{"_id":"5a4fc2a84f1c1b40198b50e0","slug":"41515176616-bijnor-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"परिषदीय स्कूलों में मिलेगी अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
परिषदीय स्कूलों में मिलेगी अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा
Updated Fri, 05 Jan 2018 11:53 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इंग्लिश मीडियम होंगे परिषदीय स्कूल
बिजनौर। कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में भी अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा दी जाएगी। इसके लिए जिले के 55 स्कूलों को चिह्नित किया जाएगा। प्रत्येक विकास क्षेत्र से पांच-पांच स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा अगले सत्र से शुरू होगी।
शासन ने परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा शुरू करने के आदेश दिए हैं। शिक्षा सत्र 2018-19 में जिले के 55 स्कूलों को कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा दी जाएगी। इसके लिए प्रत्येक विकास क्षेत्र से पांच-पांच स्कूलों को चिह्नित किया जाएगा। इन स्कूलों में ऐसे शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी जो अंग्रेजी माध्यम में रुचि रखते हों। स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती के लिए जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की जाएगी। कमेटी ही सेवारत शिक्षकों की परीक्षा करा कर स्कूलों में उनकी तैनाती करेगी।
स्कूलों को चिह्नित करने के लिए विकास क्षेत्र के खंड शिक्षा अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। बीईओ अपने-अपने क्षेत्रों के ऐसे स्कूलों को चिह्नित कर देंगे जिन स्कूलों में छात्रों की संख्या 100 से अधिक हो। कक्षा एक से तीन तक की पढ़ाई पूरी तरह से अंग्रेजी माध्यम की होगी। कक्षा चार, पांच की पढ़ाई दोनोें भाषाओं में कराई जाएगी। जिला समन्वयक सलीम अख्तर बेग शासन द्वारा अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा शुरू करने के आदेश की पुष्टि की है।
विज्ञापन
पहले भी शुरू हुए थे अंग्रेजी माध्यम के स्कूल
जिले के प्राथमिक स्कूलों में पहले भी अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा शुरू हुई थी। वर्ष 2015 में विकास क्षेत्र हल्दौर के प्राथमिक विद्यालय मुबारकपुर तालन तथा विकास क्षेत्र मोहम्मदपुर देवमल के प्राथमिक विद्यालय धर्मनगरी द्वितीय में अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा शुरू की गई थी। लेकिन इन स्कूलों में न तो शिक्षकों की नियुक्ति की गई और न ही अंग्रेजी माध्यम की पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराई गईं। शिक्षा विभाग के अधिकारी भी इन स्कूलों में पहुंचने से बचते हैं। जबकि शिक्षक अपने दम पर ही बच्चों को कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर चला रहे हैं।
विज्ञापन
बिजनौर। कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में भी अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा दी जाएगी। इसके लिए जिले के 55 स्कूलों को चिह्नित किया जाएगा। प्रत्येक विकास क्षेत्र से पांच-पांच स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा अगले सत्र से शुरू होगी।
शासन ने परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा शुरू करने के आदेश दिए हैं। शिक्षा सत्र 2018-19 में जिले के 55 स्कूलों को कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा दी जाएगी। इसके लिए प्रत्येक विकास क्षेत्र से पांच-पांच स्कूलों को चिह्नित किया जाएगा। इन स्कूलों में ऐसे शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी जो अंग्रेजी माध्यम में रुचि रखते हों। स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती के लिए जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की जाएगी। कमेटी ही सेवारत शिक्षकों की परीक्षा करा कर स्कूलों में उनकी तैनाती करेगी।
विज्ञापन
स्कूलों को चिह्नित करने के लिए विकास क्षेत्र के खंड शिक्षा अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। बीईओ अपने-अपने क्षेत्रों के ऐसे स्कूलों को चिह्नित कर देंगे जिन स्कूलों में छात्रों की संख्या 100 से अधिक हो। कक्षा एक से तीन तक की पढ़ाई पूरी तरह से अंग्रेजी माध्यम की होगी। कक्षा चार, पांच की पढ़ाई दोनोें भाषाओं में कराई जाएगी। जिला समन्वयक सलीम अख्तर बेग शासन द्वारा अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा शुरू करने के आदेश की पुष्टि की है।
विज्ञापन
पहले भी शुरू हुए थे अंग्रेजी माध्यम के स्कूल
जिले के प्राथमिक स्कूलों में पहले भी अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा शुरू हुई थी। वर्ष 2015 में विकास क्षेत्र हल्दौर के प्राथमिक विद्यालय मुबारकपुर तालन तथा विकास क्षेत्र मोहम्मदपुर देवमल के प्राथमिक विद्यालय धर्मनगरी द्वितीय में अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा शुरू की गई थी। लेकिन इन स्कूलों में न तो शिक्षकों की नियुक्ति की गई और न ही अंग्रेजी माध्यम की पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराई गईं। शिक्षा विभाग के अधिकारी भी इन स्कूलों में पहुंचने से बचते हैं। जबकि शिक्षक अपने दम पर ही बच्चों को कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर चला रहे हैं।