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हिम्मत से कोरोना को हराया 80 वर्षीय बाबू सिंह चौहान ने
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हिम्मत से कोरोना को हराया 80 वर्षीय बाबू सिंह चौहान ने
रेहड़। भगतावाला निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक 80 वर्षीय बाबू सिंह चौहान ने हिम्मत के बल पर कारोना को हराया था। बुजुर्ग बाबू सिंह गत वर्ष कोरोना संक्रमित हो गए थे, लेकिन हौसला बनाए रखा और हिम्मत नहीं हारी। वह कोरोना को हराकर घर लौटे। अब कोरोना काल में लोग उनके अनुभवों का लाभ उठा रहे हैं।
गांव भगतावाला निवासी बाबू सिंह चौहान साल 2003 में एचसीएम इंटर कॉलेज कासमपुरगढ़ी से सेवानिवृत्त हुए थे। हृदय के मरीज बाबू सिंह पिछले वर्ष जून में अपनी दवाई लेने सिद्ध हॉस्पिटल मुरादाबाद गए थे। कोरोना के बढ़ते प्रकोप के चलते हॉस्पिटल में उनकी कोरोना की जांच की गई। जांच के बाद वह दवाई लेकर अपने घर आ गए। तीन दिन बाद स्वास्थ्य विभाग बिजनौर की ओर से उन्हें कोरोना संक्रमित होने की सूचना दी गई। पीएचसी कासमपुरगढ़ी द्वारा उपचार के लिए उन्हें टीएमयू मुरादाबाद में भर्ती कराया गया। उन्होंने बताया कि टीएमयू में स्वास्थ्य कर्मियों ने उनका अच्छे से ध्यान रखा। संक्रमित होने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
उनका कहना है कि परिजन भी लगातार उन्हें हौसला देते रहे। सकारात्मक विचारों के चलते वह दस दिन बाद कोरोना को मात देकर घर आ गए। घर आकर वह गर्म पानी, दूध में हल्दी, संतरा आदि लेते रहे। कोरोना को हराने के लिए वैक्सीन की दोनों डोज लगवा ली हैं। उनका कहना है की सकारात्मक विचार कोरोना से लड़ने के लिए बेहतर हथियार हैं। इसके अलावा उन्होंने लोगों से मास्क लगाने तथा सोशल डिस्टेंस का पालन करने का आह्वान किया है।
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रेहड़। भगतावाला निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक 80 वर्षीय बाबू सिंह चौहान ने हिम्मत के बल पर कारोना को हराया था। बुजुर्ग बाबू सिंह गत वर्ष कोरोना संक्रमित हो गए थे, लेकिन हौसला बनाए रखा और हिम्मत नहीं हारी। वह कोरोना को हराकर घर लौटे। अब कोरोना काल में लोग उनके अनुभवों का लाभ उठा रहे हैं।
गांव भगतावाला निवासी बाबू सिंह चौहान साल 2003 में एचसीएम इंटर कॉलेज कासमपुरगढ़ी से सेवानिवृत्त हुए थे। हृदय के मरीज बाबू सिंह पिछले वर्ष जून में अपनी दवाई लेने सिद्ध हॉस्पिटल मुरादाबाद गए थे। कोरोना के बढ़ते प्रकोप के चलते हॉस्पिटल में उनकी कोरोना की जांच की गई। जांच के बाद वह दवाई लेकर अपने घर आ गए। तीन दिन बाद स्वास्थ्य विभाग बिजनौर की ओर से उन्हें कोरोना संक्रमित होने की सूचना दी गई। पीएचसी कासमपुरगढ़ी द्वारा उपचार के लिए उन्हें टीएमयू मुरादाबाद में भर्ती कराया गया। उन्होंने बताया कि टीएमयू में स्वास्थ्य कर्मियों ने उनका अच्छे से ध्यान रखा। संक्रमित होने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
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उनका कहना है कि परिजन भी लगातार उन्हें हौसला देते रहे। सकारात्मक विचारों के चलते वह दस दिन बाद कोरोना को मात देकर घर आ गए। घर आकर वह गर्म पानी, दूध में हल्दी, संतरा आदि लेते रहे। कोरोना को हराने के लिए वैक्सीन की दोनों डोज लगवा ली हैं। उनका कहना है की सकारात्मक विचार कोरोना से लड़ने के लिए बेहतर हथियार हैं। इसके अलावा उन्होंने लोगों से मास्क लगाने तथा सोशल डिस्टेंस का पालन करने का आह्वान किया है।
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