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Bijnor News: कालागढ़ के आवासों के जीर्णोद्धार पर संकट के बादल

Thu, 22 Jan 2026 12:53 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 22 Jan 2026 12:53 AM IST
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Clouds of crisis loom over the renovation of Kalagarh's residences
कालागढ़। रामगंगा बांध परियोजना के आवासीय परिसर में कर्मचारी आवासों की जीर्णोद्धार पर संकट के बादल छा रहे हैं। वन विभाग ने जीर्ण-शीर्ण हो चुके आवासों के जीर्णोद्धार पर रोक लगा दी है। आवासों में रह रहे कर्मचारी परिवार असुरक्षित हैं।
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कालागढ़ की रामगंगा बांध परियोजना का निर्माण 60-70 के दशक में हुआ था। लगभग 65-70 वर्ष में राजकीय आवास जीर्ण शीर्ण हालत में हैं। पेयजल आपूर्ति की लाइन भी फट जाती हैं। वर्षाकाल में आवासों में पानी दूषित होने की आशंका बनी रहती है। परियोजना की लाइनों से जल आपूर्ति सिंचाई, वन विभाग के आवासों, बाजार, स्कूलों आदि में दी जा रही है। परियोजना कर्मियों शंकर लाल, प्रीतम आर्य, अरविंद, अरुण कुमार, राहुल आदि का कहना है कि बड़ी मुश्किल से विभाग आवासों का जीर्णोद्धार कराने को तैयार हुआ है। ऐसे में वन विभाग ने काम रोक दिया है। आए दिन मकानों की छत का मलबा गिरता रहता है। उनके परिवार असुरक्षित हैं।
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कार्बेट टाइगर रिजर्व के अधिकारियों को लिखा गया

शिविर प्रबंध खंड के ईई ब्रिजेश कुमार का कहना है कि कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक, उप प्रभागीय वनाधिकारी को इस संबंध में लिखा गया है कि राजकीय कॉलोनी में आवासों का जीर्णोद्वार सर्वोच्च न्यायालय की सीईसी (सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी) की संस्तुति के आदेशों के अनुरूप ही किया जा रहा है। सभी कार्य रामनगर मोटर मार्ग के दक्षिणी क्षेत्र में हो रहे हैं। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के आदेशों पर ध्वस्तीकरण के बाद पेयजल आपूर्ति की लाइनों, विभागीय कार्यालयों को पुन: स्थापित, पुराने प्रशिक्षण केंद्र, मुख्य भवन की मरम्मत व नवीनीकरण का कार्य किया जा रहा है। कहीं कोई नया निर्माण नहीं किया जा रहा है, जिसे कराने में वन विभाग का जनहित में सहयोग मांगा गया है।
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क्या है मामला

कार्बेट टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने कर्मचारी आवासों को नया निर्माण कहकर रोक लगा दी है। रामगंगा बांध परियोजना की निष्प्रयोज्य भूमि को सिंचाई विभाग, वन विभाग को अदालत के आदेश पर वापस भी कर रहा है। रामनगर मोटर मार्ग के दक्षिणी क्षेत्र ए, बी, ई व एस श्रेणी के अवासों में परियोजना के अधिकारी व कर्मी रहते हैं। इन आवासों के जीर्णोद्धार का काम चल रहा है। उत्तरी क्षेत्र में हजारों आवासों/भवनों का ध्वस्तीकरण कर भूमि को वन विभाग को सौंप चुके हैं।
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