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कहीं बजट तो कहीं रेत, बजरी के अभाव में कायम रहे सड़कों के गड्ढ़े
Updated Thu, 15 Jun 2017 12:16 AM IST
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नहीं भर पाए सड़कों के गड्ढे
कहीं बजट तो कहीं रेत-बजरी अभाव आया आड़े
अमर उजाला ब्यूरो
बिजनौर।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश के बाद भी जिले की सड़कें समय सीमा में गड्ढामुक्त नहीं हो पाईं। खनन बंद होने से कई विभागों ने सड़कों को गड्ढामुक्त कराने से हाथ खड़े कर दिए। कहीं तो शासन से ही बजट नहीं आया।
मुख्यमंत्री ने 15 जून तक सूबे की सभी सड़कों को गड्ढामुक्त कराने के निर्देश दिए थे। अफसर इस काम में जुट गए थे। पीडब्ल्यूडी ने चार करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर टेंडर किए थे। सड़कों को गड्ढामुक्त करने का काम भी शुरू हुआ था, पर विभाग 70 प्रतिशत ही काम कर पाया है। जिले में खनन बंद होने से बाकी सड़कें गड्ढामुक्त होने से रह गई हैं। बिजनौर में खनन बंद होने से उत्तराखंड से रेत, बजरी जिले में आता था। बरसात से पहले उत्तराखंड की नदियां भी बंद कर दी गई हैं। इस वजह से जिले में सड़कों का निर्माण रुक गया है।
उत्तराखंड में बरसात के बाद खनन शुरू होगा। जिले में खनन शुरू होने की उम्मीद नहीं है। वन विभाग से चल रही रार के चलते जिले में खनन होना संभव नहीं लग रहा। गन्ना विभाग ने 440 सड़कों के लिए तीन करोड़ का बजट बनाकर शासन को भेजा था। शासन से एक पैसा भी नहीं मिला। इसलिए गन्ना विभाग की एक भी सड़क गड्ढामुक्त नहीं हो पाई।
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जिले में 12 नगर पालिका व छह नगर पंचायतें हैं। नगर पालिकाओं व पंचायतों की तमाम सड़कें गड्ढे में तब्दील हो चुकी हैं। निकायों ने इन्हें गड्ढामुक्त करने की जहमत नहीं उठाई है। यहां भी बजरी न मिलने की वजह से अफसर सड़कों को गड्ढामुक्त कराने से हाथ खड़े कर रहे हैं। जिला पंचायत की 20 किलोमीटर सड़कों को गड्ढामुक्त कराने के साथ मरम्मत के लिए एक करोड़ 52 लाख के प्रस्ताव तैयार किए गए थे। यहां भी खनन का मसला आड़े आ गया।
एएमए मुकेश जैन के मुताबिक, तीन सड़कों पर काम शुरू हुआ है। रेत, बजरी न मिलने के कारण उसमें भी दिक्कत आ रही है। पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन योगेश पंवार के मुताबिक, खनन बंद होने के कारण सड़कों को गड्ढामुक्त कराने में बाधा आ रही है। 70 प्रतिशत से ज्यादा सड़कें गड्ढामुक्त करा चुके हैं। जिला गन्ना अधिकारी ओपी सिंह के मुताबिक, शासन से धन आने के बाद सड़कों को गड्ढामुक्त बनाया जाएगा।
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कहीं बजट तो कहीं रेत-बजरी अभाव आया आड़े
अमर उजाला ब्यूरो
बिजनौर।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश के बाद भी जिले की सड़कें समय सीमा में गड्ढामुक्त नहीं हो पाईं। खनन बंद होने से कई विभागों ने सड़कों को गड्ढामुक्त कराने से हाथ खड़े कर दिए। कहीं तो शासन से ही बजट नहीं आया।
मुख्यमंत्री ने 15 जून तक सूबे की सभी सड़कों को गड्ढामुक्त कराने के निर्देश दिए थे। अफसर इस काम में जुट गए थे। पीडब्ल्यूडी ने चार करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर टेंडर किए थे। सड़कों को गड्ढामुक्त करने का काम भी शुरू हुआ था, पर विभाग 70 प्रतिशत ही काम कर पाया है। जिले में खनन बंद होने से बाकी सड़कें गड्ढामुक्त होने से रह गई हैं। बिजनौर में खनन बंद होने से उत्तराखंड से रेत, बजरी जिले में आता था। बरसात से पहले उत्तराखंड की नदियां भी बंद कर दी गई हैं। इस वजह से जिले में सड़कों का निर्माण रुक गया है।
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उत्तराखंड में बरसात के बाद खनन शुरू होगा। जिले में खनन शुरू होने की उम्मीद नहीं है। वन विभाग से चल रही रार के चलते जिले में खनन होना संभव नहीं लग रहा। गन्ना विभाग ने 440 सड़कों के लिए तीन करोड़ का बजट बनाकर शासन को भेजा था। शासन से एक पैसा भी नहीं मिला। इसलिए गन्ना विभाग की एक भी सड़क गड्ढामुक्त नहीं हो पाई।
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जिले में 12 नगर पालिका व छह नगर पंचायतें हैं। नगर पालिकाओं व पंचायतों की तमाम सड़कें गड्ढे में तब्दील हो चुकी हैं। निकायों ने इन्हें गड्ढामुक्त करने की जहमत नहीं उठाई है। यहां भी बजरी न मिलने की वजह से अफसर सड़कों को गड्ढामुक्त कराने से हाथ खड़े कर रहे हैं। जिला पंचायत की 20 किलोमीटर सड़कों को गड्ढामुक्त कराने के साथ मरम्मत के लिए एक करोड़ 52 लाख के प्रस्ताव तैयार किए गए थे। यहां भी खनन का मसला आड़े आ गया।
एएमए मुकेश जैन के मुताबिक, तीन सड़कों पर काम शुरू हुआ है। रेत, बजरी न मिलने के कारण उसमें भी दिक्कत आ रही है। पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन योगेश पंवार के मुताबिक, खनन बंद होने के कारण सड़कों को गड्ढामुक्त कराने में बाधा आ रही है। 70 प्रतिशत से ज्यादा सड़कें गड्ढामुक्त करा चुके हैं। जिला गन्ना अधिकारी ओपी सिंह के मुताबिक, शासन से धन आने के बाद सड़कों को गड्ढामुक्त बनाया जाएगा।