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वेव ग्रुप को सोफ्ट लोन मिलने की आस जगी
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वेव ग्रुप को सोफ्ट लोन मिलने की आस जगी
बिजनौर। लंबी जद्दोजहद के बाद आखिरकार वेव ग्रुप की बिजनौर और चांदपुर चीनी मिल से किसानों को पिछले साल का बकाया गन्ना मूल्य भुगतान मिलने की आस जगी है। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस संबंध में गन्ना आयुक्त को पुन: सुनवाई के आदेश दिए हैं। दोनों चीनी मिलों पर किसानों का 62.13 करोड़ रुपया बकाया है। अगर चीनी मिलों को सोफ्ट लोन मिला तो चालू पेराई सत्र के लिए भी कैश क्रेडिट लिमिट मिल जाएगी।
वेव ग्रुप की बिजनौर मिल पर पिछले साल का 26.50 करोड़ और चांदपुर चीनी मिल का 35.63 करोड़ रुपया बकाया है। मिलों की सीबीआई जांच के चलते शासन ने सॉफ्ट लोन देने से हाथ खड़े कर दिए थे। मिल की चीनी पहले से ही बैंक के पास गिरवी पड़ी है। सोफ्ट लोन न मिल पाने से वेव ग्रुप की चीनी मिल किसानों को गन्ना भुगतान नहीं दे पा रही थीं। भुगतान के लिए किसान कई महीने से आंदोलन कर रहे हैं। ग्रुप की ओर से इस मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका दाखिल की गई थी। सोमवार को इस मामले में हाईकोर्ट ने अपना निर्णय सुनाते हुए गन्ना आयुक्त को कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। इससे किसानों को गन्ना भुगतान मिलने की आस जगी है।
माना जा रहा है कि शासन हाईकोर्ट के इस आदेश के आधार पर भी सोफ्ट लोन दे सकता है। हाईकोर्ट के आदेश से मिल से जुड़े हजारों किसानों को राहत मिल सकती है। बिजनौर चीनी मिल के प्रशासनिक अधिकारी एके सिंह ने इसकी पुष्टि की है। उनके अनुसार हाईकोर्ट ने सोफ्ट लोन पर कार्रवाई करने के लिए कहा है। कहा कि जब भी सोफ्ट लोन मिलेगा तो गन्ना भुगतान सीधे किसान के खाते में भेजा जाएगा। किसानों का हित मिल के लिए सर्वोपरि है। वहीं, भाकियू जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह के अनुसार किसान को भुगतान चाहे जैसे हो। भुगतान न मिला तो पूरे जिले में एतिहासिक आंदोलन किया जाएगा।
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इस साल भी हुआ कम भुगतान
वेव ग्रुप की बिजनौर और चांदपुर चीनी मिल ने वर्तमान पेराई सत्र में भी बहुत कम भुगतान किया है। मिल ने गन्ना भुगतान के लिए बैंक को चीनी गिरवी रखकर सीसीएल (कैश क्रेडिट लिमिट) मांगी थी। बिजनौर चीनी मिल के लिए 80 करोड़ और चांदपुर चीनी मिल के लिए 85 करोड़ की सीसीएल मांगी थी। लेकिन शासन ने सीसीएल को भी स्वीकृत नहीं किया था। अब सीसीएल भी मंजूर होने की उम्मीद है। जबकि भुगतान न करने वाली बाकी चीनी मिलों को पहले ही सोफ्ट लोन मिल चुका है। बरकातपुर चीनी मिल को 44.73 करोड़, स्योहारा को 98.55 करोड़, धामपुर मिल को 65.35 करोड़, बुंदकी चीनी मिल को 48.28 करोड़ तथा बहादरपुर चीनी मिल को 39.66 करोड़ का सोफ्ट लोन मिला था। इन चीनी मिलों को कुल 296.57 करोड़ का सोफ्ट लोन मिला था। बिजनौर शुगर मिल से 9600 किसान जुड़े हैं। इन किसानों का आठ हजार 22 हेक्टेअर जमीन में खड़ा गन्ना मिल में पेराई के लिए दिया जाता है। इसके अलावा चांदपुर शुगर मिल में 16 हजार किसान गन्ना देते हैं। इस मिल में 14 हजार 773 हेक्टेअर जमीन में खड़े गन्ने की पेराई होती है।
वर्तमान बकाया स्थिति
चीनी मिल बकाया
धामपुर 64.28
स्योहारा 42.31
बिलाई 202
बहादरपुर 25.22
बरकातपुर 74.86
बुंदकी 12.34
चांदपुर 59.56
बिजनौर 32
नजीबाबाद 13.31
कुल 526
नोट : ये आंकड़े जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय से लिए गए हैं और एक सप्ताह पूर्व के हैं।
