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माध्यमिक विद्यालयों कम हो रहे दाखिले, अभिभावकों को कोरोना की तीसरी लहर का डर
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माध्यमिक विद्यालयों कम हो रहे दाखिले, अभिभावकों को कोरोना की तीसरी लहर का डर
बिजनौर। माध्यमिक विद्यालयों के दाखिले में कोरोना की तीसरी लहर की संभावनाओं ने ब्रेक लगा दिया है। स्कूलों में दाखिला लेने आने वाले छात्रों की संख्या कम हो गई है। अभिभावक कोरोना की तीसरी लहर की संभावनाओं से डरे हुए हैं। वहीं, स्कूलों मे कम दाखिलों का असर वित्त विहीन शिक्षकों पर है। छात्रों की कम संख्या के कारण शिक्षकों को नौकरी जाने का डर सता रहा है।
माध्यमिक विद्यालयों का शैक्षणिक सत्र एक अप्रैल से शुरू होता है। परंतु कोरोना के कारण स्कूल बंद हैं। शासन ने स्कूलों को एक जुलाई से छात्रों के अगली कक्षाओं में दाखिलों के लिए खोल दिया है। शिक्षक स्कूल आ रहे हैं। स्कूलों से मिल रही सूचनाओं के अनुसार कक्षा छह, सात आठ व नौ में दाखिले हो रहे हैं। बोर्ड ने दसवीं का परिणाम घोषित नहीं किया है। इसलिए कक्षा 11 में दाखिले नहीं हो रहे हैं। बताया गया कि शुरू में दाखिलों की रफ्तार बहुत कम थी। कोरोना धीरे-धीरे कम हो रहा है। इसलिए 15 जुलाई के बाद दाखिलों की रफ्तार बढ़ने की संभावना थी। परंतु कोरोना की तीसरी लहर अगस्त में आने की खबरों ने छात्रों के दाखिलों पर ब्रेक लगा दिया है।
छात्रों के इक्का-दुक्का अभिभावक ही दाखिला कराने आए रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में छात्रों के दाखिलों की स्थिति बहुत खराब है। वित्त विहीन स्कूलों के शिक्षक छात्रों के दाखिले कम होने से अपनी नौकरी को लेकर चिंतित हैं। इन शिक्षकों की तनख्वाह छात्रों की आई फीस से मिलती है। अनेक शिक्षक कोरोना के पहले चरण में नौकरी गंवा चुके हैं। स्कूलों संचालकों का कहना है कि वित्त विहीन स्कूलों में कोई अन्य आर्थिक श्रोत नहीं है।
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अभिभावक ऑनलाइन पढ़ाई से असंतुष्ट
अभिभावक मोहम्मद आसिफ, जगवीर सिंह, नितेंद्र आदि का कहना है कि स्कूलों में पढ़ाई बंद हैं। ऑनलाइन पढ़ाई हो नहीं रही है। छात्र व्हाट्स ऐप ग्रुप से जुड़ नहीं रहे हैं। अगस्त में कोरोना की तीसरी लहर आने की संभावना जताई जा रही है। स्कूलों के पढ़ाई के लिए जल्द खुलने की कोई संभावना दिख नहीं रही है। ऐसे में दाखिले कराने का क्या फायदा है। जब स्थिति सामान्य हो जाएगी दाखिला करा देंगे। पहले जीवन सुरक्षित रखना है पढ़ाई बाद में है।
वित्त विहीन स्कूलों को आर्थिक पैकेज मिले
वित्त विहीन स्कूलों के शिक्षक जितेंद्र कुमार, अजब सिंह का कहना है कि वित्त विहीन स्कूलों को बंद होने से बचाने व इन स्कूलों के शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित रखने के लिए शासन विशेष आर्थिक पैकेज दे। शिक्षकों को पिछले छह माह से वेतन नहीं मिला है। शासन ने कोरोना काल में हर वर्ग की मदद की है। बताया कि जनप्रतिनिधियों के समक्ष आर्थिक पैकेज देने का मामला उठाया जा चुका है। वहीं, डीआईओएस राजेश कुमार का कहना है कि शासन के निर्देशों के अनुपालन में एक जुलाई से माध्यमिक विद्यालयों में दाखिले हो रहे हैं। जल्द हाईस्कूल का रिजल्ट घोषित होने जा रहा है। इसके बाद दाखिलों में तेजी आएगी।
