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गेहूं की बंपर पैदावार होने की उम्मीद
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गेहूं की बंपर पैदावार होने की उम्मीद
बिजनौर। कृषि कानूनों के विरोध में किसान भले ही खेतों में लहलहा रही गेहूं की फसल को जोत रहे हों, लेकिन इस बार खेतों में शानदार फसल खड़ी है। सर्दी का मौसम देर तक चलने और बीच में दो तीन बारिश होने से गेहूं की फसल में बहुत जान डाल दी है। इन सभी परिस्थितियों की वजह से गेहूं का उत्पादन पिछले साल से भी अधिक होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
गेहूं जिले के किसानों की प्रमुख फसल है। किसानों ने इस बार भी एक लाख 47 हजार हेक्टेयर जमीन में गेहूं बोया गया है। पिछले साल किसानों ने गन्ने की फसल के रकबे में बहुत वृद्धि की थी। जिससे अनुमान लगाया जा रहा था कि इस बार किसान खेतों में गेहूं ज्यादा नहीं बो पाएंगे, लेकिन चीनी मिलों के जल्दी पेराई करने से खेत जल्दी खाली हो गए और गेहूं का रकबा भी बढ़ गया। दिसंबर और जनवरी में काफी ठंड हुई। जनवरी के अंत तक कोहरा खत्म हो जाता है, लेकिन इस बार फरवरी तक कोहरा जारी रहा। कोहरा जितना आता है सर्दी उतनी ही ज्यादा होती है और गेहूं की फसल को भी उतना ही फायदा होता है। कोहरा आने और बीच में तीन चार बारिश होने से गेहूं की फसल खेतों में लहलहा रही है। पिछले साल गेहूं की औसत पैदावार 37.51 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रही थी जो इस बार 38 क्विंटल तक रहने का अनुमान लगाया जा रहा है।
बारिश की वजह से गल गया था बीज
2019 में गेहूं की बुवाई की समय जोरदार बारिश हुई थी। बारिश होने से गेहूं का जमाव प्रभावित हुआ था। काफी किसानों का 30 प्रतिशत बीज तक बारिश की वजह से गल गया था। खादर में काफी खेतों में बीज गलने के कारण फसल पैदा ही नहीं हुई थी। लेकिन इस बार गेहूं बुवाई के समय बारिश न होने से किसानों को फायदा हुआ है।
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लूज स्मट का नहीं नाम
खेतों में अक्सर लूज स्मट नाम का रोग आ जाता है। इसमें गेहूं का दाना पकने के बजाए काला पड़कर पाउडर बन जाता है। लगातार घर के कई साल पुराने बीज बिना शोधित किए बोने पर ऐसा होता है। लेकिन खेतों में इस बार इसका असर नहीं मिल रहा है। 2019 में गेहूं की फसल में यह बीमारी ज्यादा देखने को मिली थी। सरकारी खरीद केंद्रों पर भी इस तरह के गेहूं को खरीदने से इनकार कर दिया गया था।
गेहूं की पैदावार
साल औसत उत्पादन
2015-16 31
2016-17 34.57
2017-18 36.19
2018-19 37.51
2019-20 34.99
2020-21 38 (संभावित)
नोट : उत्पादन क्विंटल प्रति हेक्टेयर में है।
फसल में नहीं है कोई रोग : कृषि अधिकारी
जिला कृषि अधिकारी डॉ. अवधेश मिश्र के अनुसार गेहूं की फसल खेतों में अच्छी खड़ी है। कहीं कोई रोग देखने को नहीं मिला है। किसान भी फसल का ध्यान रखें। कृषि वैज्ञानिक डॉ. नरेंद्र सिंह के अनुसार ठंड होने से गेहूं की फसल को फायदा हुआ है। इस बार फरवरी तक ठंड होने से गेहूं की फसल को वृद्धि के लिए बहुत समय मिला है। अभी तक गेहूं की फसल में कोई रोग नहीं है। इससे गेहूं की बंपर पैदावार होने की उम्मीद है।
