एक्सक्लूसिव: चीनी मिलों ने किया बड़ा खेल, जिले में बनाई, फिर बेच दी दूसरी मिलों के नाम से
उत्तर प्रदेश के बिजनौर में उत्तम और धामपुर चीनी मिल ग्रुप ने रॉ शुगर (कच्ची चीनी) से चीनी तो जिले की इकाइयों में बनाई, लेकिन उसे ग्रुप की दूसरी मिलों के नाम से बेच दिया। केंद्र सरकार से मिलने वाली सब्सिडी भी दूसरी चीनी मिलों को ही मिली और गन्ना मूल्य भुगतान बिजनौर के किसानों का लटक गया।
चीनी मिलों को रॉ शुगर बनाकर निर्यात करने का कोटा दिया जाता है। इसी कोटे के आधार पर ही केंद्र सरकार मिलों को सब्सिडी देती है। पेराई सत्र 2019-20 में इस रकम से किसानों को गन्ना मूल्य भुगतान करना था। जिले की उत्तम ग्रुप की बरकातपुर चीनी मिल की निर्यात सब्सिडी लिब्बरहेड़ी, खाईखेड़ी और शेरमऊ चीनी मिल को प्राप्त हुई। इसी तरह धामपुर चीनी मिल की सब्सिडी मंसूरपुर और असमौली चीनी मिल को प्राप्त हुई है। जिला गन्ना अधिकारी ने लखनऊ से रिपोर्ट मंगवाकर मामले की जांच कराई तो इस खेल का खुलासा हुआ है। मामला सामने आने के बाद अब डीएम रमाकांत पांडेय ने मिलों के अध्यासी/प्रधान प्रबंधकों को दूसरी चीनी मिलों से सब्सिडी की रकम को जिले की मिलों को देने को कहा है। जिला गन्ना अधिकारी ने यशपाल सिंह डीएम कार्यालय से नोटिस जारी होने की पुष्टि की है।
केंद्र सरकार ने किसानों के बढ़ते बकाया गन्ना मूल्य, अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी के कम दाम को देखते हुए निर्यात सब्सिडी दी थी, जिससे मिलों की चीनी भी बिक जाए और उस रकम से किसानों को गन्ना मूल्य भुगतान भी हो जाए, लेकिन चीनी मिलों के प्रबंधन ने कच्ची चीनी (रॉ शुगर) के कोटे में ही खेल कर दिया। चीनी मिल ग्रुप को तो इसका लाभ मिला, लेकिन जिले के किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पाया। जिलाधिकारी रमाकांड पांडेय ने इसे टैगिंग आदेश का उल्लंघन मानते हुए चीनी मिलों को नोटिस जारी किया है। साथ ही दूसरी चीनी मिलों से रिकवरी करके सब्सिडी की रकम जिले की मिलों को देने को कहा है।
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नोटिस में जिलाधिकारी ने उत्तर ग्रुप की बरकातपुर चीनी मिल के अध्यासी से ग्रुप की अन्य मिलों लिब्बरहेडी हरिद्वार (उत्तराखंड) से 17.93 करोड़, मुजफ्फरनगर जिले की खाईखेड़ी से 14.62 करोड़, सहारनपुर जिले की शेरमऊ चीनी मिल से 11.07 करोड़ रुपये की सब्सिडी वापस मंगाने को कहा है। इसी तरह धामपुर चीनी मिल के अध्यासी से ग्रुप की अन्य चीनी मिलों मंसूरपुर मुजफ्फरनगर चीनी मिल से 40.51 करोड़ रुपये, असमौली से 3.53 करोड़ रुपये वापस मंगाने को कहा है। यह सब्सिडी की कुल रकम करीब 74 करोड़ रुपये वापस मंगाने को कहा है। साथ ही इसका भुगतान गन्ना मूल्य भुगतान करने को कहा गया है। टैगिंग आदेश के अनुसार चीनी बिक्री की प्राप्त रकम से प्राथमिकता के साथ किसानों को गन्ना मूल्य का भुगतान किया जाना चाहिए।
किसान आंदोलन का दिया हवाला
जिलाधिकारी ने दोनों मिलों को भुगतान के लिए किसानों के आंदोलन का हवाला दिया है और कहा है कि किसान आए दिन गन्ना भुगतान के लिए आंदोलन करते रहते हैं। इससे जिले की कानून व्यवस्था भी प्रभावित होती है। मिल अफसरों को तुरंत भुगतान के लिए कहा गया है।
जिसने बनाई रॉ शुगर, उसे ही मिले सब्सिडी
जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह के अनुसार दोनों ग्रुप के अफसरों को डीएम कार्यालय से नोटिस जारी किए गए हैं। जिस मिल ने रॉ शुगर बनाई है उसे ही सब्सिडी दिलानी चाहिए थी। इस संबंध में डीएम कार्यालय से नोटिस जारी किया गया है।
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