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बिजनौर। माध्यमिक विद्यालयों के दाखिले में कोरोना की तीसरी लहर की संभावनाओं ने ब्रेक लगा दिया है। स्कूलों में दाखिला लेने आने वाले छात्रों की संख्या कम हो गई है। अभिभावक कोरोना की तीसरी लहर की संभावनाओं से डरे हुए हैं। वहीं, स्कूलों मे कम दाखिलों का असर वित्त विहीन शिक्षकों पर है। छात्रों की कम संख्या के कारण शिक्षकों को नौकरी जाने का डर सता रहा है।
माध्यमिक विद्यालयों का शैक्षणिक सत्र एक अप्रैल से शुरू होता है। परंतु कोरोना के कारण स्कूल बंद हैं। शासन ने स्कूलों को एक जुलाई से छात्रों के अगली कक्षाओं में दाखिलों के लिए खोल दिया है। शिक्षक स्कूल आ रहे हैं। स्कूलों से मिल रही सूचनाओं के अनुसार कक्षा छह, सात आठ व नौ में दाखिले हो रहे हैं। बोर्ड ने दसवीं का परिणाम घोषित नहीं किया है। इसलिए कक्षा 11 में दाखिले नहीं हो रहे हैं। बताया गया कि शुरू में दाखिलों की रफ्तार बहुत कम थी। कोरोना धीरे-धीरे कम हो रहा है। इसलिए 15 जुलाई के बाद दाखिलों की रफ्तार बढ़ने की संभावना थी। परंतु कोरोना की तीसरी लहर अगस्त में आने की खबरों ने छात्रों के दाखिलों पर ब्रेक लगा दिया है।
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छात्रों के इक्का-दुक्का अभिभावक ही दाखिला कराने आए रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में छात्रों के दाखिलों की स्थिति बहुत खराब है। वित्त विहीन स्कूलों के शिक्षक छात्रों के दाखिले कम होने से अपनी नौकरी को लेकर चिंतित हैं। इन शिक्षकों की तनख्वाह छात्रों की आई फीस से मिलती है। अनेक शिक्षक कोरोना के पहले चरण में नौकरी गंवा चुके हैं। स्कूलों संचालकों का कहना है कि वित्त विहीन स्कूलों में कोई अन्य आर्थिक श्रोत नहीं है।
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अभिभावक ऑनलाइन पढ़ाई से असंतुष्ट
अभिभावक मोहम्मद आसिफ, जगवीर सिंह, नितेंद्र आदि का कहना है कि स्कूलों में पढ़ाई बंद हैं। ऑनलाइन पढ़ाई हो नहीं रही है। छात्र व्हाट्स ऐप ग्रुप से जुड़ नहीं रहे हैं। अगस्त में कोरोना की तीसरी लहर आने की संभावना जताई जा रही है। स्कूलों के पढ़ाई के लिए जल्द खुलने की कोई संभावना दिख नहीं रही है। ऐसे में दाखिले कराने का क्या फायदा है। जब स्थिति सामान्य हो जाएगी दाखिला करा देंगे। पहले जीवन सुरक्षित रखना है पढ़ाई बाद में है।
वित्त विहीन स्कूलों को आर्थिक पैकेज मिले
वित्त विहीन स्कूलों के शिक्षक जितेंद्र कुमार, अजब सिंह का कहना है कि वित्त विहीन स्कूलों को बंद होने से बचाने व इन स्कूलों के शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित रखने के लिए शासन विशेष आर्थिक पैकेज दे। शिक्षकों को पिछले छह माह से वेतन नहीं मिला है। शासन ने कोरोना काल में हर वर्ग की मदद की है। बताया कि जनप्रतिनिधियों के समक्ष आर्थिक पैकेज देने का मामला उठाया जा चुका है। वहीं, डीआईओएस राजेश कुमार का कहना है कि शासन के निर्देशों के अनुपालन में एक जुलाई से माध्यमिक विद्यालयों में दाखिले हो रहे हैं। जल्द हाईस्कूल का रिजल्ट घोषित होने जा रहा है। इसके बाद दाखिलों में तेजी आएगी।