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बोर्ड फीस के सवा पांच करोड़ रुपये वापस मांगे
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बोर्ड फीस के सवा पांच करोड़ रुपये वापस मांगे
बिजनौर। शासन ने यूपी बोर्ड की हाईस्कूल, इंटरमीडिएट की परीक्षा निरस्त कर दी है। जिले के 95 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं ने बोर्ड परीक्षा फीस पहले ही जमा कर दी थी। परीक्षा निरस्त होने के बाद परीक्षा फीस के जमा करीब सवा पांच करोड़ रुपये छात्रों को लौटाने की मांग उठने लगी है।
यूपी बोर्ड की हाईस्कूल की परीक्षा कोरोना के कारण निरस्त हो गई है। जिले के 387 विद्यालयों में हाईस्कूल परीक्षा में 51,560 तथा इंटरमीडिएट परीक्षा में 44,171 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे। हाईस्कूल परीक्षा की बोर्ड फीस 501 रुपये और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा फीस 601 रुपये है। इस प्रकार हाईस्कूल के पंजीकृत छात्रों की फीस 25 लाख 83 हजार 1560 रुपये और इंटर के पंजीकृत छात्रों की फीस 26 लाख 54 हजार 6771 रुपये बैठती है। विद्यालयों ने दोनों की कुल फीस 05 करोड़ 23 लाख 78331 रुपये पहले ही जमा कर दी थी। बताया गया कि यूपी बोर्ड स्कूलों में अधिकांश संख्या ग्रामीण छात्रों के है। कोरोना के पहले चरण के कारण आर्थिक तंगी से जूझ रहे अभिभावकों ने फीस कई बार कहने के बाद जमा की थी। यहां तक कि बोर्ड को भी फीस के लिए बार बार तारीख बढ़ानी पड़ी थी। अभिभावकों ने पैसे का इंतजाम नहीं होने की बात कहकर फीस जमा करने में काफी परेशान किया था।
अभिभावकों का कहना है कि परीक्षा निरस्त हो गई है। बोर्ड उनके बच्चों की जमा फीस वापस करे। ऐसे काफी अभिभावक होंगे जिनके दो-दो बच्चे भी हों। उनके लिए 1000 रुपये की धनराशि काफी कीमत है। अभिभावक संघ के जिलाध्यक्ष नृपेंद्र देशवाल का कहना है कि यूपी बोर्ड छात्रों की फीस तुरंत वापस करे। यदि बोर्ड का कुछ खर्च हो भी गया है तो शासन अपने स्तर से एडजस्ट करें। एडवोकेट गौरव भारद्वाज का कहना है कि ग्रामीण अभिभावकों के लिए 500 या 600 रुपये बड़ी रकम होती है। छात्रों की फीस वापसी की प्रक्रिया तुरंत शुरू हो। फीस छात्रों के बैंक खातों में भेजी जाए। अंशु खन्ना का कहना है कि कोरोना ने लोगों को बेरोजगार कर दिया है। ग्रामीण अभिभावकों ने किसी तरह जोड़ तोड़ करके फीस जमा की है। फीस में कोई कटौती नहीं होनी चाहिए। पूरी फीस जल्द वापस हो।
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बिजनौर। शासन ने यूपी बोर्ड की हाईस्कूल, इंटरमीडिएट की परीक्षा निरस्त कर दी है। जिले के 95 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं ने बोर्ड परीक्षा फीस पहले ही जमा कर दी थी। परीक्षा निरस्त होने के बाद परीक्षा फीस के जमा करीब सवा पांच करोड़ रुपये छात्रों को लौटाने की मांग उठने लगी है।
यूपी बोर्ड की हाईस्कूल की परीक्षा कोरोना के कारण निरस्त हो गई है। जिले के 387 विद्यालयों में हाईस्कूल परीक्षा में 51,560 तथा इंटरमीडिएट परीक्षा में 44,171 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे। हाईस्कूल परीक्षा की बोर्ड फीस 501 रुपये और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा फीस 601 रुपये है। इस प्रकार हाईस्कूल के पंजीकृत छात्रों की फीस 25 लाख 83 हजार 1560 रुपये और इंटर के पंजीकृत छात्रों की फीस 26 लाख 54 हजार 6771 रुपये बैठती है। विद्यालयों ने दोनों की कुल फीस 05 करोड़ 23 लाख 78331 रुपये पहले ही जमा कर दी थी। बताया गया कि यूपी बोर्ड स्कूलों में अधिकांश संख्या ग्रामीण छात्रों के है। कोरोना के पहले चरण के कारण आर्थिक तंगी से जूझ रहे अभिभावकों ने फीस कई बार कहने के बाद जमा की थी। यहां तक कि बोर्ड को भी फीस के लिए बार बार तारीख बढ़ानी पड़ी थी। अभिभावकों ने पैसे का इंतजाम नहीं होने की बात कहकर फीस जमा करने में काफी परेशान किया था।
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अभिभावकों का कहना है कि परीक्षा निरस्त हो गई है। बोर्ड उनके बच्चों की जमा फीस वापस करे। ऐसे काफी अभिभावक होंगे जिनके दो-दो बच्चे भी हों। उनके लिए 1000 रुपये की धनराशि काफी कीमत है। अभिभावक संघ के जिलाध्यक्ष नृपेंद्र देशवाल का कहना है कि यूपी बोर्ड छात्रों की फीस तुरंत वापस करे। यदि बोर्ड का कुछ खर्च हो भी गया है तो शासन अपने स्तर से एडजस्ट करें। एडवोकेट गौरव भारद्वाज का कहना है कि ग्रामीण अभिभावकों के लिए 500 या 600 रुपये बड़ी रकम होती है। छात्रों की फीस वापसी की प्रक्रिया तुरंत शुरू हो। फीस छात्रों के बैंक खातों में भेजी जाए। अंशु खन्ना का कहना है कि कोरोना ने लोगों को बेरोजगार कर दिया है। ग्रामीण अभिभावकों ने किसी तरह जोड़ तोड़ करके फीस जमा की है। फीस में कोई कटौती नहीं होनी चाहिए। पूरी फीस जल्द वापस हो।
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