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महापुरुषों के नाम पर बनेगा नया सिटी फॉरेस्ट
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महापुरुषों के नाम पर बनेगा नया सिटी फॉरेस्ट
रजनीश त्यागी
बिजनौर। जिले को पर्यटन के क्षेत्र में नाम दिलाने के लिए प्रशासन एक कदम और आगे बढ़ाने जा रहा है। गंगा किनारे एक नया सिटी फॉरेस्ट बसाने और उसके अलग-अलग हिस्सों के नाम राजा दुष्यंत, शकुंतला, महाराजा भरत, कण्व ऋषि के नाम पर रखने की तैयारी भी चल रही है। पुरुषोत्तमपुर में करीब 1100 बीघा और रावली क्षेत्र में करीब 600 बीघा जमीन पर एक लाख 85 हजार पौधे लगाए जाने हैं। इस जमीन के काफी बड़े हिस्से पर पिछले साल तक माफिया खेती कर रहे थे, जिसे प्रशासन ने कब्जा मुक्त करा लिया था।
प्रशासन ने जिले को पर्यटन के क्षेत्र में आगे ले जाने की योजना पर युद्ध स्तर पर काम शुरू कर दिया है। जहां एक ओर सभी ऐतिहासिक, पौराणाकि, सांस्कृतिक, प्राकृतिक स्थलों की जानकारी एक मंच पर एकत्रित की जाएगी। अगली कड़ी में बात करें तो रावली में कण्व ऋषि आश्रम है। कालीदास का महाकाव्य अभिज्ञान शाकुंतलम इस बात का सबसे बड़ा सबूत माना जाता है कि राजा दुष्यंत और शकुंतला की प्रणय स्थली बिजनौर में गंगा और मालन के मिलन के आसपास का क्षेत्र था। वहीं, राजा भरत को कण्व ऋषि के आश्रम में ही राजा दुष्यंत ने शेर के शावक के दांत गिनते हुए देखा था। अब इसे दुर्भाग्य कहें कि उदासीनता, यह सभी पौराणिक तथ्य होने के बावजूद कण्व ऋषि आश्रम को उत्तराखंड में दर्ज कराते हुए विकसित कर दिया गया। हाल ही में जिले के इतिहासकारों से बातचीत के बाद प्रशासन इसे भी विकसित करने की तैयारी कर रहा है। (संवाद)
कटान में बह गया पुराना सिटी फॉरेस्ट
रावली तटबंध से सटा एक सिटी फॉरेस्ट तत्कालीन डीएम परमेश्वरन अय्यर ने लगवाया था। यहां पर करीब 600 बीघा से ज्यादा जमीन में 1990 के दशक में लाखों की संख्या में पौधे लगाए गए थे। जिले भरे के स्कूलों के बच्चों ने पौधरोपण किया था। यह सिटी फॉरेस्ट विकसित हआ तो लोग घूमने भी जाते थे। लेकिन गंगा कटान और कटान रोकने के प्रबंध न होने के कारण पूरा सिटी फॉरेस्ट गंगा के कटान में बह गया।
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बाढ़ का पानी उतरने के बाद पौधरोपण : ज्वाइंट मजिस्ट्रेट
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एवं एसडीएम विक्रमादित्य सिंह मलिक ने कहा कि हमने अपने क्षेत्र में पुरूषोत्तमपुर में करीब 1100 बीघा, रावली क्षेत्र में करीब 600 बीघा जमीन को पौधरोपण के लिए चिह्नित किया है। यहां पर करीब एक लाख 85 हजार पौधे लगाए जाने का लक्ष्य रखा गया है। हमने पौधरोपण के लिए जमीन उपलब्ध होने की रिपोर्ट भेज दी है।
महापुरुषों के नाम पर होगा नाम: डीएम
डीएम उमेश मिश्रा ने कहा कि गंगा किनारे पौधरोपण के लिए जमीन खाली होने का पता चला है। यहां पर पहले पौधरोपण की संभावनाएं देखी जाएंगी। यहां पर जो पौधरोपण होगा, उसका नाम पौराणिक महापुरुषों के नाम पर रखने का विचार अच्छा है। इस पर मंथन चल रहा है। बाढ़ का पानी उतरे तो इस पर आगे बढ़ा जाएगा।
