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सुखरो नदी में उफान से हाइवे क्षतिग्रस्त
अमर उजाला/बिजनौर
Updated Mon, 06 Aug 2018 12:15 AM IST
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नजीबाबाद-कोटद्वार मार्ग पर सुखरो पुल के निकट हुआ भारी कटान।
- फोटो : अमर उजाला
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नजीबाबाद में राष्ट्रीय राजमार्ग पर नजीबाबाद-कोटद्वार के बीच सुखरो नदी के उफान से पुल और राष्ट्रीय राजमार्ग को खतरा पैदा हो गया है। काफी समय से हाइवे के बने पुल के पास लगातार भूमि कटान जारी है।
पर्वतीय क्षेत्रों में हो रही वर्षा से सुखरो नदी उफान पर है। सुखरो नदी ने नजीबाबाद-कोटद्वार मार्ग पर पुल के आसपास भारी कटान किया है। जिससे सड़क मार्ग और पुल खतरे में है। नजीबाबाद-कोटद्वार मार्ग पर 22 जुलाई 2016 को सुखरो नदी में आए उफान में रेलवे का पुल बह गया था। इस दौरान एनएच पर सुखरो नदी पर बने हाइवे पुल का कुछ हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हुआ था। सुखरो के उफान से सड़क पुल की एप्रोच को भारी नुकसान पहुंचा था तथा हाइवे भी कई स्थान पर धंस गया था। सुरक्षा के लिए एनएच के अधिकारियों ने सड़क की सुरक्षा के लिए उसके किनारे रेत व मिट्टी से भरे कट्टे लगाए थे। लेकिन उसके बाद एनएच के अधिकारियों ने पुल के पास सड़क पर सुरक्षा दीवार बनाने की जहमत नहीं उठाई।
कई दिनों से पर्वतीय क्षेत्रों में हो रही मूसलाधार बारिश से सुखरो नदी उफान पर है। रविवार को नदी में आए उफान में पुल के पास सड़क सुरक्षा के लिए लगाए गए कट्टे बह गए। जिससे एनएच पर पुल और उसके आसपास हाइवे पर खतरा मंडरा रहा है। एनएच सुखरो के उफान से क्षतिग्रस्त होकर बह गया तो कोटद्वार समेत पूरे पर्वतीय क्षेत्र का समीपवर्ती राज्य उत्तर प्रदेश समेत उत्तराखंड की राजधानी देहरादून और हरिद्वार से संपर्क टूट जाएगा। वर्तमान में एनएच पर सुरक्षा के लिए किसी प्रकार के उपाय नहीं किए गए हैं। जिससे भारी वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बना हुआ है, खतरे से अनजान लोग मार्ग पर आवाजाही कर रहे हैं।
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एनएच के प्रोजेक्ट मैनेजर डीके चतुर्वेदी ने कहा कि विभागीय कर्मियों को एनएच की सुरक्षा के लिए रेत के कट्टे भरकर लगाने के निर्देश दिए गए हैं। रिजर्व फॉरेस्ट लैंड होने के कारण काम कराने में दिक्कत आ रही है। रिटेनिंग वाल के निर्माण का कार्य बरसात रूकने के बाद शुरू करवाया जाएगा।
उधर, अफजलगढ में बरसात शुरू होने के साथ ही नदी और नाले उफान भरने लगे हैं। कालागढ़ से दिल्ली को जोड़ने वाले मार्ग पर सूखा स्त्रोत के पुल की रैंप पानी के तेज बहाव से टूटने के कगार पर है। प्रशासन की अनदेखी कभी भी कालागढ़ की जनता के लिए परेशानी का सबब बन सकती है। जेई का कहना है कि मामला संज्ञान में है। अधिकारियों को फोटोग्राफी कर अवगत करा दिया गया है। जल्द ही पुल के तटबंधों की मरम्मत का काम शुरू होगा। वहीं, नगीना क्षेत्र में एसडीएम गजेंद्र सिंह ने बताया कि गांव चमरावाला में कृषि भूमि कटान की पूर्ण सुरक्षा करा दी गई है। क्षेत्र के सभी लेखपालों को बराबर चौकसी बरतने के निर्देश दिए हैं।
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पर्वतीय क्षेत्रों में हो रही वर्षा से सुखरो नदी उफान पर है। सुखरो नदी ने नजीबाबाद-कोटद्वार मार्ग पर पुल के आसपास भारी कटान किया है। जिससे सड़क मार्ग और पुल खतरे में है। नजीबाबाद-कोटद्वार मार्ग पर 22 जुलाई 2016 को सुखरो नदी में आए उफान में रेलवे का पुल बह गया था। इस दौरान एनएच पर सुखरो नदी पर बने हाइवे पुल का कुछ हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हुआ था। सुखरो के उफान से सड़क पुल की एप्रोच को भारी नुकसान पहुंचा था तथा हाइवे भी कई स्थान पर धंस गया था। सुरक्षा के लिए एनएच के अधिकारियों ने सड़क की सुरक्षा के लिए उसके किनारे रेत व मिट्टी से भरे कट्टे लगाए थे। लेकिन उसके बाद एनएच के अधिकारियों ने पुल के पास सड़क पर सुरक्षा दीवार बनाने की जहमत नहीं उठाई।
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कई दिनों से पर्वतीय क्षेत्रों में हो रही मूसलाधार बारिश से सुखरो नदी उफान पर है। रविवार को नदी में आए उफान में पुल के पास सड़क सुरक्षा के लिए लगाए गए कट्टे बह गए। जिससे एनएच पर पुल और उसके आसपास हाइवे पर खतरा मंडरा रहा है। एनएच सुखरो के उफान से क्षतिग्रस्त होकर बह गया तो कोटद्वार समेत पूरे पर्वतीय क्षेत्र का समीपवर्ती राज्य उत्तर प्रदेश समेत उत्तराखंड की राजधानी देहरादून और हरिद्वार से संपर्क टूट जाएगा। वर्तमान में एनएच पर सुरक्षा के लिए किसी प्रकार के उपाय नहीं किए गए हैं। जिससे भारी वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बना हुआ है, खतरे से अनजान लोग मार्ग पर आवाजाही कर रहे हैं।
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एनएच के प्रोजेक्ट मैनेजर डीके चतुर्वेदी ने कहा कि विभागीय कर्मियों को एनएच की सुरक्षा के लिए रेत के कट्टे भरकर लगाने के निर्देश दिए गए हैं। रिजर्व फॉरेस्ट लैंड होने के कारण काम कराने में दिक्कत आ रही है। रिटेनिंग वाल के निर्माण का कार्य बरसात रूकने के बाद शुरू करवाया जाएगा।
उधर, अफजलगढ में बरसात शुरू होने के साथ ही नदी और नाले उफान भरने लगे हैं। कालागढ़ से दिल्ली को जोड़ने वाले मार्ग पर सूखा स्त्रोत के पुल की रैंप पानी के तेज बहाव से टूटने के कगार पर है। प्रशासन की अनदेखी कभी भी कालागढ़ की जनता के लिए परेशानी का सबब बन सकती है। जेई का कहना है कि मामला संज्ञान में है। अधिकारियों को फोटोग्राफी कर अवगत करा दिया गया है। जल्द ही पुल के तटबंधों की मरम्मत का काम शुरू होगा। वहीं, नगीना क्षेत्र में एसडीएम गजेंद्र सिंह ने बताया कि गांव चमरावाला में कृषि भूमि कटान की पूर्ण सुरक्षा करा दी गई है। क्षेत्र के सभी लेखपालों को बराबर चौकसी बरतने के निर्देश दिए हैं।