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स्वतंत्रता संग्राम सेनानी को दी गई अंतिम विदाई
Bijnor
Updated Thu, 21 Aug 2014 05:30 AM IST
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धामपुर। स्वतंत्रता सेनानी चरन सिंह सुमन के पार्थिव शरीर को बुधवार को हजारों नम आंखों ने राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी। उनका अंतिम संस्कार हरिद्वार में गंगा तट पर किया गया। उनके अंतिम दर्शन करने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। बुधवार को नगीना चौक स्थित उनके आवास से राजकीय सम्मान से निकली शव यात्रा में पूर्व विधायक रामेश्वरी देवी, पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह, दिनेश चंद्र अग्रवाल नवीन, भारतभूषण शर्मा, राजू शर्मा, श्रीकृष्ण शर्मा, ओमप्रकाश शर्मा, सतीश शर्मा, पूर्व पालिकाध्यक्ष लीना सिंह, संतोष राजपूत सभासद, डीएस चौहान, जिला सहकारी समिति के सभापति अमित चौहान, यशपाल तुली, डॉ. एनपी सिंह, सत्यराज, नसीम राणा, एसडीएम अंजूलता, सीओ हिरेंद्र यादव, तहसीलदार डॉ. जगन्नाथ सिंह, कोतवाल अजय कुमार आदि मौजूद रहे। वहीं कोई जनप्रतिनिधि उनकी शवयात्रा में शामिल नहीं हुआ। इसे लेकर लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं रहीं।
कई बड़े आंदोलन किए, रचनाएं लिखी
सुमन जी ने नगर क्षेत्र की समस्याओं का निदान कराने को कई बडे़ आंदोलन किए। उन्होंने अपने जीवन में कई पत्रिकाआें की रचना की। वे वर्ष 1967 से लेकर 69 तक आईटीआई बिजनौर की प्रबंध कार्यकारिणी के अध्यक्ष रहे। वर्ष 1964 से 69 तक धामपुर पालिका के सभासद रहे। 1972 से 1985 तक उत्तर प्रदेश पीडब्लूडी मजदूर यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रहे। सुमन जी ने सोशलिस्ट, रक्तधारा, संयुक्त धारा, पत्रिकाओं, कहानी, निबंध, कविताओं का प्रकाशन व संपादन किया। बिजनौर जिले के 700 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का सचित्र जीवन वृतांत, स्वतंत्रता संग्राम के वीरों की गाथा शीर्षक पर उन्होंने लेखन किया। वर्ष 1942 में नूरपुर थाने पर तिरंगा फहराने के अभियान में शहीद परवीन सिंह एवं रिक्खी पर आधारित काव्य खंड की रचना की।
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कई बड़े आंदोलन किए, रचनाएं लिखी
सुमन जी ने नगर क्षेत्र की समस्याओं का निदान कराने को कई बडे़ आंदोलन किए। उन्होंने अपने जीवन में कई पत्रिकाआें की रचना की। वे वर्ष 1967 से लेकर 69 तक आईटीआई बिजनौर की प्रबंध कार्यकारिणी के अध्यक्ष रहे। वर्ष 1964 से 69 तक धामपुर पालिका के सभासद रहे। 1972 से 1985 तक उत्तर प्रदेश पीडब्लूडी मजदूर यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रहे। सुमन जी ने सोशलिस्ट, रक्तधारा, संयुक्त धारा, पत्रिकाओं, कहानी, निबंध, कविताओं का प्रकाशन व संपादन किया। बिजनौर जिले के 700 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का सचित्र जीवन वृतांत, स्वतंत्रता संग्राम के वीरों की गाथा शीर्षक पर उन्होंने लेखन किया। वर्ष 1942 में नूरपुर थाने पर तिरंगा फहराने के अभियान में शहीद परवीन सिंह एवं रिक्खी पर आधारित काव्य खंड की रचना की।
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