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आम के पेड़ सुखाने के लिए डाल रहे रसायन
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बिजनौर। शहर में आम के बाग का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। एनजीटी का दरवाजा खटखटाने वाले विदित कुमार ने एसडीएम सदर विक्रमादित्य सिंह को दी शिकायत में कहा है कि बाग के 300 पेड़ों को रसायन डालकर सुखाने की साजिश चल रही है ताकि एक बड़े हिस्से पर भी प्लाटिंग की जा सके। उन्होंने बाग के एक हिस्से में प्लॉटिंग और भूउपयोग बदल दिए जाने की जांच की मांग भी उठाई। आम के बाग को लेकर एनजीटी भी सख्त रवैया अपना चुका है और अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
बिजनौर के मोहल्ला जाटान के रहने वाले विदित कुमार ने एसडीएम सदर को शिकायती पत्र दिया, जिसमें कहा गया कि बिजनौर शहर की सीमा में आम का बाग समाज को स्वस्थ वातावरण और फल दे रहा है। आरोप है कि हरे भरे आम के बाग को समाप्त कर प्लॉटिंग की जा रही है। कुछ दिन पहले भी रातोंरात हरे पेड़ काट दिए गए थे और बाग की जमीन के एक हिस्से में दीवार बनवा दी गई। एसबीआई के सामने भी प्लाटिंग की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब आम के 300 पेड़ सुखाने के लिए केमिकल डाला जा रहा है, जिससे बाग को समाप्त कर जमीन पर प्लॉटिंग की जा सके। उन्होंने प्लॉटिंग के लिए नियम विरुद्ध भूमि की प्रकृति बदलने का भी आरोप लगाया।
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काटा जा चुका है 100 बीघा से ज्यादा बाग
शहर में करीब एक हजार बीघा से ज्यादा जमीन पर आम का बाग है, जिसमें चार हजार से अधिक आम के पेड़ हैं। शहर के बीचोंबीच होने की वजह से यह जमीन बेशकीमती है। ऐसे में प्लॉटिंग करने के लिए सौ बीघा से ज्यादा जमीन में लगे पेड़ों को काटा जा चुका है।
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आम के पेड़ों में रसायन डालने की जांच तो फॉरेस्ट विभाग और उद्यान विभाग कर पाएगा। शिकायत में जो धारा 143 की बात कही गई है, उसकी जांच कराई जाएगी। यदि वह गलत तरीके से होना पाया गया तो कार्रवाई की जाएगी।
विक्रमादित्य सिंह मलिक, एसडीएम सदर/ज्वाइंट मजिस्ट्रेट
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मैं आम के बाग को बचाने के लिए लंबी लड़ाई लड़ रहा हूं। मुझे धमकियां भी मिलती है, लेकिन लड़ाई जारी रहेगी। मैने एसडीएम सदर कार्यालय में बाग के पेड़ों को सुखाने की साजिश रचने और गलत तरह से धारा 143 होने की शिकायत की है।
विदित कुमार, शिकायतकर्ता
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बिजनौर के मोहल्ला जाटान के रहने वाले विदित कुमार ने एसडीएम सदर को शिकायती पत्र दिया, जिसमें कहा गया कि बिजनौर शहर की सीमा में आम का बाग समाज को स्वस्थ वातावरण और फल दे रहा है। आरोप है कि हरे भरे आम के बाग को समाप्त कर प्लॉटिंग की जा रही है। कुछ दिन पहले भी रातोंरात हरे पेड़ काट दिए गए थे और बाग की जमीन के एक हिस्से में दीवार बनवा दी गई। एसबीआई के सामने भी प्लाटिंग की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब आम के 300 पेड़ सुखाने के लिए केमिकल डाला जा रहा है, जिससे बाग को समाप्त कर जमीन पर प्लॉटिंग की जा सके। उन्होंने प्लॉटिंग के लिए नियम विरुद्ध भूमि की प्रकृति बदलने का भी आरोप लगाया।
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काटा जा चुका है 100 बीघा से ज्यादा बाग
शहर में करीब एक हजार बीघा से ज्यादा जमीन पर आम का बाग है, जिसमें चार हजार से अधिक आम के पेड़ हैं। शहर के बीचोंबीच होने की वजह से यह जमीन बेशकीमती है। ऐसे में प्लॉटिंग करने के लिए सौ बीघा से ज्यादा जमीन में लगे पेड़ों को काटा जा चुका है।
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आम के पेड़ों में रसायन डालने की जांच तो फॉरेस्ट विभाग और उद्यान विभाग कर पाएगा। शिकायत में जो धारा 143 की बात कही गई है, उसकी जांच कराई जाएगी। यदि वह गलत तरीके से होना पाया गया तो कार्रवाई की जाएगी।
विक्रमादित्य सिंह मलिक, एसडीएम सदर/ज्वाइंट मजिस्ट्रेट
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मैं आम के बाग को बचाने के लिए लंबी लड़ाई लड़ रहा हूं। मुझे धमकियां भी मिलती है, लेकिन लड़ाई जारी रहेगी। मैने एसडीएम सदर कार्यालय में बाग के पेड़ों को सुखाने की साजिश रचने और गलत तरह से धारा 143 होने की शिकायत की है।
विदित कुमार, शिकायतकर्ता