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अमर उजाला अभियान : स्वास्थ्य केंद्रों पर नहीं डाक्टर, मरीज हो रहे रेफर

Sun, 08 May 2022 11:51 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 08 May 2022 11:51 PM IST
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Amar Ujala Abhiyan: Doctors not at health centers, patients are being referred
बिजनौर जिला अस्पताल की इमरजेंसी में मरीज को देखते चिकित्सक। - फोटो : BIJNOR
बिजनौर। जिले के सभी सीएचसी और पीएचसी रेफर सेंटर बनकर रह गए हैं। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में रोजाना करीब 100 मरीज आ रहे हैं। जिनमें से करीब 50 मरीज रेफर होकर आते हैं। इसका कारण सीएचसी और पीएचसी पर चिकित्सकों की कमी है। जब चिकित्सक ही नहीं हैं, तो इलाज कौन करेगा। वहीं जिला अस्पताल से भी रोजाना दो से तीन मरीज मेरठ मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर हो रहे हैं।
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जिले में मुख्य चिकित्साधिकारी के अधीन जिले के सभी अस्पतालों में चिकित्सकों के 178 पद हैं, जिनमें से 94 पद खाली चल रहे हैं। जिन सीएचसी और पीएचसी पर चिकित्सक नहीं हैं, वहां फार्मेसिस्ट मरीजों का इलाज कर रहे हैं। जिले के अस्पतालों में काफी समय से चिकित्सकों के पद खाली हैं, जिन पर अभी तक नियुक्ति नहीं हुई है। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में सीएचसी और पीएचसी से रोजाना 50 मरीज रेफर होकर आते हैं। इन मरीजों में ज्यादातर झगड़े वाले मरीज, दुघर्टना के मरीज, सांस के मरीज होते हैं। इसके साथ ही दिल के मरीज को भी जिला अस्पताल रेफर किया जाता है, लेकिन यहां भी चिकित्सक न होने से मेरठ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है।
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एडिशनल पीएचसी बुढ़नपुर पर फार्मेसिस्ट कर रहे इलाज: डॉ. संजय
स्योहारा सीएचसी के चिकित्साधिकारी डॉ. संजय ने बताया एडिशनल पीएचसी बुढ़नपुर में करीब एक साल पहले चिकित्सक का ट्रांसफर हो गया था। जिसके बाद से यहां किसी चिकित्सक की नियुक्ति नहीं की गई है। फार्मेसिस्ट ही यहां मरीजों का इलाज कर रहा है। जिले में कई एडिशनल पीएचसी पर फार्मेसिस्टों से ही काम चलाया जा रहा है।
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मेरठ रेफर होते हैं गंभीर बीमारी के मरीज
वहीं जिला अस्पताल से रोजाना दो से तीन मरीज मेरठ मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर किए जाते हैं। जिला अस्पताल से हेड इंजरी, दिल के मरीज, गंभीर जहर के मरीज मेरठ मेडिकल कॉलेज रेफर होते हैं। क्योंकि जिला अस्पताल में भी चिकित्सकों का टोटा है।
स्योहारा सीएचसी पर नहीं सर्जन की तैनाती
स्योहारा सीएचसी पर आसपास के 50 से ज्यादा गांवों के मरीज इलाज कराने आते हैं। लेकिन यहां सर्जन की व्यवस्था नहीं है। जिसके चलते दुघर्टना होने पर मरीज को सीधे जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। इसके साथ ही सीएचसी, पीएचसी पर गंभीर बीमारियों का इलाज नहीं किया जाता है।

जिलेभर के अस्पतालों में ये हैं खाली पद
जिले में 11 सीएचसी और 11 पीएचसी और 45 एडिशनल पीएचसी हैं। इसके साथ ही जिले में उपकेंद्रों की संख्या 443 है। इन पर चिकित्सक से लेकर एनएएम तक के पद खाली हैं। फार्मेसिस्ट के कुल पद 93 हैं, जिनमें से एक पद खाली है। इसके साथ ही जिलेभर के अस्पतालों में स्टॉफ नर्स के कुल 38 पद हैं, जिनमें से 18 पद खाली हैं। वहीं एएनएम के जिले में 398 पद हैं, जिनमें से 201 पद खाली हैं।
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