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डिप्थीरिया से पीड़ित चार और बच्चे मिले

Tue, 02 Sep 2014 05:30 AM IST
Bijnor
Bijnor Updated Tue, 02 Sep 2014 05:30 AM IST
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बिजनौर। डिप्थीरिया से पीड़ित बच्चों के मिलने का सिलसिला जारी है। डिप्थीरिया के लक्षण दिखाई देने पर चार बच्चों में से दो को भर्ती किया तथा दो को उपचार देकर घर भेज दिया गया। विभाग टीकाकरण में सावधानी बरत रहा है।
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रविवार की शाम कोतवाली देहात के गांव दौलताबाद निवासी असलम के पांच वर्षीय पुत्र अनस, नजीबाबाद क्षेत्र के गांव बिजौरी निवासी कल्याण के छह वर्षीय पुत्र विनीत व पांच वर्षीय पुत्र आशु, गांव खाईखेड़ी निवासी मो. आबिद के 12 वर्षीय पुत्र सुहैल को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। चिकित्सक ने बच्चों में डिप्थीरिया के लक्षण दिखाई देने पर उन्हें वार्ड में भर्ती करा दिया।
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तीन दिन में 12 हजार बच्चों को लगे टीके
बूस्टर अभियान के तहत डीपीटी के टीकाकरण के लिए विभागीय टीम जुट गई है। तीन दिन में गांव में कैंप लगाकर टीमों ने सात साल तक के करीब 12 हजार बच्चों को बूस्टर डोज लगाई है। जल्द ही संक्रमित क्षेत्र को कवर लिया जाएगा।
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चारों ओर के पांच गांवों को किया शामिल
जिन गांवों में डिप्थीरिया से पीड़ित रोगी मिल रहे हैं। डीपीटी को कवर करने लिए विभाग ने बूस्टर डोज अभियान के तहत प्रत्येक क्षेत्र के आसपास के पांच गांवों को अभियान में शामिल किया है। अभियान में सात साल तक के सभी बच्चों को बूस्टर डोज लगाई जाएगी।
वर्षों पूर्व लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे बच्चे
सात साल पहले जिले में था मात्र 20 प्रतिशत टीकाकरण
बिजनौर। वर्षों पूर्व टीकाकरण में हुई लापरवाही का खामियाजा बच्चे अब भुगत रहे हैं। बीमार होने वाले अधिकांश बच्चे पांच से आठ साल के हैं। एनुअल हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक सात वर्ष पूर्व जिले में मात्र 20 प्रतिशत टीकाकरण हुआ।
पांच से दस वर्ष के बच्चों की हुई मौत
शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम होती है। बावजूद इसके लिए जिले में फैले डिप्थीरिया ने पांच से दस वर्ष तक की आयु के बच्चों को अधिक चपेट में लिया। यानी वर्षों पूर्व टीकाकरण में हुई लापरवाही का खामियाजा बच्चे अब भुगत रहे हैं।
एनुअल हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट
एनुअल हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी होती है। इस रिपोर्ट के मुताबिक जिले में वर्ष 2008 में पूर्ण टीकाकरण मात्र 20 प्रतिशत, 2009 में 28 प्रतिशत, 2010 में 39.4 प्रतिशत, 2011 में 48.6 प्रतिशत, 2012 में 59.3 प्रतिशत, 2013 में 69.2 प्रतिशत बच्चों को सभी छह जानलेवा बीमारियों के पूरे टीके लगे।

जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. अशोक कुमार ने बताया कि जिले में इस समय करीब 80 प्रतिशत बच्चों को पूर्ण प्रतिरक्षित किया जा रहा है। वर्ष 2014 की रिपोर्ट में पूर्ण टीकाकरण की प्रतिशतता और बढे़गी। बूस्टर डोज अभियान पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जल्द ही डिप्थीरिया पर कंट्रोल कर लिया जाएगा।
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