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महिलाओं की सुरक्षा के लिए बने ठोस नीति

Thu, 08 Oct 2020 12:03 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 08 Oct 2020 12:03 AM IST
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A solid policy made for the protection of women
बिजनौर में अमर उजाला के अपराजिता के वेबीनार में भाग लेती युवतियां और महिलाएं। - फोटो : BIJNOR
बिजनौर। अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता अभियान के अंतर्गत आयोजित वेबिनार में महिलाओं ने बलात्कार के मामलों में राजनीति नहीं करने की मांग की।
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उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की सदस्य डा. रचना पाल ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए ठोस नीति बनाने की आवश्यकता है। पुलिस पर किसी प्रकार का राजनीतिक दबाव नहीं होना चाहिए। यदि आरोपी दोषी करार दिए जाते हैं तब उन्हें फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से जल्द से जल्द सजा मिलनी चाहिए।
आरआर मोरारका पब्लिक स्कूल की शिक्षिका रजनी शर्मा ने कहा कि जहां महिलाएं सुरक्षित हैं वहां मानवता सुरक्षित है। बच्चों में नैतिक और चारित्रिक गुणों का अभाव है। हमें शुरुआत से ही बच्चों में संस्कार डालने की आवश्यकता है।
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प्रसिद्ध गायिका आकांक्षा मित्तल का मानना है कि कई बार न्याय में विलंब भी ऐसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार है। इसके अतिरिक्त लंबी कानूनी लड़ाई में पीड़िता का परिवार भी मानसिक और आर्थिक तनाव झेलता है। ऐसे मामलों में तुरंत निर्णय आना चाहिए ।
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ग्राम शादीपुर की पूर्व प्रधान संतोष रानी ने कहा कि नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म करके उसे मौत के घाट उतार दिया जाता है, ऐसे प्रकरण में कई बार दुष्कर्मी को नाबालिग बताकर छोड़ दिया जाता है। सरकार को नाबालिग के विरुद्ध भी बालिग दुष्कर्मी जैसा ही दंड का प्रावधान करना चाहिए।
शिक्षिका पूजा रानी का कहना है कि हाथरस प्रकरण में पुलिस की भूमिका संदिग्ध रही। शुरुआत में आरोपियों पर समुचित कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद माता-पिता की मर्जी के विरुद्ध पीड़िता का अंतिम संस्कार कर दिया गया। यदि पुलिस समुचित स्तर पर कार्रवाई करे तो ऐसे मामले रोके जा सकते हैं।

शिक्षिका रिंशी दहिया का कहना है कि कई बार सामाजिक प्रतिष्ठा के चलते ऐसी घटनाओं को दबा दिया जाता है। परिजन और समाज भी बदनामी के डर से कार्रवाई नहीं कर पाते। इससे अपराधियों के हौसले बुलंद होते हैं। महिलाओं के विरुद्ध होने वाली प्रत्येक घटना की प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए।
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