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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bijnor News ›   Basmati rice cultivation will return

बासमती चावल की खेती देगी मुनाफा

Thu, 12 May 2016 01:13 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, बिजनौर
ब्यूरो/ अमर उजाला, बिजनौर Updated Thu, 12 May 2016 01:13 AM IST
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बिजनौर । बासमती चावल की खेती करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर है। किसान इस बार बासमती चावल की खेती कर अच्छा फायदा कमा सकते है। ईरान को बासमती चावल निर्यात का प्रतिबंध खत्म होने के बाद अब फिर से बासमती चावल ईरान को निर्यात किया जा सकेगा।
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भारत का बासमती चावल गुणवत्ता के लिए दुनिया में जाना जाता है। एशिया में खपत का 75 प्रतिशत बासमती भारत से ही जाता है। ईरान भारतीय बासमती चावल का सबसे बड़ा खरीदार था और भारत का बासमती चावल ईरान को निर्यात होने से किसानों को भी फसल के अच्छे दाम मिलते थे। लेकिन पिछले दो तीन साल से ईरान को बासमती चावल निर्यात करने पर प्रतिबंध लगने के कारण बाजार में चावल की कीमत गिर गई थी।
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बाजार में नौ से दस हजार रुपये प्रति कुंतल तक बिकने वाले बासमती चावल के दाम घटकर पांच से छह हजार रुपये प्रति कुंतल तक आ गया था। लेकिन अब ईरान द्वारा भारतीय बासमती चावल की खरीदारी पर प्रतिबंध हटा दिया गया है। जिले में भी भारी संख्या में बास्मती चावल बोया जाता है।
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इसमे 1121 प्रजाति प्रमुख है। इसकी पूसा बासमती 6 (पूसा 1401) व पूसा बासमती 1509 (आईईटी 21959) उन्नत प्रजाति की नस्ल हैं और 1121 प्रजाति में संशोधन कर बनाई गई हैं। यह खाने की दृष्टि से सर्वोत्तम प्रजाति की फसल हैं। पूसा बासमती 1509 (आईईटी 21959) एक हेक्टेअर में 41.49 कुंतल तक की उपज देती है। 

जिला कृषि अधिकारी प्रमोद सिरोही के मुताबिक किसान बासमती चावल की उन्नत प्रजाति की फसल बोकर लाभ कमा सकते हैं।
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