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बिजनौर। कृषि कानूनों के विरोध में किसान भले ही खेतों में लहलहा रही गेहूं की फसल को जोत रहे हों, लेकिन इस बार खेतों में शानदार फसल खड़ी है। सर्दी का मौसम देर तक चलने और बीच में दो तीन बारिश होने से गेहूं की फसल में बहुत जान डाल दी है। इन सभी परिस्थितियों की वजह से गेहूं का उत्पादन पिछले साल से भी अधिक होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
गेहूं जिले के किसानों की प्रमुख फसल है। किसानों ने इस बार भी एक लाख 47 हजार हेक्टेयर जमीन में गेहूं बोया गया है। पिछले साल किसानों ने गन्ने की फसल के रकबे में बहुत वृद्धि की थी। जिससे अनुमान लगाया जा रहा था कि इस बार किसान खेतों में गेहूं ज्यादा नहीं बो पाएंगे, लेकिन चीनी मिलों के जल्दी पेराई करने से खेत जल्दी खाली हो गए और गेहूं का रकबा भी बढ़ गया। दिसंबर और जनवरी में काफी ठंड हुई। जनवरी के अंत तक कोहरा खत्म हो जाता है, लेकिन इस बार फरवरी तक कोहरा जारी रहा। कोहरा जितना आता है सर्दी उतनी ही ज्यादा होती है और गेहूं की फसल को भी उतना ही फायदा होता है। कोहरा आने और बीच में तीन चार बारिश होने से गेहूं की फसल खेतों में लहलहा रही है। पिछले साल गेहूं की औसत पैदावार 37.51 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रही थी जो इस बार 38 क्विंटल तक रहने का अनुमान लगाया जा रहा है।
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बारिश की वजह से गल गया था बीज
2019 में गेहूं की बुवाई की समय जोरदार बारिश हुई थी। बारिश होने से गेहूं का जमाव प्रभावित हुआ था। काफी किसानों का 30 प्रतिशत बीज तक बारिश की वजह से गल गया था। खादर में काफी खेतों में बीज गलने के कारण फसल पैदा ही नहीं हुई थी। लेकिन इस बार गेहूं बुवाई के समय बारिश न होने से किसानों को फायदा हुआ है।
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लूज स्मट का नहीं नाम
खेतों में अक्सर लूज स्मट नाम का रोग आ जाता है। इसमें गेहूं का दाना पकने के बजाए काला पड़कर पाउडर बन जाता है। लगातार घर के कई साल पुराने बीज बिना शोधित किए बोने पर ऐसा होता है। लेकिन खेतों में इस बार इसका असर नहीं मिल रहा है। 2019 में गेहूं की फसल में यह बीमारी ज्यादा देखने को मिली थी। सरकारी खरीद केंद्रों पर भी इस तरह के गेहूं को खरीदने से इनकार कर दिया गया था।
गेहूं की पैदावार
साल औसत उत्पादन
2015-16 31
2016-17 34.57
2017-18 36.19
2018-19 37.51
2019-20 34.99
2020-21 38 (संभावित)
नोट : उत्पादन क्विंटल प्रति हेक्टेयर में है।
फसल में नहीं है कोई रोग : कृषि अधिकारी
जिला कृषि अधिकारी डॉ. अवधेश मिश्र के अनुसार गेहूं की फसल खेतों में अच्छी खड़ी है। कहीं कोई रोग देखने को नहीं मिला है। किसान भी फसल का ध्यान रखें। कृषि वैज्ञानिक डॉ. नरेंद्र सिंह के अनुसार ठंड होने से गेहूं की फसल को फायदा हुआ है। इस बार फरवरी तक ठंड होने से गेहूं की फसल को वृद्धि के लिए बहुत समय मिला है। अभी तक गेहूं की फसल में कोई रोग नहीं है। इससे गेहूं की बंपर पैदावार होने की उम्मीद है।