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बंदूक से बैसाखी को दी मात, देश की दूसरी रैंक की पैराशूटर बनी आकांक्षा
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बंदूक से बैसाखी को दी मात
बिजनौर। अगर मन में लगन हो तो कुछ भी नामुमकिन नहीं हैं। स्वाहेड़ी की आकांक्षा चौधरी ने ये बात साबित कर दी है। एक साल की कड़ी मेहनत के बाद भारतीय शूटिंग टीम में एंट्री की दहलीज पर खड़ी आकांक्षा तीन मेडल जीत चुकी है। सीनियर स्टेंडिंग पोजीशन 10 मीटर एयर रायफल में देश की पहली महिला शूटर आकांक्षा का सपना वर्ल्ड कप में गोल्ड मेडल जीतना है। अपना प्रदर्शन और निखारने के लिए आकांक्षा ने घर पर ही शूटिंग रेंज बनवाया है। आकांक्षा चौधरी को जिले का यूथ आइकन चुना गया है।
गांव स्वाहेड़ी निवासी आकांक्षा दिव्यांग है। बचपन में उसे निशानेबाजी का शौक था, लेकिन जिले में कोई शूटिंग रेंज नहीं थी। बिजनौर के नेहरू स्पोर्ट्स स्टेडियम में इनडोर शूटिंग रेंज खुला तो वह रेंज में जाने लगी। एक ही साल में आकांक्षा ने प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भाग लिया। तीन प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल व एक में सिल्वर मेडल जीता। शानदार प्रदर्शन कर रही आकांक्षा का वर्ल्ड कप में सलेक्शन पक्का माना जा रहा है। बैंक में कार्यरत आकांक्षा का स्कोर 398 है, जबकि वर्ल्ड रिकॉर्ड 416 का है। इंडिया का बेस्ट 410 है। राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पुणे में आकांक्षा ओलंपिक में शूटिंग में मेडल जीतने वाले गगन नारंग की शूटिंग रेंज गई। वहां उन्होंने प्रैक्टिस करने की इच्छा जताई तो एक साल का खर्च करीब दस लाख रुपये बताया गया। इस पर आकांक्षा ने अपने घर ही प्रैक्टिस करने का निर्णय लिया और शूटिंग रेंज बनवा ली। आकांक्षा उन बेटियों के लिए मिसाल है जो किसी दिव्यांगता का शिकार होने पर घर पर हाथ पर हाथ रखकर बैठ जाती हैं और इसे अपनी किस्मत समझ लेती हैं।
अरूणिमा सिन्हा से है दोस्ती
माउंट एवरेस्ट पर अपनी हिम्मत का झंडा लहराने वाली दिव्यांग अरूणिमा सिन्हा आकांक्षा चौधरी की दोस्त हैं। अरूणिमा सिन्हा आकांक्षा को प्रोत्साहित करती रहती हैं। वे भी अब आकांक्षा की तरह शूटिंग में हाथ आजमाने की तैयारी कर रही हैं। आकांक्षा प्री स्टेट सीनियर शूटिंग प्रतियोगिता, दिल्ली में आयोजित स्टेट सीनियर शूटिंग प्रतियोगिता, दिल्ली में आयोजित प्री नेशनल शूटिंग प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीत चुकी है। पुणे में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में आकांक्षा ने सिल्वर मेडल झटका है।
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बिजनौर। अगर मन में लगन हो तो कुछ भी नामुमकिन नहीं हैं। स्वाहेड़ी की आकांक्षा चौधरी ने ये बात साबित कर दी है। एक साल की कड़ी मेहनत के बाद भारतीय शूटिंग टीम में एंट्री की दहलीज पर खड़ी आकांक्षा तीन मेडल जीत चुकी है। सीनियर स्टेंडिंग पोजीशन 10 मीटर एयर रायफल में देश की पहली महिला शूटर आकांक्षा का सपना वर्ल्ड कप में गोल्ड मेडल जीतना है। अपना प्रदर्शन और निखारने के लिए आकांक्षा ने घर पर ही शूटिंग रेंज बनवाया है। आकांक्षा चौधरी को जिले का यूथ आइकन चुना गया है।
गांव स्वाहेड़ी निवासी आकांक्षा दिव्यांग है। बचपन में उसे निशानेबाजी का शौक था, लेकिन जिले में कोई शूटिंग रेंज नहीं थी। बिजनौर के नेहरू स्पोर्ट्स स्टेडियम में इनडोर शूटिंग रेंज खुला तो वह रेंज में जाने लगी। एक ही साल में आकांक्षा ने प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भाग लिया। तीन प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल व एक में सिल्वर मेडल जीता। शानदार प्रदर्शन कर रही आकांक्षा का वर्ल्ड कप में सलेक्शन पक्का माना जा रहा है। बैंक में कार्यरत आकांक्षा का स्कोर 398 है, जबकि वर्ल्ड रिकॉर्ड 416 का है। इंडिया का बेस्ट 410 है। राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पुणे में आकांक्षा ओलंपिक में शूटिंग में मेडल जीतने वाले गगन नारंग की शूटिंग रेंज गई। वहां उन्होंने प्रैक्टिस करने की इच्छा जताई तो एक साल का खर्च करीब दस लाख रुपये बताया गया। इस पर आकांक्षा ने अपने घर ही प्रैक्टिस करने का निर्णय लिया और शूटिंग रेंज बनवा ली। आकांक्षा उन बेटियों के लिए मिसाल है जो किसी दिव्यांगता का शिकार होने पर घर पर हाथ पर हाथ रखकर बैठ जाती हैं और इसे अपनी किस्मत समझ लेती हैं।
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अरूणिमा सिन्हा से है दोस्ती
माउंट एवरेस्ट पर अपनी हिम्मत का झंडा लहराने वाली दिव्यांग अरूणिमा सिन्हा आकांक्षा चौधरी की दोस्त हैं। अरूणिमा सिन्हा आकांक्षा को प्रोत्साहित करती रहती हैं। वे भी अब आकांक्षा की तरह शूटिंग में हाथ आजमाने की तैयारी कर रही हैं। आकांक्षा प्री स्टेट सीनियर शूटिंग प्रतियोगिता, दिल्ली में आयोजित स्टेट सीनियर शूटिंग प्रतियोगिता, दिल्ली में आयोजित प्री नेशनल शूटिंग प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीत चुकी है। पुणे में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में आकांक्षा ने सिल्वर मेडल झटका है।
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