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अमर उजाला अभियान : टेक्नीशियन नहीं, धूल फांक रहीं एक्स-रे मशीन
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बिजनौर जिला अस्पताल में टेक्नीशियन न होने से शोपीस बनी एक्स-रे मशीन।
- फोटो : BIJNOR
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अमर उजाला अभियान : टेक्नीशियन नहीं, धूल फांक रहीं एक्स-रे मशीन
बिजनौर। जिला अस्पताल में संसाधन तो हैं, लेकिन उन्हें चलाने के लिए टेक्नीशियन नहीं हैं। जिला अस्पताल में तीन एक्स-रे और एक अल्ट्रासाउंड मशीन है, लेकिन इन मशीनों को चलाने के लिए सिर्फ एक टेक्नीशियन है। टेक्नीशियन न होने से एक्स-रे मशीन धूल फांक रही हैं। पीकू वार्ड में भी अभी तक बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हुई है।
जिला अस्पताल में डॉक्टरों, टेक्नीशियन और कर्मचारियों का टोटा है। जिसकी वजह लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। टेक्नीशियन न होने की वजह से जिला अस्पताल के संसाधन धूल फांक रहे हैं। एक एक्स-रे मशीन के लिए टेक्नीशियन सहित तीन लोगों की जरूरत होती है, लेकिन जिला अस्पताल में तीन एक्स-रे मशीन और एक अल्ट्रासाउंड मशीन पर सिर्फ तीन लोगों का ही स्टाफ काम कर रहा है। एक्स-रे मशीन की कीमत एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक है। स्टाफ कम होने से लोगों को काफी परेशानी हो रही है। यही वजह है कि एक्स-रे मशीनों से कोई काम नहीं लिया जा रहा है।
टेक्नीशियन प्रशिक्षण लेकर चला रहे वेंटिलेटर
जिला अस्पताल में 17 वेंटिलेटर हैं, लेकिन इनको चलाने के लिए एनेस्थेटिस्ट नहीं है। जिला अस्पताल में बीते पांच सालों से कोई एनेस्थेटिस्ट नहीं है। वेंटिलेटर को एनेस्थेटिस्ट की जगह टेक्नीशियन को प्रशिक्षित कर चलवाया जा रहा है। जिला अस्पताल में बच्चों के इलाज के लिए पीकू वार्ड तो है, लेकिन बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। जिसके चलते लोग बीमार बच्चे को निजी अस्पतालों में भर्ती करा रहे हैं। कोरोना काल में बच्चों के इलाज के लिए जिला अस्पताल में पीकू वार्ड बनाया गया था।
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शासन को भेजा जा चुका है पत्र : सीएमएस
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. अरुण कुमार पांडेय ने बताया कि जिला अस्पताल में चिकित्सक, टेक्नीशियन और अन्य स्टाफ की कमी है। इसके लिए शासन को कई बार पत्र भेजा जा चुका है, लेकिन अभी तक जिला अस्पताल में खाली पद नहीं भरे गए हैं।
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बिजनौर। जिला अस्पताल में संसाधन तो हैं, लेकिन उन्हें चलाने के लिए टेक्नीशियन नहीं हैं। जिला अस्पताल में तीन एक्स-रे और एक अल्ट्रासाउंड मशीन है, लेकिन इन मशीनों को चलाने के लिए सिर्फ एक टेक्नीशियन है। टेक्नीशियन न होने से एक्स-रे मशीन धूल फांक रही हैं। पीकू वार्ड में भी अभी तक बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हुई है।
जिला अस्पताल में डॉक्टरों, टेक्नीशियन और कर्मचारियों का टोटा है। जिसकी वजह लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। टेक्नीशियन न होने की वजह से जिला अस्पताल के संसाधन धूल फांक रहे हैं। एक एक्स-रे मशीन के लिए टेक्नीशियन सहित तीन लोगों की जरूरत होती है, लेकिन जिला अस्पताल में तीन एक्स-रे मशीन और एक अल्ट्रासाउंड मशीन पर सिर्फ तीन लोगों का ही स्टाफ काम कर रहा है। एक्स-रे मशीन की कीमत एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक है। स्टाफ कम होने से लोगों को काफी परेशानी हो रही है। यही वजह है कि एक्स-रे मशीनों से कोई काम नहीं लिया जा रहा है।
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टेक्नीशियन प्रशिक्षण लेकर चला रहे वेंटिलेटर
जिला अस्पताल में 17 वेंटिलेटर हैं, लेकिन इनको चलाने के लिए एनेस्थेटिस्ट नहीं है। जिला अस्पताल में बीते पांच सालों से कोई एनेस्थेटिस्ट नहीं है। वेंटिलेटर को एनेस्थेटिस्ट की जगह टेक्नीशियन को प्रशिक्षित कर चलवाया जा रहा है। जिला अस्पताल में बच्चों के इलाज के लिए पीकू वार्ड तो है, लेकिन बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। जिसके चलते लोग बीमार बच्चे को निजी अस्पतालों में भर्ती करा रहे हैं। कोरोना काल में बच्चों के इलाज के लिए जिला अस्पताल में पीकू वार्ड बनाया गया था।
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शासन को भेजा जा चुका है पत्र : सीएमएस
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. अरुण कुमार पांडेय ने बताया कि जिला अस्पताल में चिकित्सक, टेक्नीशियन और अन्य स्टाफ की कमी है। इसके लिए शासन को कई बार पत्र भेजा जा चुका है, लेकिन अभी तक जिला अस्पताल में खाली पद नहीं भरे गए हैं।