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दशकों तक निर्माण, करोड़ों खर्च, फिर भी नहीं बनी नहर
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दशकों तक निर्माण, करोड़ों खर्च, फिर भी नहीं बनी नहर
जलीलपुर/चांदपुर। करीब 14 साल बाद भी मध्य गंगा नहर फेज-2 का निर्माण अधूरा है। आधी-अधूरी तैयारी के बीच नहर में ट्रायल के लिए पानी छोड़ दिया गया। पानी की पहली धार से ही नहर की पक्की पटरी पानी में बह गई। कुछ स्थानों पर अभी पक्की पटरी बनी ही नही है। गांव वीरमपुर में निर्माण अधूरा होने के कारण नहर, नाला जैसी दिख रही है।
2007-08 में बिजनौर बैराज से मध्य गंगा नहर फेज-2 का निर्माण शुरू हुआ। कभी बजट, कभी जमीन न मिलने से नहर का निर्माण कार्य रुकता रहा। शुरूआत में नहर निर्माण की कुल लागत करीब 1060 करोड़ अनुमानित थी। जो बढ़कर 4417 करोड़ हो गई है। अधिकारियों के मुताबिक अब तक 3400 करोड़ रुपये इसके निर्माण पर खर्च हो चुके हैं। इसके बाद भी जिले के ब्लॉक जलीलपुर क्षेत्र में कुछ स्थानों पर नहर निर्माण अधूरा है। अधूरी तैयार के बीच नहर में छोड़ा गया पानी जलीलपुर क्षेत्र से आगे पहुंच सका। पानी छोड़े जाने से पहले नहर की सफाई भी नहीं की गई।
गांव मनौटा के निकट नहर झाड़ी व घास से भरी पड़ी है। यहां नहर में पानी नजर नहीं आ रहा है, बल्कि नहर में वन जैसा जंगल दिख रहा है। बहसूमा, काशीपुर राज्यमार्ग पर गांव वीरमपुर में बने नहर के पुल के निकट निर्माण अधूरा है, यहां नहर की चौड़ाई बहुत ही कम है। नहर देखने में नाला जैसी नजर आ रही है। गांव गंधौर के निकट माहूं वाली सड़क पर बने पुल के निकट नहर की पक्की पटरी नहीं बनी है। जलीलपुर के गांव वीरमपुर में नहर में छोड़े गए पहले पानी ने ही सीमेंट की टाइल्स से बनी पटरी टूट गई। लगातार पटरी का कटान हो रहा है। सीमेंट की टाइल्स गिरकर पानी में बह रही हैं।
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हरगुलाल के मकान के पास हो रहा कटान
जब से नहर में पानी छोड़े जाने की सूचना आई थी तभी से किसान हरगुलाल कश्यप परेशान हैं। उन्होंने बताया कि उसके व सिंचाई विभाग के बीच जमीन के मूल्य आदि को लेकर विवाद चल रहा है। जहां हरगुलाल कश्यप का मकान व घेर आदि बना है, यह जमीन नहर की सीमा में है। किसान को डर है कि नहर का पानी कटान कर उनके मकान को गिरा देगा। जिसके चलते किसान की नींद उड़ी है। यहां नहर निर्माण अधूरा है, जिसके चलते पानी किसान के मकान की तरफ कटान कर रहा है।
किसान ने सिंचाई विभाग को जमीन का बैनामा नहीं किया है। जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई चल रही है। इस स्थान पर जमीन कम होने के कारण नहर की चौड़ाई कम है। किसान से लगातार वार्ता की जा रही है। शीघ्र ही कोई रास्ता निकालकर मामला सुलझाया जाएगा
- हिमांशु कुमार, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग
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जलीलपुर/चांदपुर। करीब 14 साल बाद भी मध्य गंगा नहर फेज-2 का निर्माण अधूरा है। आधी-अधूरी तैयारी के बीच नहर में ट्रायल के लिए पानी छोड़ दिया गया। पानी की पहली धार से ही नहर की पक्की पटरी पानी में बह गई। कुछ स्थानों पर अभी पक्की पटरी बनी ही नही है। गांव वीरमपुर में निर्माण अधूरा होने के कारण नहर, नाला जैसी दिख रही है।
2007-08 में बिजनौर बैराज से मध्य गंगा नहर फेज-2 का निर्माण शुरू हुआ। कभी बजट, कभी जमीन न मिलने से नहर का निर्माण कार्य रुकता रहा। शुरूआत में नहर निर्माण की कुल लागत करीब 1060 करोड़ अनुमानित थी। जो बढ़कर 4417 करोड़ हो गई है। अधिकारियों के मुताबिक अब तक 3400 करोड़ रुपये इसके निर्माण पर खर्च हो चुके हैं। इसके बाद भी जिले के ब्लॉक जलीलपुर क्षेत्र में कुछ स्थानों पर नहर निर्माण अधूरा है। अधूरी तैयार के बीच नहर में छोड़ा गया पानी जलीलपुर क्षेत्र से आगे पहुंच सका। पानी छोड़े जाने से पहले नहर की सफाई भी नहीं की गई।
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गांव मनौटा के निकट नहर झाड़ी व घास से भरी पड़ी है। यहां नहर में पानी नजर नहीं आ रहा है, बल्कि नहर में वन जैसा जंगल दिख रहा है। बहसूमा, काशीपुर राज्यमार्ग पर गांव वीरमपुर में बने नहर के पुल के निकट निर्माण अधूरा है, यहां नहर की चौड़ाई बहुत ही कम है। नहर देखने में नाला जैसी नजर आ रही है। गांव गंधौर के निकट माहूं वाली सड़क पर बने पुल के निकट नहर की पक्की पटरी नहीं बनी है। जलीलपुर के गांव वीरमपुर में नहर में छोड़े गए पहले पानी ने ही सीमेंट की टाइल्स से बनी पटरी टूट गई। लगातार पटरी का कटान हो रहा है। सीमेंट की टाइल्स गिरकर पानी में बह रही हैं।
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हरगुलाल के मकान के पास हो रहा कटान
जब से नहर में पानी छोड़े जाने की सूचना आई थी तभी से किसान हरगुलाल कश्यप परेशान हैं। उन्होंने बताया कि उसके व सिंचाई विभाग के बीच जमीन के मूल्य आदि को लेकर विवाद चल रहा है। जहां हरगुलाल कश्यप का मकान व घेर आदि बना है, यह जमीन नहर की सीमा में है। किसान को डर है कि नहर का पानी कटान कर उनके मकान को गिरा देगा। जिसके चलते किसान की नींद उड़ी है। यहां नहर निर्माण अधूरा है, जिसके चलते पानी किसान के मकान की तरफ कटान कर रहा है।
किसान ने सिंचाई विभाग को जमीन का बैनामा नहीं किया है। जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई चल रही है। इस स्थान पर जमीन कम होने के कारण नहर की चौड़ाई कम है। किसान से लगातार वार्ता की जा रही है। शीघ्र ही कोई रास्ता निकालकर मामला सुलझाया जाएगा
- हिमांशु कुमार, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग