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बुराई को देखकर खामोश रहना भी गुनाह : हंज़ला
Tue, 20 Jun 2023 01:18 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Tue, 20 Jun 2023 01:18 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
नींदडू। रविवार की रात इशा की नमाज के बाद मस्जिद सादात में होने वाली जीमयतुल उलमा की साप्ताहिक बैठक में तकरीर करते हुए मुफ्ती मोहम्मद हंज़ला ने कहा कि बुराई को होता हुआ देखकर खामोश रहना भी गुनाह है।
उन्होंने हदीस के हवाले से बताया कि समाज में मौजूद बुराई को ताकत से रोकना ईमान का पहला दर्जा है। बुराई को ताकत से रोकने की हिम्मत नहीं होने पर बुराई को ज़बान से बुरा कहना ईमान का दूसरा दर्जा है। अगर इतना भी साहस न हो, तब बुराई को देखकर उसे दिल में बुरा समझना ईमान का तीसरा और अंतिम दर्जा है। लेकिन इस तीसरे दर्ज के ईमान के साथ बुराई को बुराई समझते हुए वहां से हट जाना चाहिए। कारी तलअत महमूद की सदारत और कारी मोहम्मद अरशद की निजामत में आयोजित बैठक में मौलाना मोहम्मद फैसल ने शादी-निकाह या अकीके में होने वाली बेजा रस्मों को समाप्त कर निकाह को आसान बनाने पर जोर दिया। उन्होंने मंडप में पशुओं के समान खड़ा होकर भोजन करने की बजाय बैठ कर खाना खाने व खिलाने के प्रति लोगों को जागरूक किया।
इस अवसर पर मुफ्ती मोहम्मद कासिम, काजी नूर अहमद, मुफ्ती सदाकत हुसैन, मौलाना अब्दुल अलीम, कारी मुबीन कुरैशी, हाफिज इमरान अहमद, अब्दुल कादिर, गुलजार प्रधान, हाफिज महफूजुर्रहमान, कारी वहाजुद्दीन व मुदस्सिर प्रधान समेत कई लोग मौजूद रहे।
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नींदडू। रविवार की रात इशा की नमाज के बाद मस्जिद सादात में होने वाली जीमयतुल उलमा की साप्ताहिक बैठक में तकरीर करते हुए मुफ्ती मोहम्मद हंज़ला ने कहा कि बुराई को होता हुआ देखकर खामोश रहना भी गुनाह है।
उन्होंने हदीस के हवाले से बताया कि समाज में मौजूद बुराई को ताकत से रोकना ईमान का पहला दर्जा है। बुराई को ताकत से रोकने की हिम्मत नहीं होने पर बुराई को ज़बान से बुरा कहना ईमान का दूसरा दर्जा है। अगर इतना भी साहस न हो, तब बुराई को देखकर उसे दिल में बुरा समझना ईमान का तीसरा और अंतिम दर्जा है। लेकिन इस तीसरे दर्ज के ईमान के साथ बुराई को बुराई समझते हुए वहां से हट जाना चाहिए। कारी तलअत महमूद की सदारत और कारी मोहम्मद अरशद की निजामत में आयोजित बैठक में मौलाना मोहम्मद फैसल ने शादी-निकाह या अकीके में होने वाली बेजा रस्मों को समाप्त कर निकाह को आसान बनाने पर जोर दिया। उन्होंने मंडप में पशुओं के समान खड़ा होकर भोजन करने की बजाय बैठ कर खाना खाने व खिलाने के प्रति लोगों को जागरूक किया।
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इस अवसर पर मुफ्ती मोहम्मद कासिम, काजी नूर अहमद, मुफ्ती सदाकत हुसैन, मौलाना अब्दुल अलीम, कारी मुबीन कुरैशी, हाफिज इमरान अहमद, अब्दुल कादिर, गुलजार प्रधान, हाफिज महफूजुर्रहमान, कारी वहाजुद्दीन व मुदस्सिर प्रधान समेत कई लोग मौजूद रहे।
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