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धामपुर में जल्द होगी ग्रामीण न्यायलय की स्थापना
Updated Thu, 09 Nov 2017 11:43 PM IST
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धामपुर। हाईकोर्ट और उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश पर धामपुर में जल्द ही ग्रामीण न्यायालय की स्थापना होगी। हाईकोर्ट स्थापना समिति ने सरकार के आदेश पर वर्ष 2016 में धामपुर में ग्रामीण न्यायालय की स्थापना कराने को मंजूरी दे दी थी , लेकिन अभी तक भूमि का चयन न होने के कारण न्यायालय की स्थापना नहीं हो सकी है। बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राजपाल सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता गजेंद्र सिंह व उमाशंकर शर्मा ने बताया कि बार एसोसिएशन की मांग पर हाईकोर्ट और उत्तर प्रदेश सरकार ने धामपुर में ग्रामीण न्यायालय की स्थापना कराने को वर्ष 2016 में मंजूरी दी है।
गौरतलब है कि ग्रामीण न्यायालय की स्थापना केवल उन्हीं तहसील क्षेत्रों में होती है। जिन तहसीलों में मुंसफी न्यायालय नहीं होते हैं। धामपुर में मुंसफी होने के कारण ग्रामीण न्यायालय को धामपुर में स्थापित करने की मंजूरी हाई कोर्ट स्थापना समिति ने एक साल पहले दी है। अधिवक्ताओं ने बताया कि इस ग्रामीण न्यायालय की स्थापना के लिए हाईकोर्ट स्थापना समिति ने जिला जज को निर्देशित किया था कि वह इसकी स्थापना के लिए जल्द भूमि की खरीदारी कराए। बताया गया कि जिला जज ने जमीन को खरीदने के लिए एक भूमि निरीक्षण समिति का गठन कर दिया था। इस दौरान अधिवक्ताओं के प्रयास से गांव जैतरा में शुगर मिल मार्ग पर जमीन मिल भी गई थी। जैतरा पंचायत के प्रधान आदित्य कुमार ने इस जमीन पर ग्रामीण न्यायालय स्थापित कराने को प्रस्ताव बनाकर भी निरीक्षण समिति को दे दिया था। पर गांव के कुछ लोगों की आपत्ति पर निरीक्षण समिति ने इस प्रस्ताव को निरस्त कर दिया था। इसके बाद बार ऐसो. के पदाधिकारियों ने सरकार की ओर से तहसील के पास बने अधिवक्ताओं के चैंबरों को ग्रामीण न्यायालय के लिए केंद्रित किया गया। पर जब निरीक्षण समिति ने विनियमित क्षेत्र के जेई की टीम से इन चैंबरों की जांच कराई तो टीम ने उन चैंबरों को इसके लिए अनु उपयुक्त बता दिया। ऐसे में निरीक्षण समिति ने फौरी तौर पर यह लिख कर दे दिया कि यदि न्यायालय की स्थापना के लिए तहसील परिसर में कोई उपयुक्त भवन हो तो इसका संचालन उसमें कराया जा सकता है। इस क्रम में जिला जज ने बार के अधिवक्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए बुलाया, लेकिन जिला जज के बाहर होने के कारण प्रतिनिधिमंडल की उनसे अभी तक वार्ता नहीं हो सकी है। प्रतिनिधि मंडल में अध्यक्ष दिनेश चंद्र त्यागी , प्रधान जैतरा एवं अधिवक्ता आदित्य कुमार, सह सचिव अल्ताफ उमर शामिल है।
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गौरतलब है कि ग्रामीण न्यायालय की स्थापना केवल उन्हीं तहसील क्षेत्रों में होती है। जिन तहसीलों में मुंसफी न्यायालय नहीं होते हैं। धामपुर में मुंसफी होने के कारण ग्रामीण न्यायालय को धामपुर में स्थापित करने की मंजूरी हाई कोर्ट स्थापना समिति ने एक साल पहले दी है। अधिवक्ताओं ने बताया कि इस ग्रामीण न्यायालय की स्थापना के लिए हाईकोर्ट स्थापना समिति ने जिला जज को निर्देशित किया था कि वह इसकी स्थापना के लिए जल्द भूमि की खरीदारी कराए। बताया गया कि जिला जज ने जमीन को खरीदने के लिए एक भूमि निरीक्षण समिति का गठन कर दिया था। इस दौरान अधिवक्ताओं के प्रयास से गांव जैतरा में शुगर मिल मार्ग पर जमीन मिल भी गई थी। जैतरा पंचायत के प्रधान आदित्य कुमार ने इस जमीन पर ग्रामीण न्यायालय स्थापित कराने को प्रस्ताव बनाकर भी निरीक्षण समिति को दे दिया था। पर गांव के कुछ लोगों की आपत्ति पर निरीक्षण समिति ने इस प्रस्ताव को निरस्त कर दिया था। इसके बाद बार ऐसो. के पदाधिकारियों ने सरकार की ओर से तहसील के पास बने अधिवक्ताओं के चैंबरों को ग्रामीण न्यायालय के लिए केंद्रित किया गया। पर जब निरीक्षण समिति ने विनियमित क्षेत्र के जेई की टीम से इन चैंबरों की जांच कराई तो टीम ने उन चैंबरों को इसके लिए अनु उपयुक्त बता दिया। ऐसे में निरीक्षण समिति ने फौरी तौर पर यह लिख कर दे दिया कि यदि न्यायालय की स्थापना के लिए तहसील परिसर में कोई उपयुक्त भवन हो तो इसका संचालन उसमें कराया जा सकता है। इस क्रम में जिला जज ने बार के अधिवक्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए बुलाया, लेकिन जिला जज के बाहर होने के कारण प्रतिनिधिमंडल की उनसे अभी तक वार्ता नहीं हो सकी है। प्रतिनिधि मंडल में अध्यक्ष दिनेश चंद्र त्यागी , प्रधान जैतरा एवं अधिवक्ता आदित्य कुमार, सह सचिव अल्ताफ उमर शामिल है।
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