कार्बेट टाइगर रिजर्व का बफर जोन बढ़ा

Bijnor Updated Mon, 19 Nov 2012 12:00 PM IST
कालागढ़। कार्बेट टाइगर रिजर्व में बिजनौर के अमानगढ़ का जंगल आरक्षित वन क्षेत्र में शामिल होने के बाद अब कार्बेट टाइगर रिजर्व का बफर जोन बढ़ गया है। बिजनौर के उप प्रभागीय वनाधिकारी सीपी मलिक का कहना है कि अब अमानगढ़ का आरक्षित वन क्षेत्र अमानगढ़ टाइगर रिजर्व घोषित हो गया है। पर्यटन को विकसित करने के लिए शासन को बजट प्रस्ताव भेजा जा रहा है।
कार्बेट टाइगर रिजर्व में बिजनौर के अमानगढ़ आरक्षित वन क्षेत्र का 8060 हेक्टेयर वन क्षेत्र शामिल हो जाने का शासनादेश वन विभाग को मिल गया है। उप प्रभागीय वनाधिकारी का कहना है कि शासनादेश के अनुसार अब इस क्षेत्र को अमानगढ़ टाइगर रिजर्व के नाम से जाना जाएगा। इसकी वर्तमान व्यवस्था बिजनौर के डीएफओ के हाथ में रहेगी जिसकी वार्षिक योजना बनाई जा रही है। अमानगढ़ में पर्यटकाें के लिए विश्रामगृह में दो कक्ष हैं। पर्यटन को विकसित करने के लिए मैनेजमेंट प्लान अलग से बनाया जाएगा। इस क्षेत्र में छह से आठ बाघ, 12 से 16 तक गुलदार और 18-20 तक की संख्या में हाथियों का झुंड देखा गया है। इसके अतिरिक्त हिरन, चीतल, सांभर, सुअर आदि बड़ी संख्या में हैं।

ऐतिहासिक दस्तावेजों में कार्बेट टाइगर रिजर्व
अंग्रेजी शासन से पूर्व 1815-20 में यह क्षेत्र दक्षिणी पातली दून का अंग था। 1858 में मेजर रेमजे ने इस क्षेत्र के संरक्षण के लिए कदम उठाया था। 1859-60 में ढिकाला व बोक्साड़ (वर्तमान कालागढ़ के निकट रामगंगा की घाटी) से पालतू जानवरों को हटा दिया गया। 1868 में यहां की जिम्मेदारी वन विभाग को सौंप दी गई। 1907 में माइकल कीन ने इसे सेंचुरी बनाने का पत्र लिखा जिसे 1909 में जान हीवेट ने अस्वीकार कर दिया। 1916 में रामनगर के डीएफओ ईअर स्टीवेंस ने कालागढ़ वन प्रभाग की धारा रेंज को अभयारण्य घोषित कराने की मांग शासन से की। 1917 में वन संरक्षक स्विगविज ने अपनी सहमती प्रदान कर दी। 1938 में संयुक्त प्रांत के तत्कालीन गर्वनर मॅल्कम हैली ने प्रस्ताव शासन को दिया। इसी वर्ष लंदन में हुई बैठक में पर्यवेक्षक स्टुअर्ट के प्रयास से यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया। 8 अगस्त 1936 को कार्बेट नेशनल पार्क की स्थापना हुई जिसे उस समय हैली नेशनल पार्क का नाम दिया गया था। शुरू में नेशनल पार्क का क्षेत्रफल 323.75 वर्ग किमी था। 1966 में इसमें 197.07 वर्ग किमी और जोड़ दिया गया। 11 जून 1991 को समस्त कालागढ़ वन प्रभाग 611 वर्ग किमी, तराई पश्चिम वन प्रभाग का 89 वर्ग किमी और रामनगर वन प्रभाग का क्षेत्र भी इसमें जुड़ गया। वर्तमान में कार्बेट टाइगर रिजर्व का क्षेत्रफल 1338 वर्ग किमी है जिसमें बिजनौर के अमानगढ़ का 8060 हेक्टेअर और शामिल हो गया है।

वर्तमान प्रशासनिक ढांचा
कार्बेट टाइगर रिजर्व के संचालन के लिए एक निदेशक, उपनिदेशक व कालागढ़ डीएफओ नियुक्त हैं। अब बिजनौर के अमानगढ़ के इसका अंग बन जाने से एक और डीफओ की बढ़ोत्तरी हो गई है। बिजनौर के डीएफओ के अधीन अमानगढ़ टाइगर रिजर्व रहेगा। उप प्रभागीय वनाधिकारी सीपी मलिक का कहना है कि हालांकि अभी इस इलाके को बफर जोन में ही शामिल किया गया है।

कार्बेट टाइगर रिजर्व एक नजर में
कार्बेट टाइगर रिजर्व 1338 वर्ग किमी
कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान 520.82 वर्ग किमी
सोनानदी अभ्यारण 301.18 वर्ग किमी
आरक्षित वन क्षेत्र 496.54 वर्ग किमी
अमानगढ़ टाइगर रिजर्व 8060 हेक्टेअर

दो संरक्षित वन क्षेत्र शामिल
कार्बेट टाइगर रिजर्व में अब दो संरक्षित क्षेत्र शामिल हैं - कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान व सोना नदी वन्यजीव विहार। रिजर्व में अब वैधानिक दृष्टि से राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव विहार और आरक्षित वन क्षेत्र शामिल हैं।

प्रवेश द्वार
कार्बेट टाइगर रिजर्व में प्रवेश के लिए कोटद्वार, कालागढ़, अमानगढ़, खारागेट, रथुआढाब, आमडंडा, धनगढ़ी आदि से प्रवेश दिया जा रहा है।

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