{"_id":"5f2ef42b8ebc3e3ccd3471bb","slug":"barsingha-liked-hyderpur-wetland-bijnor-news-mrt4953235111","type":"story","status":"publish","title_hn":"बारहसिंघा को भाया हैदरपुर वेटलैंड, जलस्तर बढ़ने के बाद भी हरिद्वार नहीं किया पलायन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बारहसिंघा को भाया हैदरपुर वेटलैंड, जलस्तर बढ़ने के बाद भी हरिद्वार नहीं किया पलायन
विज्ञापन
बिजनौर के गंगा बैराज के पास हैदरपुर वेटलैंड में घूमता बारहसिंघा का झुंड।
- फोटो : BIJNOR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बारहसिंघा को भाया हैदरपुर वेटलैंड
बिजनौर। हैदरपुर वेटलैंड बारहसिंघा को बहुत भा रहा है। पहाड़ों पर बारिश से गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद भी बारहसिंघा ने हैदरपुर वेटलैंड में डेरा जमा रखा है। लंबे समय बाद बरसात में बारहसिंघा गंगा के टापूओं पर दिख रहा है। बरसात में भी बारहसिंघा के 40 से 50 के झुंड वेटलैंड में दिख रहे हैं। हालांकि अब भी बड़ी संख्या में बारहसिंघा हरिद्वार की झिलमिल रेंज में पलायन कर चुके हैं। गणना में दिखे बारहसिंघा को पहचानने के लिए वन विभाग की टीम लगी हुई है।
हस्तिनापुर सेंक्चुरी बारहसिंघा के विकास के लिए ही बनाई गई थी। गंगा किनारे का दलदली व नरम मिट्टी वाला क्षेत्र बारहसिंघा के विकास के लिए फायदेमंद साबित होता है। 2012 में केदारनाथ में आई जल प्रलय से मैदानी क्षेत्र में गंगा उफन गई थी। टापू गंगा में समा गए थे और हजारों की तादाद में बारहसिंघा बाढ़ में बह गए थे। इसके बाद काफी समय तो गंगा किनारे बारहसिंघा दिखे ही नहीं। अगर कुछ बारहसिंघा दिखे भी थे तो वे बरसात में हरिद्वार के जंगलों में पलायन कर जाते थे। लेकिन इस साल की शुरूआत में हैदरपुर वेटलैंड में बारहसिंघा केे बड़े बड़े झुंड देखने को मिले। पहली बार ड्रोन कैमरे से बारहसिंघा की गणना भी विशेषज्ञों की टीम ने की। बरसात में हैदरपुर वेटलैंड का जलस्तर बढ़ गया है। माना जा रहा था कि बरसात में वेटलैंड से बारहसिंघा हरिद्वार के जंगलों में पलायन कर गए होंगे। लेकिन हैदरपुर वेटलैंड बारहसिंघा को बहुत भा गया है। जलस्तर बढ़ने के बाद भी बारहसिंघा ने वेटलैंड को नहीं छोड़ा है। अब भी बारहसिंघा के बड़े झुंड वेटलैंड में दिख रहे हैं। पर्यावरणविद् और हैदरपुर वेटलैंड के संरक्षण में प्रमुख भूमिका निभाने वाले आशीष लोया का कहना है कि वेटलैंड में बारहसिंघा के अब भी बड़े झुंड हैं।
इसलिए डेरा जमाया है वेटलैंड में
हरिद्वार के वनों की मिट्टी पथरीली होती है जबकि वेटलैंड की मिट्टी नरम और दलदली होती है। बारहसिंघा के पैरों की तली यानि खुर नरम होते हैं। ये पथरीली जमीन पर घायल हो जाते हैं। इसलिए ये अब भी वेटलैंड में ही डेरा जमाए हुए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
बिजनौर। हैदरपुर वेटलैंड बारहसिंघा को बहुत भा रहा है। पहाड़ों पर बारिश से गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद भी बारहसिंघा ने हैदरपुर वेटलैंड में डेरा जमा रखा है। लंबे समय बाद बरसात में बारहसिंघा गंगा के टापूओं पर दिख रहा है। बरसात में भी बारहसिंघा के 40 से 50 के झुंड वेटलैंड में दिख रहे हैं। हालांकि अब भी बड़ी संख्या में बारहसिंघा हरिद्वार की झिलमिल रेंज में पलायन कर चुके हैं। गणना में दिखे बारहसिंघा को पहचानने के लिए वन विभाग की टीम लगी हुई है।
हस्तिनापुर सेंक्चुरी बारहसिंघा के विकास के लिए ही बनाई गई थी। गंगा किनारे का दलदली व नरम मिट्टी वाला क्षेत्र बारहसिंघा के विकास के लिए फायदेमंद साबित होता है। 2012 में केदारनाथ में आई जल प्रलय से मैदानी क्षेत्र में गंगा उफन गई थी। टापू गंगा में समा गए थे और हजारों की तादाद में बारहसिंघा बाढ़ में बह गए थे। इसके बाद काफी समय तो गंगा किनारे बारहसिंघा दिखे ही नहीं। अगर कुछ बारहसिंघा दिखे भी थे तो वे बरसात में हरिद्वार के जंगलों में पलायन कर जाते थे। लेकिन इस साल की शुरूआत में हैदरपुर वेटलैंड में बारहसिंघा केे बड़े बड़े झुंड देखने को मिले। पहली बार ड्रोन कैमरे से बारहसिंघा की गणना भी विशेषज्ञों की टीम ने की। बरसात में हैदरपुर वेटलैंड का जलस्तर बढ़ गया है। माना जा रहा था कि बरसात में वेटलैंड से बारहसिंघा हरिद्वार के जंगलों में पलायन कर गए होंगे। लेकिन हैदरपुर वेटलैंड बारहसिंघा को बहुत भा गया है। जलस्तर बढ़ने के बाद भी बारहसिंघा ने वेटलैंड को नहीं छोड़ा है। अब भी बारहसिंघा के बड़े झुंड वेटलैंड में दिख रहे हैं। पर्यावरणविद् और हैदरपुर वेटलैंड के संरक्षण में प्रमुख भूमिका निभाने वाले आशीष लोया का कहना है कि वेटलैंड में बारहसिंघा के अब भी बड़े झुंड हैं।
विज्ञापन
इसलिए डेरा जमाया है वेटलैंड में
हरिद्वार के वनों की मिट्टी पथरीली होती है जबकि वेटलैंड की मिट्टी नरम और दलदली होती है। बारहसिंघा के पैरों की तली यानि खुर नरम होते हैं। ये पथरीली जमीन पर घायल हो जाते हैं। इसलिए ये अब भी वेटलैंड में ही डेरा जमाए हुए हैं।
विज्ञापन