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वाहन चालकों व परिचालकों के चरित्र का सत्यापन पुलिस से कराए स्कूल प्रबंधन
Updated Sun, 08 Oct 2017 01:47 AM IST
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एआरटीओ प्रशासन ने शिक्षा विभाग के अफसरों को जारी किया लिखित पत्र
अमर उजाला ब्यूरो
अमरोहा।
स्कूली बच्चों के साथ बढ़ते जा रहे अपराधों को देखते हुए अफसर सतर्क हो गए हैं। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी ने सभी स्कूल वाहनों पर स्थायी एवं अस्थायी रूप से कार्यरत चालकों एवं परिचालकों के चरित्र का सत्यापन पुलिस से कराने के लिए कहा है। इस संबंध में उन्होंने डीआईओएस व बीएसए को पत्र लिखा है।
जनपद में अधिकतर स्कूली वाहन मानकों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे हैं। इन पर तैनात चालक व परिचालक भी मनमर्जी से रखे गए हैं। लेकिन देश में बच्चों के साथ बढ़ती जा रही आपराधिक घटनाओं को लेकर सरकार व सुप्रीम कोर्ट तक गंभीर हो गए हैं। सरकार ने परिवहन विभाग के अफसरों को मानकविहीन वाहनों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्कूली वाहनों पर तैनात चालक व परिचालकों का चरित्र कैसा है, इसकी जांच कराने को कहा है।
मामले को संजीदगी से लेते हुए एआरटीओ प्रशासन रमाकांत वर्मा ने जिला विद्यालय निरीक्षक व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को लिखित पत्र जारी किया है। इसमें उन्होंने कहा है कि शैक्षिक संस्थान में केवल शैक्षिक संस्थान के स्वामित्व अथवा संस्थान के साथ अनुबंधित वाहनों का संचालन ही स्कूल वाहन के रूप में किया जा सकता है जिनके पास स्कूल वाहन का वैध पंजीयन व परमिट होना आवश्यक है। स्कूल वाहन के रूप में संचालित वाहन में चालक के अतिरिक्त एक ऐसे सहायक का होना भी अति आवश्यक है जो बच्चों की देखभाल कर सके। परिचालक के दायित्वों की पूर्ति कर सके। चालक व परिचालकों का पुलिस के द्वारा चरित्र सत्यापन कराया जाना अनिवार्य है। इसके पूर्ण कराने का दायित्व स्कूल प्रबंधन का है। इसके अलावा अन्य नियम भी हैं जिनके बारे में सभी विद्यालय के प्रिंसिपलों को अवगत करा दिया जाए।
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अमर उजाला ब्यूरो
अमरोहा।
स्कूली बच्चों के साथ बढ़ते जा रहे अपराधों को देखते हुए अफसर सतर्क हो गए हैं। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी ने सभी स्कूल वाहनों पर स्थायी एवं अस्थायी रूप से कार्यरत चालकों एवं परिचालकों के चरित्र का सत्यापन पुलिस से कराने के लिए कहा है। इस संबंध में उन्होंने डीआईओएस व बीएसए को पत्र लिखा है।
जनपद में अधिकतर स्कूली वाहन मानकों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे हैं। इन पर तैनात चालक व परिचालक भी मनमर्जी से रखे गए हैं। लेकिन देश में बच्चों के साथ बढ़ती जा रही आपराधिक घटनाओं को लेकर सरकार व सुप्रीम कोर्ट तक गंभीर हो गए हैं। सरकार ने परिवहन विभाग के अफसरों को मानकविहीन वाहनों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्कूली वाहनों पर तैनात चालक व परिचालकों का चरित्र कैसा है, इसकी जांच कराने को कहा है।
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मामले को संजीदगी से लेते हुए एआरटीओ प्रशासन रमाकांत वर्मा ने जिला विद्यालय निरीक्षक व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को लिखित पत्र जारी किया है। इसमें उन्होंने कहा है कि शैक्षिक संस्थान में केवल शैक्षिक संस्थान के स्वामित्व अथवा संस्थान के साथ अनुबंधित वाहनों का संचालन ही स्कूल वाहन के रूप में किया जा सकता है जिनके पास स्कूल वाहन का वैध पंजीयन व परमिट होना आवश्यक है। स्कूल वाहन के रूप में संचालित वाहन में चालक के अतिरिक्त एक ऐसे सहायक का होना भी अति आवश्यक है जो बच्चों की देखभाल कर सके। परिचालक के दायित्वों की पूर्ति कर सके। चालक व परिचालकों का पुलिस के द्वारा चरित्र सत्यापन कराया जाना अनिवार्य है। इसके पूर्ण कराने का दायित्व स्कूल प्रबंधन का है। इसके अलावा अन्य नियम भी हैं जिनके बारे में सभी विद्यालय के प्रिंसिपलों को अवगत करा दिया जाए।
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