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बिजनौर। लंबी जद्दोजहद के बाद आखिरकार वेव ग्रुप की बिजनौर और चांदपुर चीनी मिल से किसानों को पिछले साल का बकाया गन्ना मूल्य भुगतान मिलने की आस जगी है। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस संबंध में गन्ना आयुक्त को पुन: सुनवाई के आदेश दिए हैं। दोनों चीनी मिलों पर किसानों का 62.13 करोड़ रुपया बकाया है। अगर चीनी मिलों को सोफ्ट लोन मिला तो चालू पेराई सत्र के लिए भी कैश क्रेडिट लिमिट मिल जाएगी।
वेव ग्रुप की बिजनौर मिल पर पिछले साल का 26.50 करोड़ और चांदपुर चीनी मिल का 35.63 करोड़ रुपया बकाया है। मिलों की सीबीआई जांच के चलते शासन ने सॉफ्ट लोन देने से हाथ खड़े कर दिए थे। मिल की चीनी पहले से ही बैंक के पास गिरवी पड़ी है। सोफ्ट लोन न मिल पाने से वेव ग्रुप की चीनी मिल किसानों को गन्ना भुगतान नहीं दे पा रही थीं। भुगतान के लिए किसान कई महीने से आंदोलन कर रहे हैं। ग्रुप की ओर से इस मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका दाखिल की गई थी। सोमवार को इस मामले में हाईकोर्ट ने अपना निर्णय सुनाते हुए गन्ना आयुक्त को कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। इससे किसानों को गन्ना भुगतान मिलने की आस जगी है।
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माना जा रहा है कि शासन हाईकोर्ट के इस आदेश के आधार पर भी सोफ्ट लोन दे सकता है। हाईकोर्ट के आदेश से मिल से जुड़े हजारों किसानों को राहत मिल सकती है। बिजनौर चीनी मिल के प्रशासनिक अधिकारी एके सिंह ने इसकी पुष्टि की है। उनके अनुसार हाईकोर्ट ने सोफ्ट लोन पर कार्रवाई करने के लिए कहा है। कहा कि जब भी सोफ्ट लोन मिलेगा तो गन्ना भुगतान सीधे किसान के खाते में भेजा जाएगा। किसानों का हित मिल के लिए सर्वोपरि है। वहीं, भाकियू जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह के अनुसार किसान को भुगतान चाहे जैसे हो। भुगतान न मिला तो पूरे जिले में एतिहासिक आंदोलन किया जाएगा।
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इस साल भी हुआ कम भुगतान
वेव ग्रुप की बिजनौर और चांदपुर चीनी मिल ने वर्तमान पेराई सत्र में भी बहुत कम भुगतान किया है। मिल ने गन्ना भुगतान के लिए बैंक को चीनी गिरवी रखकर सीसीएल (कैश क्रेडिट लिमिट) मांगी थी। बिजनौर चीनी मिल के लिए 80 करोड़ और चांदपुर चीनी मिल के लिए 85 करोड़ की सीसीएल मांगी थी। लेकिन शासन ने सीसीएल को भी स्वीकृत नहीं किया था। अब सीसीएल भी मंजूर होने की उम्मीद है। जबकि भुगतान न करने वाली बाकी चीनी मिलों को पहले ही सोफ्ट लोन मिल चुका है। बरकातपुर चीनी मिल को 44.73 करोड़, स्योहारा को 98.55 करोड़, धामपुर मिल को 65.35 करोड़, बुंदकी चीनी मिल को 48.28 करोड़ तथा बहादरपुर चीनी मिल को 39.66 करोड़ का सोफ्ट लोन मिला था। इन चीनी मिलों को कुल 296.57 करोड़ का सोफ्ट लोन मिला था। बिजनौर शुगर मिल से 9600 किसान जुड़े हैं। इन किसानों का आठ हजार 22 हेक्टेअर जमीन में खड़ा गन्ना मिल में पेराई के लिए दिया जाता है। इसके अलावा चांदपुर शुगर मिल में 16 हजार किसान गन्ना देते हैं। इस मिल में 14 हजार 773 हेक्टेअर जमीन में खड़े गन्ने की पेराई होती है।
वर्तमान बकाया स्थिति
चीनी मिल बकाया
धामपुर 64.28
स्योहारा 42.31
बिलाई 202
बहादरपुर 25.22
बरकातपुर 74.86
बुंदकी 12.34
चांदपुर 59.56
बिजनौर 32
नजीबाबाद 13.31
कुल 526
नोट : ये आंकड़े जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय से लिए गए हैं और एक सप्ताह पूर्व के हैं।