फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bijnor News ›   Beekeeping is proving to be a loss-making deal

घाटे का सौदा साबित हो रहा मधुमक्खी पालन

Mon, 02 Aug 2021 11:57 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 02 Aug 2021 11:57 PM IST
विज्ञापन
Beekeeping is proving to be a loss-making deal
घाटे का सौदा साबित हो रहा मधुमक्खी पालन
विज्ञापन

बिजनौर। घाटे के कारण शहद के कारोबारी इस व्यवसाय से तौबा कर रहे हैं। बाजार में तो शहद के दाम आसमान छू रहे हैं, लेकिन मधुमक्खी पालकों से सस्ते दामों में शहद खरीदा जा रहा है। ये ही वजह है कि जिले में पांच हजार में से एक हजार ही मधुमक्खी पालक बचे है। ये भी इस कारोबार को छोड़ने का मन बना रहे हैं।
चार साल पहले इस कारोबार से धन कमाने वाले कारोबारी अब मधुमक्खी पालने से तौबा कर रहे हैं। वजह ये है कि अब उनकी लागत भी नहीं निकल रही है। मधुमक्खी पालकों के मुताबिक मधुमक्खी को पालने वाला एक डिब्बा तीन हजार रुपये में मिलता है। एक डिब्बे में 15 दिन में 15 किलो चीनी की खपत होती है। पहले एक डिब्बे से सीजन में 60 किलो तक शहद निकल जाता था, लेकिन अब दस किलो शहद भी नहीं किल रहा है। चार साल पहले तक जिले में पांच हजार लोग इस कारोबार को कर रहे थे। कमाई अच्छी हुई तो मधुमक्खी पालकों ने इस कारोबार को खूब बढ़ा दिया था।
विज्ञापन

एक मधुमक्खी पालक पर बड़ी संख्या में डब्बे होते थे। लेकिन अब उन्होंने इस कारोबार में कमाई नहीं होने पर कारोबार से तौबा कर ली है। जिले में अब केवल एक हजार मधुमक्खी पालक ही बचे हैं। वे भी इस कारोबार को बंद करने का मन बना रहे हैं। मधुमक्खी पालने से उन्हें लगातार घाटा हो रहा है। मधुमक्खी पालक विनीत कुमार, राजीव कुमार, अरविंद कुमार, रामऔतार के मुताबिक पहले उनसे 150 रुपये किलो तक शहद खरीदा जाता था। लेकिन अब ये दाम बहुत घट गए हैं। मार्च माह में मधुमक्खी पालकों से 75 से 100 रुपये किलो तक शहद खरीदा गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

ब्रांडेड कंपनी का शहर ही महंगा
ब्रांडेड कंपनी का बाजार में शहद 300 रुपये से लेकर 400 रुपये किलो तक बिक रहा है। खुला शहद दुकानों पर 200 रुपये से लेकर 250 रुपये किलो तक बिक रहा है। पहले लोग सीधे मधुमक्खी पालकों से शहद खरीद लेते थे। लेकिन अब मधुमक्खी पालकों से भी लोगों को शहद नहीं मिल रहा है। जो मधुमक्खी पालक बचे हैं, उनसे सीधे ब्रांडेड कंपनी के एजेंट सारा शहद खरीदकर ले जाते हैं। शहद इम्युनिटी बूस्टर होता है। लोगों में इसके इस्तेमाल का रुझान बढ़ा है। लेकिन इसका फायदा केवल ब्रांडेड कंपनी ही उठा रही हैं। मधुमक्खी पालकों से सस्ते में शहद खरीदा जा रहा है।

पेस्टीसाइट से खत्म हो रही मधु मक्खियां
मधुमक्खी पालक विनीत कुमार के अनुसार जिले में सरसों और यूकेलिप्टस के फूूल से मधुमक्खी शहद बनाती हैं। ये दोनों जिले में कम होते जा रहे हैं। जो सरसों है उस पर पेस्टीसाइट का बहुत इस्तेमाल हो रहा है। इस वजह से मधुमक्खी पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। जो मधुमक्खी पालक डिब्बे लेकर राजस्थान चले जाते हैं वे ही इस कारोबार में टिके हुए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed