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जिले में होगी बांस की खेती
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जिले में होगी बांस की खेती
बिजनौर। वन विभाग किसानों को बांस की खेती करने के प्रेरित करेगा। विभाग को अगले वित्तीय वर्ष में छह हेक्टेयर जमीन में बांस की खेती कराने का लक्ष्य दिया गया है। किसान चाहे तो पूरे खेत या चाहे तो खेत की मेढ पर ही बांस की खेती कर सकते हैं। बांस की खेती के लिए विभाग की ओर से सब्सिडी भी दी जाएगी।
जिले में गन्ने की खेती प्रमुखता से की जा रही है। किसानों को गन्ने की खेती से अलग बाकी फसलों की खेती के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। वन विभाग अब किसानों को बांस की खेती के लिए प्रेरित करेगा। विशेषतौर पर गंगा किनारे के खेतों में बांस की खेती कराई जाएगी। बांस का प्रयोग सौंदर्य प्रसाधन बनाने से लेकर दवाई, धूपबत्ती, मिठाई आदि में होता है। बांस की खेती करने से गन्ने की फसल का दबाव कम होगा। अगर खादर में बांस की खेती होती है तो बाढ़ की स्थिति में वह पानी के बहाव को कम करता है और मिट्टी का कटान भी रोकता हैं।
खादर में बांस की खेती किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है। वन विभाग किसानों को बांस की पौध उपलब्ध कराएगा। बांस की पांच सबसे उत्तम प्रजाति की पौध किसानों को उपलब्ध कराई जाएंगी। प्रति हेक्टेयर खेती पर किसानों को अनुदान भी दिया जाएगा। बांस की खेती के बारे में किसानों को पूरी जानकारी भी दी जाएगी। जिले में अब तक बांस की खेती नहीं होती है। लेकिन इसकी खेती की अपार संभावनाएं हैं। बांस की खेती के लिए जिले का वातावरण अनुकूल है।
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बांस की खेती मुनाफे का सौदा
डीएफओ डॉ. एम सेम्मारन के अनुसार किसानों को बांस की खेती करने के लिए जागरूक किया जाएगा। बांस की खेती मुनाफे का सौदा है। किसान चाहे तो केवल खेत की मेढ पर ही बांस की पौध लगा सकता है। किसानों को सरकार की ओर से अनुदान भी दिया जाएगा।
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बिजनौर। वन विभाग किसानों को बांस की खेती करने के प्रेरित करेगा। विभाग को अगले वित्तीय वर्ष में छह हेक्टेयर जमीन में बांस की खेती कराने का लक्ष्य दिया गया है। किसान चाहे तो पूरे खेत या चाहे तो खेत की मेढ पर ही बांस की खेती कर सकते हैं। बांस की खेती के लिए विभाग की ओर से सब्सिडी भी दी जाएगी।
जिले में गन्ने की खेती प्रमुखता से की जा रही है। किसानों को गन्ने की खेती से अलग बाकी फसलों की खेती के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। वन विभाग अब किसानों को बांस की खेती के लिए प्रेरित करेगा। विशेषतौर पर गंगा किनारे के खेतों में बांस की खेती कराई जाएगी। बांस का प्रयोग सौंदर्य प्रसाधन बनाने से लेकर दवाई, धूपबत्ती, मिठाई आदि में होता है। बांस की खेती करने से गन्ने की फसल का दबाव कम होगा। अगर खादर में बांस की खेती होती है तो बाढ़ की स्थिति में वह पानी के बहाव को कम करता है और मिट्टी का कटान भी रोकता हैं।
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खादर में बांस की खेती किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है। वन विभाग किसानों को बांस की पौध उपलब्ध कराएगा। बांस की पांच सबसे उत्तम प्रजाति की पौध किसानों को उपलब्ध कराई जाएंगी। प्रति हेक्टेयर खेती पर किसानों को अनुदान भी दिया जाएगा। बांस की खेती के बारे में किसानों को पूरी जानकारी भी दी जाएगी। जिले में अब तक बांस की खेती नहीं होती है। लेकिन इसकी खेती की अपार संभावनाएं हैं। बांस की खेती के लिए जिले का वातावरण अनुकूल है।
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बांस की खेती मुनाफे का सौदा
डीएफओ डॉ. एम सेम्मारन के अनुसार किसानों को बांस की खेती करने के लिए जागरूक किया जाएगा। बांस की खेती मुनाफे का सौदा है। किसान चाहे तो केवल खेत की मेढ पर ही बांस की पौध लगा सकता है। किसानों को सरकार की ओर से अनुदान भी दिया जाएगा।