{"_id":"5a1efe3b4f1c1b9e678becd7","slug":"31511980603-bijnor-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सेंट मेरी स्कूल का कार्यक्रम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सेंट मेरी स्कूल का कार्यक्रम
Updated Thu, 30 Nov 2017 12:14 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिजनौर । सिस्टर रानी मरिया को पोप फ्रांसिस की ओर से धन्य घोषित करने पर तेरा प्रेम कैथोलिक चर्च में विशेष प्रार्थना सभा आयोजित की गई। सिस्टर रानी मरिया ने बिजनौर के सेंट मेरी स्कूल से सेवा का कार्य प्रारंभ किया था। प्रार्थना में अन्याय से लड़ने और सच के साथ चलने का संदेश दिया गया।
फादर वर्गीस कोटूर ने बताया कि सिस्टर रानी मरिया गरीबों के हितों की लड़ाई लड़ती रहीं। पोप फ्रांसिस ने संत घोषित होने के पहले चरण की उपाधि से उन्हें नवाजा है। प्रार्थना सभा की अध्यक्षता बिशप जान वाडेकल की ओर से की गयी। उनके निर्देशन में दीपक भटनागर ने रानी मरिया के जीवन दर्शन को पढ़ कर सुनाया। फादर एंटो पूथ्थूसेरी ने पोप फ्रांसिस द्वारा रानी मरिया को धन्य धोषित किए जाने वाले प्रेरितिक पत्र को पढ़ कर जिले के ईसाई समुदाय को इस बारे में सूचना दी। फादर वर्गीस कोटूर ने आर्शीवचन और धार्मिक प्रवचन से सभी को संत बनने के रास्तों पर चलने और गरीबों की सेवा करने का संदेश दिया। अंत में रानी मरिया के चित्र पर पुष्प अर्पित कर आरती की गयी। कार्यक्रम के अंत में रानी मरिया के जीवन पर आधारित एक लघु फिल्म को भी प्रदर्शित किया गया। इस अवसर पर ईसाई समुदाय के 300 से अधिक सदस्य उपस्थित रहें। फादर डॉ. मैथ्यू जॉन ने कहा कि रानी मरिया के जीवन में सेवा का काम जिला बिजनौर की पावन धरती से प्रारंभ हुआ था और पोप द्वारा उन्हें धन्य की उपाधि से नवाजा जाना हमारे लिए गर्व की बात है। नौ जुलाई 1965 में रानी मरिया को पटना से एक मिशन ओरियंटेशन कोर्स के लिए बिजनौर बिशप ग्रेसियन के नेतृत्व में भेजा गया था। सिस्टर रानी मरिया ने कोर्स पूरा कर के 24 दिसंबर 1965 को सेंट मेरी स्कूल बिजनौर में बच्चों को पढ़ाने का कार्य किया।
विज्ञापन
फादर वर्गीस कोटूर ने बताया कि सिस्टर रानी मरिया गरीबों के हितों की लड़ाई लड़ती रहीं। पोप फ्रांसिस ने संत घोषित होने के पहले चरण की उपाधि से उन्हें नवाजा है। प्रार्थना सभा की अध्यक्षता बिशप जान वाडेकल की ओर से की गयी। उनके निर्देशन में दीपक भटनागर ने रानी मरिया के जीवन दर्शन को पढ़ कर सुनाया। फादर एंटो पूथ्थूसेरी ने पोप फ्रांसिस द्वारा रानी मरिया को धन्य धोषित किए जाने वाले प्रेरितिक पत्र को पढ़ कर जिले के ईसाई समुदाय को इस बारे में सूचना दी। फादर वर्गीस कोटूर ने आर्शीवचन और धार्मिक प्रवचन से सभी को संत बनने के रास्तों पर चलने और गरीबों की सेवा करने का संदेश दिया। अंत में रानी मरिया के चित्र पर पुष्प अर्पित कर आरती की गयी। कार्यक्रम के अंत में रानी मरिया के जीवन पर आधारित एक लघु फिल्म को भी प्रदर्शित किया गया। इस अवसर पर ईसाई समुदाय के 300 से अधिक सदस्य उपस्थित रहें। फादर डॉ. मैथ्यू जॉन ने कहा कि रानी मरिया के जीवन में सेवा का काम जिला बिजनौर की पावन धरती से प्रारंभ हुआ था और पोप द्वारा उन्हें धन्य की उपाधि से नवाजा जाना हमारे लिए गर्व की बात है। नौ जुलाई 1965 में रानी मरिया को पटना से एक मिशन ओरियंटेशन कोर्स के लिए बिजनौर बिशप ग्रेसियन के नेतृत्व में भेजा गया था। सिस्टर रानी मरिया ने कोर्स पूरा कर के 24 दिसंबर 1965 को सेंट मेरी स्कूल बिजनौर में बच्चों को पढ़ाने का कार्य किया।
विज्ञापन