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गंगा की उफनती लहरों पर रोज खतरे में किसानों की जिंदगी की नाव
Updated Fri, 15 Sep 2017 12:47 AM IST
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बिजनौर। परिवार चलाने के लिए खादर के किसान गंगा की उफनती लहरों पर नाव में सवार होकर मौत का सफर तय करते हैं। ये किसान अपनी खेतीबाड़ी करने के लिए गंगा पार करके नाव के सहारे जाने को मजबूर हैं। रोज ये किसान अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। कई बार नाव पलटने से किसानों की जान भी जा चुकी है। पर इसके बाद भी इनका जान जोखिम में डालना किसी को नहीं दिखता है।
जिले के काफी बड़े क्षेत्र से गंगा होकर निकलती है। यह खादर का इलाका जाना जाता है। इसके अलावा कई बड़ी अन्य नदियां भी हैं। मंडावर क्षेत्र के राजारामपुर, सीमली, कोहरपुर, मीरापुर, ब्रह्मपुरी, कुंदनपुर, टीप, रावली आदि दर्जन भर से ज्यादा गांव गंगा से सटे हैं। इन गांवों के किसानों की जमीन गंगा पार है। आने जाने के लिए केवल नाव का ही सहारा है। गंज क्षेत्र के भी कई गांवों की जमीन गंगा पार है। गंगा की उफनती लहरों को पार कर खेतों पर जाने के लिए किसानों की जान हर वक्त हथेली पर रहती है। किसान नाव के सहारे अपनी खेती करने जाते हैं और नाव से ही अपने पशुओं के लिए चारा लेकर लौटते हैं। गंगा की लहरों के बीच हादसे होते रहते हैं। किसान अपनी जान गंवा रहे हैं। पर किसी को इसकी चिंता नहीं है। आलम यह है कि कभी तो गंगा की लहरों में बहे किसानों व उनके परिजनों के शव भी नहीं मिल पाते हैं। किसानों के परिजनों को बिना शव मिले ही संतोष करके बैठना पड़ता है। दिन निकलते ही ये किसान खेतों पर जाने के लिए नाव में सवार हो जाते हैं। किसान शाम को घर सुरक्षित लौटेंगे या नहीं यह उन्हें भी नहीं पता रहता है।
करीब तीन महीने पहले गांव ब्रह्मपुरी के आधा दर्जन किसानों की नाव गंगा की उफनती लहरों के बीच में डूब गई थी। किसान चारा लेकर आ रहे थे। गनीमत रही कि किसानों ने चारे की गठरी को पकड़कर तैरकर जान बचा ली। जब सरकारी मशीनरी ने किसानों को तलाशना शुरू किया तो वे घटनास्थल से करीब पांच किलोमीटर दूर बहते मिले।
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ये हुए हादसे
2016 में मार्कंर्डेयपुरम की सगी बहनें संगीता व शिवानी गंगा पार करते समय डूबकर मरीं। संगीता का शव आज तक नहीं मिला।
-2016 में गांव राजारामपुर के सुनील की नाव पलटने से गंगा में डूबकर मौत।
-2016 में कोहरपुर निवासी जसराम की नाव से लौटते वक्त गंगा में गिरकर डूबकर मौत।
-2016 में कोहरपुर निवासी पप्पू की गंगा में डूबकर मौत।
-2016 में सीमलाकला निवासी सोनू की गंगा में डूबकर मौत।
-2017 में दयालवाला निवासी ऊषा की नाव से गिरकर डूबने से मौत।
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जिले के काफी बड़े क्षेत्र से गंगा होकर निकलती है। यह खादर का इलाका जाना जाता है। इसके अलावा कई बड़ी अन्य नदियां भी हैं। मंडावर क्षेत्र के राजारामपुर, सीमली, कोहरपुर, मीरापुर, ब्रह्मपुरी, कुंदनपुर, टीप, रावली आदि दर्जन भर से ज्यादा गांव गंगा से सटे हैं। इन गांवों के किसानों की जमीन गंगा पार है। आने जाने के लिए केवल नाव का ही सहारा है। गंज क्षेत्र के भी कई गांवों की जमीन गंगा पार है। गंगा की उफनती लहरों को पार कर खेतों पर जाने के लिए किसानों की जान हर वक्त हथेली पर रहती है। किसान नाव के सहारे अपनी खेती करने जाते हैं और नाव से ही अपने पशुओं के लिए चारा लेकर लौटते हैं। गंगा की लहरों के बीच हादसे होते रहते हैं। किसान अपनी जान गंवा रहे हैं। पर किसी को इसकी चिंता नहीं है। आलम यह है कि कभी तो गंगा की लहरों में बहे किसानों व उनके परिजनों के शव भी नहीं मिल पाते हैं। किसानों के परिजनों को बिना शव मिले ही संतोष करके बैठना पड़ता है। दिन निकलते ही ये किसान खेतों पर जाने के लिए नाव में सवार हो जाते हैं। किसान शाम को घर सुरक्षित लौटेंगे या नहीं यह उन्हें भी नहीं पता रहता है।
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करीब तीन महीने पहले गांव ब्रह्मपुरी के आधा दर्जन किसानों की नाव गंगा की उफनती लहरों के बीच में डूब गई थी। किसान चारा लेकर आ रहे थे। गनीमत रही कि किसानों ने चारे की गठरी को पकड़कर तैरकर जान बचा ली। जब सरकारी मशीनरी ने किसानों को तलाशना शुरू किया तो वे घटनास्थल से करीब पांच किलोमीटर दूर बहते मिले।
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ये हुए हादसे
2016 में मार्कंर्डेयपुरम की सगी बहनें संगीता व शिवानी गंगा पार करते समय डूबकर मरीं। संगीता का शव आज तक नहीं मिला।
-2016 में गांव राजारामपुर के सुनील की नाव पलटने से गंगा में डूबकर मौत।
-2016 में कोहरपुर निवासी जसराम की नाव से लौटते वक्त गंगा में गिरकर डूबकर मौत।
-2016 में कोहरपुर निवासी पप्पू की गंगा में डूबकर मौत।
-2016 में सीमलाकला निवासी सोनू की गंगा में डूबकर मौत।
-2017 में दयालवाला निवासी ऊषा की नाव से गिरकर डूबने से मौत।