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बिजनौर: बिजनौर के वकीलों ने बनाई आत्मसमर्पण की रणनीति, पुलिस को नहीं लगने दी भनक
Fri, 10 Feb 2023 08:50 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Fri, 10 Feb 2023 08:50 PM IST
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गीना में कोर्ट में सरेंडर करने के बाद पुलिस की गाड़ी में बैठे भाजपा नेता प्रिंस चौधरी।
- कहा- परीक्षितगढ़ के मामले में प्रिंस को षड्यंत्र के तहत फंसाया गया है
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। प्रिंस चौधरी को पुलिस की गिरफ्तारी से बचाने के लिए पुराने मुकदमे का सहारा लिया गया। अधिवक्ता अनुज चौधरी का कहना है कि उन्हें मेरठ के परीक्षितगढ़ के मामले में झूठा फंसाया गया है। दुर्घटना के मामले को बढ़ा-चढ़ाकर गैर इरादतन हत्या के मामले में बदल दिया है। प्रिंस की आंख खराब है, वह कभी स्वयं गाड़ी नहीं चलाते। ड्राइवर या कोई अन्य साथी गाड़ी चलाता है। राजनीतिक विद्वेष के चलते उन्हें फंसाया गया है।
बिजनौर के वकीलों का एक जत्था नगीना पहुंचा। जिसमें अधिवक्ता अनुज चौधरी, सुरेंद्र सिंह, अर्पण जिंघाला, सुधीर कुमार, राहुल चौधरी आदि शामिल थे। वकीलों ने प्रिंस चौधरी को पेश करने के लिए जिस केस को चुना, उसमें उनको विचारण के लिए तलब किया गया था। वकीलों की ओर से प्रिंस चौधरी को पेश करने के लिए प्रार्थना पत्र लगाया गया था कि इस मामले में वह पहले पेश नहीं हुआ था और वांछित था। इसलिए न्यायालय ने उसे न्यायिक हिरासत में ले लिया। रणनीति के तहत उसकी जमानत का प्रार्थना पत्र भी नहीं लगाया गया। जिस वजह से उसे जेल भेजा गया। वकीलों ने प्रिंस चौधरी के पेश होने की भनक तक नहीं लगने दी। अधिवक्ता अनुज चौधरी का कहना है कि उन्हें मेरठ के परीक्षितगढ़ के मामले में झूठा फंसाया गया है। दुर्घटना के मामले को बढ़ा-चढ़ाकर गैर इरादतन हत्या के मामले में बदल दिया है। प्रिंस की आंख खराब है, वह कभी स्वयं गाड़ी नहीं चलाते। ड्राइवर या कोई अन्य साथी गाड़ी चलाता है। राजनीतिक विद्वेष के चलते उन्हें फंसाया गया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। प्रिंस चौधरी को पुलिस की गिरफ्तारी से बचाने के लिए पुराने मुकदमे का सहारा लिया गया। अधिवक्ता अनुज चौधरी का कहना है कि उन्हें मेरठ के परीक्षितगढ़ के मामले में झूठा फंसाया गया है। दुर्घटना के मामले को बढ़ा-चढ़ाकर गैर इरादतन हत्या के मामले में बदल दिया है। प्रिंस की आंख खराब है, वह कभी स्वयं गाड़ी नहीं चलाते। ड्राइवर या कोई अन्य साथी गाड़ी चलाता है। राजनीतिक विद्वेष के चलते उन्हें फंसाया गया है।
बिजनौर के वकीलों का एक जत्था नगीना पहुंचा। जिसमें अधिवक्ता अनुज चौधरी, सुरेंद्र सिंह, अर्पण जिंघाला, सुधीर कुमार, राहुल चौधरी आदि शामिल थे। वकीलों ने प्रिंस चौधरी को पेश करने के लिए जिस केस को चुना, उसमें उनको विचारण के लिए तलब किया गया था। वकीलों की ओर से प्रिंस चौधरी को पेश करने के लिए प्रार्थना पत्र लगाया गया था कि इस मामले में वह पहले पेश नहीं हुआ था और वांछित था। इसलिए न्यायालय ने उसे न्यायिक हिरासत में ले लिया। रणनीति के तहत उसकी जमानत का प्रार्थना पत्र भी नहीं लगाया गया। जिस वजह से उसे जेल भेजा गया। वकीलों ने प्रिंस चौधरी के पेश होने की भनक तक नहीं लगने दी। अधिवक्ता अनुज चौधरी का कहना है कि उन्हें मेरठ के परीक्षितगढ़ के मामले में झूठा फंसाया गया है। दुर्घटना के मामले को बढ़ा-चढ़ाकर गैर इरादतन हत्या के मामले में बदल दिया है। प्रिंस की आंख खराब है, वह कभी स्वयं गाड़ी नहीं चलाते। ड्राइवर या कोई अन्य साथी गाड़ी चलाता है। राजनीतिक विद्वेष के चलते उन्हें फंसाया गया है।
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