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यूपी में स्वास्थ्य सेवाएं सबसे ज्यादा बदहाल: डॉ. प्रवीण

Tue, 18 Sep 2018 12:14 AM IST
Updated Tue, 18 Sep 2018 12:14 AM IST
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यूपी में स्वास्थ्य सेवाएं सबसे ज्यादा बदहाल: डॉ. प्रवीण
यूपी में स्वास्थ्य सेवाएं सबसे ज्यादा बदहाल: डॉ. प्रवीण
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बिजनौर। प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ के अध्यक्ष डा. प्रवीण कुमार ने कहा कि भारत में सबसे ज्यादा खस्ताहाल स्वास्थ्य सेवाएं उत्तर प्रदेश की हैं। प्रदेश की कुल 22 करोड़ जनसंख्या पर आठ हजार चिकित्सक ही कार्यरत हैं, जबकि 18 हजार चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं। जिले की हालत और भी ज्यादा खराब है। जनपद में कुल 150 चिकित्सकों में से 79 ही कार्यरत हैं। चिकित्सकों की कमी दूर कराने के लिए संघ की ओर से 24 सितंबर को सीएम को ज्ञापन भेजा जाएगा और एक अक्टूबर को प्रदेश के चिकित्सक काला फीता बांधकर धरना-प्रदर्शन करेंगे।
जिला अस्पताल के सभाकक्ष में आयोजित प्रेस वार्ता में प्रांतीय अध्यक्ष डा. प्रवीण कुमार ने कहा कि प्रदेश में चिकित्सकों की भारी कमी चल रही है। संघ की ओर से इसे लेकर कई बार राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया, लेकिन शासन की ओर से इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। स्वास्थ्य सेवाओं में उत्तर प्रदेश सबसे ज्यादा फिसड्डी है। प्रदेश में कुल 18 हजार चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं। इनमें से केवल आठ हजार ही कार्यरत हैं। एक तो 22 करोड़ की आबादी पर 18 हजार चिकित्सक भी कम हैं। इसके बावजूद आधे से भी कम डॉक्टर सूबे में सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर बिजनौर जनपद की बात की जाए तो स्थिति और भी ज्यादा खराब है। जिले की कुल 45 लाख आबादी पर 150 चिकित्सकों के पद शासन से स्वीकृत हैं। इसके सापेक्ष कुल 79 ही कार्यरत हैं। इनमें से आधे ही ओपीडी करते हैं। बाकी को अफसरों द्वारा इधर-उधर के विभागीय कार्यों में उलझा दिया जाता है। इससे चिकित्सा कार्य प्रभावित होता है। डा. प्रवीण ने बताया कि वर्तमान में हालात ये हैं कि अब युवा सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में आने को तैयार नहीं हैं। इसका कारण शासन द्वारा थोपी गई ज्यादातर नीतियों पर चिकित्सकों को और काम करना पड़ता है। इस दौरान चिकित्सकों ने वर्षों से लंबित पड़ी विभागीय प्रोन्नतियां निस्तारित करने, विशेषज्ञों और सामान्य चिकित्सकों का कैडर अलग न करने, ग्रामीण भत्ता मूल वेतन 25 प्रतिशत करने, पोस्टमार्टम भत्ता प्रति केस 100 रुपये से बढ़ाकर दो हजार रुपये करने, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के अधिकार को कायम रखते हुए समस्त लंबित आवेदनों को तत्काल निस्तारित करने, चिकित्सकों के लिए अलग से सुरक्षा कानून बनाने आदि की मांगे की गई।
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इस अवसर पर सीएमएस सुखवीर सिंह, जिलाध्यक्ष डा. रजनीश शर्मा, कोषाध्यक्ष राजीव रस्तोगी, डा. कपिल चौधरी, डा. बीआर त्यागी, डाश. मनोज सेन, डा. केके सिंह, हृदेश सारस्वत आदि मौजूद रहे।
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