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उपभोक्ता दिवस : सपना दिखाकर ठगे जा रहे उपभोक्ता
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उपभोक्ता दिवस : सपना दिखाकर ठगे जा रहे उपभोक्ता
बिजनौर। बीमा करते हुए लोगों को बड़े बड़े सपने दिखा दिए जाते हैं, लेकिन क्लेम के वक्त स्थितियां बदल जाती हैं। जिस पर उपभोक्ता ठगा हुआ महसूस करता है। जी हां, उपभोक्ता आयोग में चल रहे मुकदमे इसे तस्दीक करने के लिए काफी हैं। दरअसल, पचास प्रतिशत केस में लोग बीमा कंपनियों के खिलाफ फोरम में पहुंचे हैं।
उपभोक्ता आयोग में फिलहाल 644 केस विचाराधीन हैं। इनमें 302 केस बीमा कंपनियों से संबंधित हैं। जिनमें अलग-अलग परेशानियों को लेकर लोग फोरम में पहुंचे हैं। पांच से छह प्रतिशत मामले डाक्टरों के खिलाफ भी पहुंच रहे हैं। जिनमें इलाज में लापरवाही बरतने या अन्य समस्याओं की शिकायत होती है। करीब 25 प्रतिशत केस बिजली विभाग से संबंधित हैं। जिनमें उपभोक्ताओं ने मीटर, बिजली बिल और अन्य समस्याओं को लेकर फोरम में गुहार लगाई हैं। एक केस पाइप कंपनी के खिलाफ भी हुआ है। जिसमें उपभोक्ता ने दावा किया है कि उसने फ्लैट में पाइप फिटिंग कराई थी। सभी पाइप बेकार निकल गए और पानी लीक होने लगा है। जिससे पचास लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
नई की जगह दे दी पुरानी कार
शहर के एक शोरूम से एक व्यक्ति ने कार खरीदी थी। अब उपभोक्ता फोरम में दावा करते हुए कार स्वामी ने कहा कि उसे नई जगह पुरानी कार ही पेंट करके दे दी गई। वहीं कुछ मोबाइल कंपनियों के खिलाफ भी केस दर्ज हुए हैं। इस साल बीस नवंबर को उपभोक्ता आयोग में अध्यक्ष दीपा जैन की नियुक्ति हुई है। इससे पहले अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं होने के कारण अगस्त 2020 से केस में सुनवाई नहीं हो पा रही थी। अब दीपा जैन ने त्वरित गति से सुनवाई करते हुए एक महीने में 89 केस निस्तारित कर दिए हैं। फिलहाल 644 केस विचाराधीन हैं। हालांकि दो महीने में 81 केस दर्ज हुए हैं।
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बिजनौर। बीमा करते हुए लोगों को बड़े बड़े सपने दिखा दिए जाते हैं, लेकिन क्लेम के वक्त स्थितियां बदल जाती हैं। जिस पर उपभोक्ता ठगा हुआ महसूस करता है। जी हां, उपभोक्ता आयोग में चल रहे मुकदमे इसे तस्दीक करने के लिए काफी हैं। दरअसल, पचास प्रतिशत केस में लोग बीमा कंपनियों के खिलाफ फोरम में पहुंचे हैं।
उपभोक्ता आयोग में फिलहाल 644 केस विचाराधीन हैं। इनमें 302 केस बीमा कंपनियों से संबंधित हैं। जिनमें अलग-अलग परेशानियों को लेकर लोग फोरम में पहुंचे हैं। पांच से छह प्रतिशत मामले डाक्टरों के खिलाफ भी पहुंच रहे हैं। जिनमें इलाज में लापरवाही बरतने या अन्य समस्याओं की शिकायत होती है। करीब 25 प्रतिशत केस बिजली विभाग से संबंधित हैं। जिनमें उपभोक्ताओं ने मीटर, बिजली बिल और अन्य समस्याओं को लेकर फोरम में गुहार लगाई हैं। एक केस पाइप कंपनी के खिलाफ भी हुआ है। जिसमें उपभोक्ता ने दावा किया है कि उसने फ्लैट में पाइप फिटिंग कराई थी। सभी पाइप बेकार निकल गए और पानी लीक होने लगा है। जिससे पचास लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
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नई की जगह दे दी पुरानी कार
शहर के एक शोरूम से एक व्यक्ति ने कार खरीदी थी। अब उपभोक्ता फोरम में दावा करते हुए कार स्वामी ने कहा कि उसे नई जगह पुरानी कार ही पेंट करके दे दी गई। वहीं कुछ मोबाइल कंपनियों के खिलाफ भी केस दर्ज हुए हैं। इस साल बीस नवंबर को उपभोक्ता आयोग में अध्यक्ष दीपा जैन की नियुक्ति हुई है। इससे पहले अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं होने के कारण अगस्त 2020 से केस में सुनवाई नहीं हो पा रही थी। अब दीपा जैन ने त्वरित गति से सुनवाई करते हुए एक महीने में 89 केस निस्तारित कर दिए हैं। फिलहाल 644 केस विचाराधीन हैं। हालांकि दो महीने में 81 केस दर्ज हुए हैं।
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