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कालागढ़ की सिंचाई वर्कशाप नीलामी के बाद बिस्मार हुई
Updated Mon, 10 Jul 2017 12:35 AM IST
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कालागढ़ की सिंचाई वर्कशाप हुई बिस्मार
कालागढ़ (बिजनौर)। कालागढ़ बांध के लिए बनी सिंचाई विभाग की उत्तर प्रदेश की एक बड़ी वर्कशाप नीलामी के बाद बिस्मार हो गई। वर्कशाप का मलबा बिक जाने के बाद उसके फर्श तक को उखाड़ दिया गया।
1960 के दशक में उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग ने कालागढ़ में रामगंगा बांध के लिए स्थापित की थी। 57 साल तक रामगंगा बांध परियोजना में अपना योगदान देने वाली वर्कशाप आज बिस्मार हो गई है। एनजीटी के आदेशों पर कालागढ़ परियोजना की भूमि को वन विभाग को सौंपे जाने की मुहिम के तहत सिंचाई विभाग ने इस वर्कशाप को समाप्त कर नीलाम कर दिया, जिसे नीलामी के बाद ठेकेदार ने बिस्मार कर दिया। फर्श तक खोद दिया गया। उसे भी बाहर ले जाया जा रहा है। पुराने कर्मचारी अब्दुल लतीफ, अहमद हसन, सुरेश कुमार, मान सिंह आदि का कहना है कि इस वर्कशाप में सुबह आठ बजे बजने वाला साइरन कई किमी दूर तक सुना जाता था। इस वर्कशाप में 15-20 हजार तक कर्मी काम करते थे। इस कार्यशाला को उत्तराखंड के सिंचाई विभाग ने एनजीटी का सहारा लेकर नीलाम कर दिया। नीलामी का सामान उठाने का समय भी 42 दिन था, पर महीनों बीत जाने के बाद भी यहां इसका सामान उठाया जा रहा है।
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कालागढ़ (बिजनौर)। कालागढ़ बांध के लिए बनी सिंचाई विभाग की उत्तर प्रदेश की एक बड़ी वर्कशाप नीलामी के बाद बिस्मार हो गई। वर्कशाप का मलबा बिक जाने के बाद उसके फर्श तक को उखाड़ दिया गया।
1960 के दशक में उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग ने कालागढ़ में रामगंगा बांध के लिए स्थापित की थी। 57 साल तक रामगंगा बांध परियोजना में अपना योगदान देने वाली वर्कशाप आज बिस्मार हो गई है। एनजीटी के आदेशों पर कालागढ़ परियोजना की भूमि को वन विभाग को सौंपे जाने की मुहिम के तहत सिंचाई विभाग ने इस वर्कशाप को समाप्त कर नीलाम कर दिया, जिसे नीलामी के बाद ठेकेदार ने बिस्मार कर दिया। फर्श तक खोद दिया गया। उसे भी बाहर ले जाया जा रहा है। पुराने कर्मचारी अब्दुल लतीफ, अहमद हसन, सुरेश कुमार, मान सिंह आदि का कहना है कि इस वर्कशाप में सुबह आठ बजे बजने वाला साइरन कई किमी दूर तक सुना जाता था। इस वर्कशाप में 15-20 हजार तक कर्मी काम करते थे। इस कार्यशाला को उत्तराखंड के सिंचाई विभाग ने एनजीटी का सहारा लेकर नीलाम कर दिया। नीलामी का सामान उठाने का समय भी 42 दिन था, पर महीनों बीत जाने के बाद भी यहां इसका सामान उठाया जा रहा है।
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