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रजनीश त्यागी
बिजनौर। जिले को पर्यटन के क्षेत्र में नाम दिलाने के लिए प्रशासन एक कदम और आगे बढ़ाने जा रहा है। गंगा किनारे एक नया सिटी फॉरेस्ट बसाने और उसके अलग-अलग हिस्सों के नाम राजा दुष्यंत, शकुंतला, महाराजा भरत, कण्व ऋषि के नाम पर रखने की तैयारी भी चल रही है। पुरुषोत्तमपुर में करीब 1100 बीघा और रावली क्षेत्र में करीब 600 बीघा जमीन पर एक लाख 85 हजार पौधे लगाए जाने हैं। इस जमीन के काफी बड़े हिस्से पर पिछले साल तक माफिया खेती कर रहे थे, जिसे प्रशासन ने कब्जा मुक्त करा लिया था।
प्रशासन ने जिले को पर्यटन के क्षेत्र में आगे ले जाने की योजना पर युद्ध स्तर पर काम शुरू कर दिया है। जहां एक ओर सभी ऐतिहासिक, पौराणाकि, सांस्कृतिक, प्राकृतिक स्थलों की जानकारी एक मंच पर एकत्रित की जाएगी। अगली कड़ी में बात करें तो रावली में कण्व ऋषि आश्रम है। कालीदास का महाकाव्य अभिज्ञान शाकुंतलम इस बात का सबसे बड़ा सबूत माना जाता है कि राजा दुष्यंत और शकुंतला की प्रणय स्थली बिजनौर में गंगा और मालन के मिलन के आसपास का क्षेत्र था। वहीं, राजा भरत को कण्व ऋषि के आश्रम में ही राजा दुष्यंत ने शेर के शावक के दांत गिनते हुए देखा था। अब इसे दुर्भाग्य कहें कि उदासीनता, यह सभी पौराणिक तथ्य होने के बावजूद कण्व ऋषि आश्रम को उत्तराखंड में दर्ज कराते हुए विकसित कर दिया गया। हाल ही में जिले के इतिहासकारों से बातचीत के बाद प्रशासन इसे भी विकसित करने की तैयारी कर रहा है। (संवाद)
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कटान में बह गया पुराना सिटी फॉरेस्ट
रावली तटबंध से सटा एक सिटी फॉरेस्ट तत्कालीन डीएम परमेश्वरन अय्यर ने लगवाया था। यहां पर करीब 600 बीघा से ज्यादा जमीन में 1990 के दशक में लाखों की संख्या में पौधे लगाए गए थे। जिले भरे के स्कूलों के बच्चों ने पौधरोपण किया था। यह सिटी फॉरेस्ट विकसित हआ तो लोग घूमने भी जाते थे। लेकिन गंगा कटान और कटान रोकने के प्रबंध न होने के कारण पूरा सिटी फॉरेस्ट गंगा के कटान में बह गया।
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बाढ़ का पानी उतरने के बाद पौधरोपण : ज्वाइंट मजिस्ट्रेट
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एवं एसडीएम विक्रमादित्य सिंह मलिक ने कहा कि हमने अपने क्षेत्र में पुरूषोत्तमपुर में करीब 1100 बीघा, रावली क्षेत्र में करीब 600 बीघा जमीन को पौधरोपण के लिए चिह्नित किया है। यहां पर करीब एक लाख 85 हजार पौधे लगाए जाने का लक्ष्य रखा गया है। हमने पौधरोपण के लिए जमीन उपलब्ध होने की रिपोर्ट भेज दी है।
महापुरुषों के नाम पर होगा नाम: डीएम
डीएम उमेश मिश्रा ने कहा कि गंगा किनारे पौधरोपण के लिए जमीन खाली होने का पता चला है। यहां पर पहले पौधरोपण की संभावनाएं देखी जाएंगी। यहां पर जो पौधरोपण होगा, उसका नाम पौराणिक महापुरुषों के नाम पर रखने का विचार अच्छा है। इस पर मंथन चल रहा है। बाढ़ का पानी उतरे तो इस पर आगे बढ़ा जाएगा।