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ओडीएफ होने के बाद अब कुपोषणमुक्त होगा जिला
Updated Sun, 23 Jul 2017 12:47 AM IST
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बिजनौर को कुपोषणमुक्त करने की कवायद शुरू
बिजनौर।
जिले के गांवों को खुले में शौचमुक्त बनाने के बाद अब कुपोषणमुक्त बनाने की कवायद भी शुरू हो गई है। कुपोषण मुक्त गांव बनाने के लिए कुछ आवश्यक बिंदु लिए गए हैं। इन बिंदुओं की प्रगति के आधार पर गांवों से कुपोषण दूर किया जाएगा। इसके लिए बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग ने तैयारी शुरू कर ली है। पहले चरण में जिले की 100 ग्राम पंचायतों में अभियान चलाया जाएगा।
गांव की 75 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को आयरन की खुराक का सेवन और बच्चों को कुपोषण के लाल ग्रोथ चार्ट से बाहर निकालना शामिल होगा। इसके अलावा आवश्यक बिंदुओं में स्वास्थ्य, बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग, शिक्षा, पंचायतीराज और ग्राम विकास को शामिल किया गया है। इन विभागों की ओर से चलाए जा रहे अभियान में प्रदर्शन के आधार पर अंक दिए जाएंगे। शासन की ओर से निर्धारित 100 अंकों में से जो भी ग्राम सभा 75 प्रतिशत अंक प्राप्त कर लेगी, उसे कुपोषणमुक्त घोषित कर दिया जाएगा।
ऐसे मिलेंगे नंबर
स्वास्थ्य विभाग के कार्यक्रम में प्रसव पूर्ण महिलाओं की सभी जांच कराने पर 15 औरजन्म के एक घंटे में बच्चे को स्तनपान कराने पर दस अंक दिए जाएंगे। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग में आहार योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर दस और पोषाहार तथा हॉट कुक मील दिए जाने पर पांच, शिक्षा विभाग में किशोरी पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा पर पांच और साप्ताहिक आयरन की गोली बांटने पर दस, ग्राम्य विकास में मनरेगा के अंतर्गत महिलाओं को आर्थिक योजनाओं का लाभ देने पर पांच, पंचायती राज में गांव के ओडीएफ होने पर 20, स्कूलों में साफ पेयजल मिलने पर दस और ग्राम सभा की ओर से मासिक समीक्षा किए जाने पर दस नंबर दिए जाएंगे। जिला कार्यक्रम अधिकारी दीप्ति भार्गव के अनुसार गांवों को कुपोषण मुक्त करने का कार्यक्रम जल्दी शुरू होगा। सभी गांवों को कुपोषण मुक्त करने में सहयोग दें।
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बिजनौर।
जिले के गांवों को खुले में शौचमुक्त बनाने के बाद अब कुपोषणमुक्त बनाने की कवायद भी शुरू हो गई है। कुपोषण मुक्त गांव बनाने के लिए कुछ आवश्यक बिंदु लिए गए हैं। इन बिंदुओं की प्रगति के आधार पर गांवों से कुपोषण दूर किया जाएगा। इसके लिए बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग ने तैयारी शुरू कर ली है। पहले चरण में जिले की 100 ग्राम पंचायतों में अभियान चलाया जाएगा।
गांव की 75 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को आयरन की खुराक का सेवन और बच्चों को कुपोषण के लाल ग्रोथ चार्ट से बाहर निकालना शामिल होगा। इसके अलावा आवश्यक बिंदुओं में स्वास्थ्य, बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग, शिक्षा, पंचायतीराज और ग्राम विकास को शामिल किया गया है। इन विभागों की ओर से चलाए जा रहे अभियान में प्रदर्शन के आधार पर अंक दिए जाएंगे। शासन की ओर से निर्धारित 100 अंकों में से जो भी ग्राम सभा 75 प्रतिशत अंक प्राप्त कर लेगी, उसे कुपोषणमुक्त घोषित कर दिया जाएगा।
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ऐसे मिलेंगे नंबर
स्वास्थ्य विभाग के कार्यक्रम में प्रसव पूर्ण महिलाओं की सभी जांच कराने पर 15 औरजन्म के एक घंटे में बच्चे को स्तनपान कराने पर दस अंक दिए जाएंगे। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग में आहार योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर दस और पोषाहार तथा हॉट कुक मील दिए जाने पर पांच, शिक्षा विभाग में किशोरी पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा पर पांच और साप्ताहिक आयरन की गोली बांटने पर दस, ग्राम्य विकास में मनरेगा के अंतर्गत महिलाओं को आर्थिक योजनाओं का लाभ देने पर पांच, पंचायती राज में गांव के ओडीएफ होने पर 20, स्कूलों में साफ पेयजल मिलने पर दस और ग्राम सभा की ओर से मासिक समीक्षा किए जाने पर दस नंबर दिए जाएंगे। जिला कार्यक्रम अधिकारी दीप्ति भार्गव के अनुसार गांवों को कुपोषण मुक्त करने का कार्यक्रम जल्दी शुरू होगा। सभी गांवों को कुपोषण मुक्त करने में सहयोग दें।
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