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गायत्री शक्तिपीठ पर तीन दिवसीय समारोह संपन्न
Updated Sun, 12 Nov 2017 11:18 PM IST
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नजीबाबाद । गायत्री शक्तिपीठ विस्तार संकल्प के साथ गायत्री साधकों ने 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ में पूर्णाहुति प्रदान की। युवा स्वावलंबन और नारी सशक्तिकरण के प्रति भी वचनबद्धता दुहराई गई।
जयनगर स्थित गायत्री शक्तिपीठ पर तीन दिवसीय समारोह के अंतिम दिन शांतिकुंज हरिद्वार से आए परमानंद द्विवेदी और अजय त्रिपाठी के निर्देशन में 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ में पूर्णाहुति दी गई। शांतिकुंज की ओर से चलाए जा रहे सात आंदोलनों नारी जागरण, युवा स्वावलंबन, आस्तिकता संवर्धन, पर्यावरण संरक्षण, कुरीति उन्मूलन, योग प्राणायाम की ओर से स्वास्थ्य पर अपने-अपने क्षेत्रों में काम करने का कार्यकर्ताओं से आह्वान किया गया। परमानंद द्विवेदी ने अपने पूर्वजों की स्मृति में वृक्ष लगाने, वेदों को अध्ययन का आह्वान किया। कार्यक्रम के आयोजक न्यायमूर्ति (रिटायर्ड) रामअवतार सिंह की देखरेख में आयोजित कार्यक्रम में अजय त्रिपाठी ने कहा कि गृहस्थ आश्रम सबसे बड़ा आश्रम है । अजय त्रिपाठी और पुष्कर राज ने वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया। पूर्णाहुति के बाद गायत्री साधकों ने देव दक्षिणा में दुर्व्यसन त्यागने, सत्कर्म अपनाने, तनाव रहित जीवन जीने, प्रसन्न रहने, सामाजिक कार्यों में अंशदान देने का संकल्प लिया। शक्तिपीठ के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह, सचिव कमल शर्मा, कोषाध्यक्ष मधुबाला गुप्ता, हरीश शर्मा, रविंद्र चौहान, डॉ. एलएस बिष्ट, धर्मपाल चौहान, दुलारी देेवी के सहयोग से आयोजित समारोह के समापन पर शांतिकुंज की टोली को भावभीनी विदाई दी गई।
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जयनगर स्थित गायत्री शक्तिपीठ पर तीन दिवसीय समारोह के अंतिम दिन शांतिकुंज हरिद्वार से आए परमानंद द्विवेदी और अजय त्रिपाठी के निर्देशन में 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ में पूर्णाहुति दी गई। शांतिकुंज की ओर से चलाए जा रहे सात आंदोलनों नारी जागरण, युवा स्वावलंबन, आस्तिकता संवर्धन, पर्यावरण संरक्षण, कुरीति उन्मूलन, योग प्राणायाम की ओर से स्वास्थ्य पर अपने-अपने क्षेत्रों में काम करने का कार्यकर्ताओं से आह्वान किया गया। परमानंद द्विवेदी ने अपने पूर्वजों की स्मृति में वृक्ष लगाने, वेदों को अध्ययन का आह्वान किया। कार्यक्रम के आयोजक न्यायमूर्ति (रिटायर्ड) रामअवतार सिंह की देखरेख में आयोजित कार्यक्रम में अजय त्रिपाठी ने कहा कि गृहस्थ आश्रम सबसे बड़ा आश्रम है । अजय त्रिपाठी और पुष्कर राज ने वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया। पूर्णाहुति के बाद गायत्री साधकों ने देव दक्षिणा में दुर्व्यसन त्यागने, सत्कर्म अपनाने, तनाव रहित जीवन जीने, प्रसन्न रहने, सामाजिक कार्यों में अंशदान देने का संकल्प लिया। शक्तिपीठ के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह, सचिव कमल शर्मा, कोषाध्यक्ष मधुबाला गुप्ता, हरीश शर्मा, रविंद्र चौहान, डॉ. एलएस बिष्ट, धर्मपाल चौहान, दुलारी देेवी के सहयोग से आयोजित समारोह के समापन पर शांतिकुंज की टोली को भावभीनी विदाई दी गई।
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