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हर वसंत पर याद आते हैं रामकुमार वैद्य
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रामकुमार वैद्य (फाइल फोटो।)
- फोटो : BIJNOR
हर वसंत पर याद आते हैं रामकुमार वैद्य
बिजनौर। वसंतोत्सव पर स्वर्गीय रामकुमार वैद्य आज भी लोगों को याद आते हैं। वसंत पर वह कई दिन कार्यक्रम कराते थे। वसंत से एक माह पूर्व से कार्यक्रम की तैयारी शुरू हो जाती थी। वसंत के तीन दिवसीय कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम होते थे, अंतरराष्ट्रीय स्तर का कवि सम्मेलन होता। वैद्य थे इसलिए वनौषधि प्रदर्शनी लगती और वॉलीबाल की स्पर्धा भी होती थी।
उनके साथी प्रसिद्ध आर्य समाजी जयनारायण अरुण बताते हैं कि वैद्य जी के साथ नगर के गणमान्य व्यक्तियों की टीम भी एक माह पूर्व से इसकी तैयारी में लग जाती थी। पत्रकार विश्वामित्र शर्मा, देवीशरण शर्मा धामपुर, अभिमन्यु कुमार पाठक, आत्माराम शर्मा, त्रिलोकी नाथ खन्ना, आनन्द गुप्ता, शत्रुघ्न वर्मा, आदित्यनारायण मिश्रा, अब्दुल वहाब, मोहम्मद अफसर आदि टीम में शामिल होते थे। आर्थिक मदद उदय कुमार विश्नोई और पंडित जुगल किशोर शर्मा आदि करते थे। पूरा मैदान पीली बंदनवाल से सजाया जाता था। वैद्यजी और उनकी टीम पीले वस्त्र पहनती थी। कार्यक्रम के विजेताओं को पुरस्कार दिए जाते थे। वनौषधि प्रदर्शनी के साथ समाचार पत्रों की भी प्रदर्शनी लगाते थे।
जयनारायण अरुण बताते हैं कि वैद्यजी बहु प्रतिभा धनी थे। आयुर्वेद के कई ग्रंथ कंठस्थ थे। वैद्यजी मूल रूप से पैजनियां, बिजनौर निवासी थे। कण्व भूमि नाम से अपना साप्ताहिक अखबार निकालते थे। सिविल लाइन्स में उनकी शंकर औषधालय नाम से दुकान थी। लेखक शकील बिजनौरी बताते हैं कि रावली में कण्वाश्रम की स्थापना के लिए उन्होंने बहुत कार्य किया। रावली के स्कूल प्रांगण में कण्वऋषि की प्रतिमा लगवाई। इसका उद्घाटन पूर्व रक्षा मंत्री जगजीवन राम से कराया था।
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बिजनौर। वसंतोत्सव पर स्वर्गीय रामकुमार वैद्य आज भी लोगों को याद आते हैं। वसंत पर वह कई दिन कार्यक्रम कराते थे। वसंत से एक माह पूर्व से कार्यक्रम की तैयारी शुरू हो जाती थी। वसंत के तीन दिवसीय कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम होते थे, अंतरराष्ट्रीय स्तर का कवि सम्मेलन होता। वैद्य थे इसलिए वनौषधि प्रदर्शनी लगती और वॉलीबाल की स्पर्धा भी होती थी।
उनके साथी प्रसिद्ध आर्य समाजी जयनारायण अरुण बताते हैं कि वैद्य जी के साथ नगर के गणमान्य व्यक्तियों की टीम भी एक माह पूर्व से इसकी तैयारी में लग जाती थी। पत्रकार विश्वामित्र शर्मा, देवीशरण शर्मा धामपुर, अभिमन्यु कुमार पाठक, आत्माराम शर्मा, त्रिलोकी नाथ खन्ना, आनन्द गुप्ता, शत्रुघ्न वर्मा, आदित्यनारायण मिश्रा, अब्दुल वहाब, मोहम्मद अफसर आदि टीम में शामिल होते थे। आर्थिक मदद उदय कुमार विश्नोई और पंडित जुगल किशोर शर्मा आदि करते थे। पूरा मैदान पीली बंदनवाल से सजाया जाता था। वैद्यजी और उनकी टीम पीले वस्त्र पहनती थी। कार्यक्रम के विजेताओं को पुरस्कार दिए जाते थे। वनौषधि प्रदर्शनी के साथ समाचार पत्रों की भी प्रदर्शनी लगाते थे।
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जयनारायण अरुण बताते हैं कि वैद्यजी बहु प्रतिभा धनी थे। आयुर्वेद के कई ग्रंथ कंठस्थ थे। वैद्यजी मूल रूप से पैजनियां, बिजनौर निवासी थे। कण्व भूमि नाम से अपना साप्ताहिक अखबार निकालते थे। सिविल लाइन्स में उनकी शंकर औषधालय नाम से दुकान थी। लेखक शकील बिजनौरी बताते हैं कि रावली में कण्वाश्रम की स्थापना के लिए उन्होंने बहुत कार्य किया। रावली के स्कूल प्रांगण में कण्वऋषि की प्रतिमा लगवाई। इसका उद्घाटन पूर्व रक्षा मंत्री जगजीवन राम से कराया था।
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