मंगलवार को अधिवक्ताओं ने जजी परिसर में इकट्ठा होकर पुलिस वालों के वाहन ही रोकने शुरू कर दिए थे। कई पुलिसकर्मियों की बाइकों की हवा निकाल दी थी और चाबियां कब्जे में ले ली थीं।
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इसको लेकर जजी परिसर में काफी हंगामा हुआ था। बाद में जिला बार अध्यक्ष एसके बबली और कोतवाल के बीच वार्ता होने पर पुलिसकर्मियों की बाइकों की चाबियां लौटाई गई थीं। तब माना गया था कि विवाद निपट गया, लेकिन 24 घंटे के भीतर ही इसकी एक और प्रतिक्रिया सामने आ गई। पुलिस की तरफ से 35 वकीलों के खिलाफ लूट, मारपीट और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कर दी गई है। इससे मामला तूल पकड़ सकता है। क्योंकि मामला पुलिस की तरफ से दर्ज किया गया है, जिसमें आरोपियों की पहचान होने पर पुलिस कार्रवाई भी करेगी। रिपोर्ट दर्ज होने की जानकारी मिलने पर वकीलों में गुस्सा है, जिससे पुलिस व वकीलों के बीच टकराव की नौबत आ सकती है।
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पहले भी आमने सामने आते रहे हैं पुलिस और वकील
बिजनौर। वकीलों और पुलिस के बीच टकराव के मामले पहले भी सामने आए हैं। यह बात अलग है कि विवाद गरमाने के बाद मामलों में समझौते होते रहे। सात साल पूर्व हिरासत में लिए एक वकील को छुड़ाने के लिए वकीलों ने शहर कोतवाली में हल्ला बोल दिया था। कोतवाली में खूब तोड़फोड़ की थी। अफसरों के आने पर पुलिस को हिरासत में लिए वकील को छोड़ना पड़ा था। थाने में तोड़फोड़ पर गुस्साई पुलिस ने शहर कोतवाली के सामने अधिवक्ता संजीव अग्रवाल को घेरकर लाठियां बरसाई थी। इस घटना को लेकर वकील आंदोलन करने पर उतर आए थे। आला अफसरों द्वारा जांच कराने पर बाद में यह मामला आपस में वार्ता से निपट गया था। कुछ साल पहले जजी के बाहर जाम लगाने के दौरान वकील एक सीओ से भिड़ गए थे। तब भी वकीलों व पुलिस में विवाद गहरा गया था। पुलिस व वकील आमने सामने आ गए थे। इसके बाद आपस में बैठकर मामले को सुलझा लिया गया था।

नामजद नहीं है रिपोर्ट - एसके बबली
जिला बार के अध्यक्ष एसके बबली का कहना है कि पुलिस की तरफ से दर्ज कराई रिपोर्ट में अज्ञात वकीलों को आरोपी बनाया गया है। यदि पुलिस किसी वकील के खिलाफ कार्रवाई करती है, तो देखा जाएगा। इस मामले में पुलिस अधिकारियों से बात की है, ऐसा लग नहीं रहा कि पुलिस के साथ टकराव की नौबत आएगी।
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