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Bijnor News: बैराज रोड पर हाईवे के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे पर रोक
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बिजनौर-बैराज मार्ग
- प्रथम दृष्टया जांच में सरकारी है जमीन, विस्तृत जांच करा रहा प्रशासन
- नवलपुर के गाटा संख्या आठ में गई थी जमीन, 20 से ज्यादा लोगों को मिलना था मुआवजा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। मेरठ-पौड़ी हाईवे के लिए बैराज रोड पर जमीन का अधिग्रहण किया गया था। इसमें 20 से ज्यादा कास्तकारों की जमीन नवलपुर के गाटा संख्या आठ में गई थी। मुआवजे की तैयारी हुई तो यह जमीन पुराने रिकॉर्ड में सरकारी निकली। ऐसे में डीएम ने इस गाटा की जमीन के मुआवजे पर रोक लगा दी है।
बिजनौर-बैराज रोड पर मेरठ-पौड़ी हाईवे का काम शुरू हो रहा है। हाईवे प्रशासन जमीन का अधिग्रहण कर रहा है और किसानों को इसके बदले मुआवजा भी दिया जा रहा है। इसमें ऐसा ही एक मामला बैराज रोड पर नवलपुर के पास गाटा संख्या आठ का सामने आया। इस गाटा के करीब 20 कास्तकारों की 4,994 वर्ग मीटर जमीन हाइवे में गई।
बात मुआवजे की आई तो तहसील से इसकी जांच हुई। पता चला कि 1359 फसली में इस गाटा की जमीन रेत-रेगिस्तान में दर्ज है। उस समय के लेखपालों और तहसील के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से इसके पट्टे कर दिए गए थे। करीब 30 साल पहले तत्कालीन एडीएम एफआर के यहां से इन पट्टों को निरस्त भी किया गया। लेकिन तहसील के रिकॉर्ड में इस जमीन की श्रेणी नहीं बदली गई।
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जमीन की बढ़ती कीमत देखते हुए बिजनौर के प्रापर्टी डीलर ही नहीं, दिल्ली, मुंबई के कुछ लोग भी यहां जमीन खरीदने लगे। सभी को यह बेशकीमती लग रही थी। अब मामला पता चला तो सबके होश उड़े हुए हैं। डीएम ने इस मामले में इस गाटा का मुआवजा जारी करने पर रोक लगा दी है।
एक हजार बीघा से ज्यादा हो सकता है रकबा
बात अब केवल हाइवे के लिए गई जमीन की नहीं रह गई, बल्कि उस गाटा में एक हजार बीघा से ज्यादा ऐसी जमीन है। जिसे दिल्ली, मुंबई, बिजनौर, मेरठ के प्रापर्टी डीलरों ने काफी महंगे दामों में खरीद लिया था। कुछ हाईवे से मुनाफा कमाने की तैयारी कर रहे थे तो कुछ यहां दुकान, कॉलोनी बनाने का सपना देख रहे थे। प्रशासन ने सर्वे विभाग को इसकी जांच सौंपी है। सर्वे विभाग की टीम इस मामले से संबंधित रिकॉर्ड खंगालने में जुट गई है।
विस्तृत जांच चल रही
हाईवे में जिस जमीन का अधिग्रहण किया गया, उसके पुराने रिकॉर्ड में रेत-रेगिस्तान की भूमि होने का पता चला। इस मामले की जांच कराई जा रही है। साथ ही मुआवजे पर भी रोक लगा दी गई है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। - अंकित कुमार अग्रवाल, डीएम
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- नवलपुर के गाटा संख्या आठ में गई थी जमीन, 20 से ज्यादा लोगों को मिलना था मुआवजा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। मेरठ-पौड़ी हाईवे के लिए बैराज रोड पर जमीन का अधिग्रहण किया गया था। इसमें 20 से ज्यादा कास्तकारों की जमीन नवलपुर के गाटा संख्या आठ में गई थी। मुआवजे की तैयारी हुई तो यह जमीन पुराने रिकॉर्ड में सरकारी निकली। ऐसे में डीएम ने इस गाटा की जमीन के मुआवजे पर रोक लगा दी है।
बिजनौर-बैराज रोड पर मेरठ-पौड़ी हाईवे का काम शुरू हो रहा है। हाईवे प्रशासन जमीन का अधिग्रहण कर रहा है और किसानों को इसके बदले मुआवजा भी दिया जा रहा है। इसमें ऐसा ही एक मामला बैराज रोड पर नवलपुर के पास गाटा संख्या आठ का सामने आया। इस गाटा के करीब 20 कास्तकारों की 4,994 वर्ग मीटर जमीन हाइवे में गई।
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बात मुआवजे की आई तो तहसील से इसकी जांच हुई। पता चला कि 1359 फसली में इस गाटा की जमीन रेत-रेगिस्तान में दर्ज है। उस समय के लेखपालों और तहसील के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से इसके पट्टे कर दिए गए थे। करीब 30 साल पहले तत्कालीन एडीएम एफआर के यहां से इन पट्टों को निरस्त भी किया गया। लेकिन तहसील के रिकॉर्ड में इस जमीन की श्रेणी नहीं बदली गई।
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जमीन की बढ़ती कीमत देखते हुए बिजनौर के प्रापर्टी डीलर ही नहीं, दिल्ली, मुंबई के कुछ लोग भी यहां जमीन खरीदने लगे। सभी को यह बेशकीमती लग रही थी। अब मामला पता चला तो सबके होश उड़े हुए हैं। डीएम ने इस मामले में इस गाटा का मुआवजा जारी करने पर रोक लगा दी है।
एक हजार बीघा से ज्यादा हो सकता है रकबा
बात अब केवल हाइवे के लिए गई जमीन की नहीं रह गई, बल्कि उस गाटा में एक हजार बीघा से ज्यादा ऐसी जमीन है। जिसे दिल्ली, मुंबई, बिजनौर, मेरठ के प्रापर्टी डीलरों ने काफी महंगे दामों में खरीद लिया था। कुछ हाईवे से मुनाफा कमाने की तैयारी कर रहे थे तो कुछ यहां दुकान, कॉलोनी बनाने का सपना देख रहे थे। प्रशासन ने सर्वे विभाग को इसकी जांच सौंपी है। सर्वे विभाग की टीम इस मामले से संबंधित रिकॉर्ड खंगालने में जुट गई है।
विस्तृत जांच चल रही
हाईवे में जिस जमीन का अधिग्रहण किया गया, उसके पुराने रिकॉर्ड में रेत-रेगिस्तान की भूमि होने का पता चला। इस मामले की जांच कराई जा रही है। साथ ही मुआवजे पर भी रोक लगा दी गई है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। - अंकित कुमार अग्रवाल, डीएम