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गुड़ सुधारेगा चीनी मिलों का हाजमा
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गुड़ सुधारेगा चीनी मिलों का ‘हाजमा’
बिजनौर। चीनी मिलों का हाजमा अब गुड़ ठीक करेगा। गुड़ी की मांग बढ़ाने के लिए शासन प्रयास करेगा। जनता के बीच जाकर गुड़ के फायदों के बारे में बताया जाएगा। गुड़ महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। गुड़ की मांग बढ़ाई जाएगी तो उत्पादन भी बढ़ेगा। इससे चीनी मिलों पर गन्ने की आवक का बोझ कम होगा। चीनी मिलों को चीनी और किसानों को गन्ने के अच्छे दाम मिलेंगे।
खेती वेस्ट यूपी की लाइफ लाइन है। खेती से जुड़े किसान किसी और फसल की ओर रुख करने को तैयार नहीं हैं। गन्ने की पैदावार अधिक होने से चीनी का उत्पादन बढ़ गया है। इस वजह से चीनी मिलों पर पिछले तीन साल से गन्ने का एक ही दाम है। इसके बाद भी किसान चेतने को तैयार नहीं हैं। शासन, प्रशासन एकदम से किसानों को गन्ने से दूसरी फसल की ओर नहीं ले जा सकता, लेकिन गन्ने से बनने वाले उत्पादों में तो परिवर्तन कर सकता है। गन्ने से गुड़, चीनी व एथनॉल बनता है। चीनी व एथनॉल चीनी मिल में ही बनाए जा सकते हैं, लेकिन गुड़ क्रेशर व कोल्हुओं में बनता है। गुड़ को खाने से अनेक फायदे होते हैं। लेकिन जनता गुड़ से दूर होती जा रही है। शासन अब जनता को गुड़ के फायदे बताएगा। गुड़ महोत्सवों का आयोजन होगा। गुड़ महोत्सव में गुड़ की वैरायटी, फायदे आदि के बारे में बताया जाएगा। इसके कोल्हू व क्रेशर संचालकों को भी बुलाया जाएगा। वे जनता के बीच सीधे जाकर अपने उत्पाद का प्रचार करेंगे। जनता को गुड़ से जोड़ेंगे। गुड़ की मांग बढ़ेगी तो कोल्हू व क्रेशर संचालक किसानों से महंगे दामों पर गन्ना खरीदेंगे। इससे चीनी मिलों पर जाने वाले गन्ने की आपूर्ति कम होगी।
गुड़ का उत्पादन साल दर साल
पेराई सत्र क्रेशर गन्ना पेराई गुड़ उत्पादन
2014-15 53 66.87 6.30
2015-16 50 69.42 7.28
2016-17 52 76.45 ा 7.80
2017-18 51 75 7.50
2018-19 48 64.91 7.27
2019-20 57 24.78 2.37
नोट:गन्ना पेराई व गुड़ उत्पादन के आंकड़े लाख क्विंटल में हैं। 2019-20 के आंकड़े दिसंबर 2019 तक के हैं। आंकड़े सहायक चीनी आयुक्त से लिए गए हैं। ये बिजनौर, नजीबाबाद व नगीना तहसील के हैं।
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गुड़ के फायदे
सहायक चीनी आयुक्त देवेंद्र प्रसाद मौर्य गुड़ स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक होता है। पेट के कई रोगों के लिए यह रामबाण इलाज है। यह आयरन का बड़ा स्त्रोत है। खून में आयरन की कमी दूर होती है। यह ब्लड प्रेशर को भी कंट्रोल करता है। हड्डियों को मजबूत करता है। शरीर को मजबूत व एक्टिव बनाता है। सर्दी-जुकाम में फायदेमंद रहता है। आंखों व दिमाग के लिए भी गुणकारी रहता है।
बहुत हैं कोल्हू-क्रेशर
जिले में 600 से अधिक कोल्हू व 100 से अधिक क्रेशर हैं। अगर इनकी संख्या बढ़ती है तो श्रमिकों के लिए रोजगार बढ़ेगा। पहले क्रेशरों की संख्या कम थी, लेकिन अब बढ़ने लगी है।
दूसरे सूबों, जिलों में गन्ना नहीं
सूबे में 75 जिलों में से करीब 27 जिलों में ही गन्ने की खेती होती है। इसके अलावा कई प्रदेशों में गन्ने की खेती नहीं होती है। वहां चीनी, गुड़ आदि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जाता है। चांदपुर में गुड़ की बड़ी मंडी लगती है।
गुड़ की मांग बढ़ने से चीनी व्यवसाय को भी फायदा
जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह के अनुसार गुड़ सेहत के लिए फायदेमंद है। अगर इसका इस्तेमाल बढ़ेगा तो चीनी उद्योग को भी फायदा होगा। गुड़ के उपयोग के लिए उपभोक्ताओं को जागरूक किया जाएगा।
