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Bijnor News: अकूरन ने निभाया पिता का वचन, भरा भाईचारे का भात
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बिजनौर में नवाब का अहाता में भात की रस्म निभातीं अकूरन व अकबरी और उनकी आरती उतारती ब्रजेश देवी
विनीत कुमार
बरूकी (बिजनौर)। नजीबाबाद क्षेत्र के गांव गाजीपुर कुतुब में जन्मीं अकूरन ने अपने पिता का वचन निभाने के लिए भतीजी अकबरी और परिवार के अन्य महिला-पुरुष सदस्यों के साथ ब्रजेश देवी पत्नी सोमपाल सिंह के बेटे शैंकी के विवाह में भात भरा। ब्रजेश देवी ने घर की दहलीज पर उनकी आरती उतारी। दिन में भात की रस्म निभाने के बाद शाम को सभी ने अपने घर पहुंचकर रोजा इफ्तारी की।
बिजनौर के मोहल्ला नवाब का अहाता में रहने वाले सोमपाल सिंह गांव शादीपुर के रहने वाले हैं। उनकी पत्नी ब्रजेश देवी का मायका ग्राम गाजीपुर कुतुब का है। ब्रजेश देवी का कोई भाई नहीं है। पिता चतर सिंह की गांव के ही अल्लादिया से गहरी दोस्ती थी। कई साल पहले दोनों की मौत हो चुकी है। अपने जीवित रहते दोनों दोस्त अपने परिवार के सदस्यों से कह गए थे कि आपसी संबंधों को आगे भी बरकरार रखें।
बृहस्पतिवार को ब्रजेश देवी के पुत्र शैंकी का विवाह था। पिता की बात का मान रखते हुए अल्लादिया की पुत्री अकूरन अपनी भतीजी अकबरी, भतीजे शाकिब व परिवार की अन्य महिलाओं के साथ भात की रस्म निभाने पहुंची। घर की दहलीज पर ब्रजेश देवी ने उनकी आरती उतारी। भात में उन्होंने परिजनों को कपड़े और नकदी दी। कार्यक्रम में आए सभी सदस्यों का रोजा था इसलिए दिन में उन्होंने यहां कुछ नहीं खाया-पिया।
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बरूकी (बिजनौर)। नजीबाबाद क्षेत्र के गांव गाजीपुर कुतुब में जन्मीं अकूरन ने अपने पिता का वचन निभाने के लिए भतीजी अकबरी और परिवार के अन्य महिला-पुरुष सदस्यों के साथ ब्रजेश देवी पत्नी सोमपाल सिंह के बेटे शैंकी के विवाह में भात भरा। ब्रजेश देवी ने घर की दहलीज पर उनकी आरती उतारी। दिन में भात की रस्म निभाने के बाद शाम को सभी ने अपने घर पहुंचकर रोजा इफ्तारी की।
बिजनौर के मोहल्ला नवाब का अहाता में रहने वाले सोमपाल सिंह गांव शादीपुर के रहने वाले हैं। उनकी पत्नी ब्रजेश देवी का मायका ग्राम गाजीपुर कुतुब का है। ब्रजेश देवी का कोई भाई नहीं है। पिता चतर सिंह की गांव के ही अल्लादिया से गहरी दोस्ती थी। कई साल पहले दोनों की मौत हो चुकी है। अपने जीवित रहते दोनों दोस्त अपने परिवार के सदस्यों से कह गए थे कि आपसी संबंधों को आगे भी बरकरार रखें।
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बृहस्पतिवार को ब्रजेश देवी के पुत्र शैंकी का विवाह था। पिता की बात का मान रखते हुए अल्लादिया की पुत्री अकूरन अपनी भतीजी अकबरी, भतीजे शाकिब व परिवार की अन्य महिलाओं के साथ भात की रस्म निभाने पहुंची। घर की दहलीज पर ब्रजेश देवी ने उनकी आरती उतारी। भात में उन्होंने परिजनों को कपड़े और नकदी दी। कार्यक्रम में आए सभी सदस्यों का रोजा था इसलिए दिन में उन्होंने यहां कुछ नहीं खाया-पिया।
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