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बिजनौर। चीनी मिलों का हाजमा अब गुड़ ठीक करेगा। गुड़ी की मांग बढ़ाने के लिए शासन प्रयास करेगा। जनता के बीच जाकर गुड़ के फायदों के बारे में बताया जाएगा। गुड़ महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। गुड़ की मांग बढ़ाई जाएगी तो उत्पादन भी बढ़ेगा। इससे चीनी मिलों पर गन्ने की आवक का बोझ कम होगा। चीनी मिलों को चीनी और किसानों को गन्ने के अच्छे दाम मिलेंगे।
खेती वेस्ट यूपी की लाइफ लाइन है। खेती से जुड़े किसान किसी और फसल की ओर रुख करने को तैयार नहीं हैं। गन्ने की पैदावार अधिक होने से चीनी का उत्पादन बढ़ गया है। इस वजह से चीनी मिलों पर पिछले तीन साल से गन्ने का एक ही दाम है। इसके बाद भी किसान चेतने को तैयार नहीं हैं। शासन, प्रशासन एकदम से किसानों को गन्ने से दूसरी फसल की ओर नहीं ले जा सकता, लेकिन गन्ने से बनने वाले उत्पादों में तो परिवर्तन कर सकता है। गन्ने से गुड़, चीनी व एथनॉल बनता है। चीनी व एथनॉल चीनी मिल में ही बनाए जा सकते हैं, लेकिन गुड़ क्रेशर व कोल्हुओं में बनता है। गुड़ को खाने से अनेक फायदे होते हैं। लेकिन जनता गुड़ से दूर होती जा रही है। शासन अब जनता को गुड़ के फायदे बताएगा। गुड़ महोत्सवों का आयोजन होगा। गुड़ महोत्सव में गुड़ की वैरायटी, फायदे आदि के बारे में बताया जाएगा। इसके कोल्हू व क्रेशर संचालकों को भी बुलाया जाएगा। वे जनता के बीच सीधे जाकर अपने उत्पाद का प्रचार करेंगे। जनता को गुड़ से जोड़ेंगे। गुड़ की मांग बढ़ेगी तो कोल्हू व क्रेशर संचालक किसानों से महंगे दामों पर गन्ना खरीदेंगे। इससे चीनी मिलों पर जाने वाले गन्ने की आपूर्ति कम होगी।
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गुड़ का उत्पादन साल दर साल
पेराई सत्र क्रेशर गन्ना पेराई गुड़ उत्पादन
2014-15 53 66.87 6.30
2015-16 50 69.42 7.28
2016-17 52 76.45 ा 7.80
2017-18 51 75 7.50
2018-19 48 64.91 7.27
2019-20 57 24.78 2.37
नोट:गन्ना पेराई व गुड़ उत्पादन के आंकड़े लाख क्विंटल में हैं। 2019-20 के आंकड़े दिसंबर 2019 तक के हैं। आंकड़े सहायक चीनी आयुक्त से लिए गए हैं। ये बिजनौर, नजीबाबाद व नगीना तहसील के हैं।
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गुड़ के फायदे
सहायक चीनी आयुक्त देवेंद्र प्रसाद मौर्य गुड़ स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक होता है। पेट के कई रोगों के लिए यह रामबाण इलाज है। यह आयरन का बड़ा स्त्रोत है। खून में आयरन की कमी दूर होती है। यह ब्लड प्रेशर को भी कंट्रोल करता है। हड्डियों को मजबूत करता है। शरीर को मजबूत व एक्टिव बनाता है। सर्दी-जुकाम में फायदेमंद रहता है। आंखों व दिमाग के लिए भी गुणकारी रहता है।
बहुत हैं कोल्हू-क्रेशर
जिले में 600 से अधिक कोल्हू व 100 से अधिक क्रेशर हैं। अगर इनकी संख्या बढ़ती है तो श्रमिकों के लिए रोजगार बढ़ेगा। पहले क्रेशरों की संख्या कम थी, लेकिन अब बढ़ने लगी है।
दूसरे सूबों, जिलों में गन्ना नहीं
सूबे में 75 जिलों में से करीब 27 जिलों में ही गन्ने की खेती होती है। इसके अलावा कई प्रदेशों में गन्ने की खेती नहीं होती है। वहां चीनी, गुड़ आदि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जाता है। चांदपुर में गुड़ की बड़ी मंडी लगती है।
गुड़ की मांग बढ़ने से चीनी व्यवसाय को भी फायदा
जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह के अनुसार गुड़ सेहत के लिए फायदेमंद है। अगर इसका इस्तेमाल बढ़ेगा तो चीनी उद्योग को भी फायदा होगा। गुड़ के उपयोग के लिए उपभोक्ताओं को जागरूक किया जाएगा।